Horror Podcast in Hindi : एक ऐसा तांत्रिक, जो उस नरपिशाच से भी ज्यादा शक्तिशाली हो, कहां मिलेगा। यही सोच रहा था अनुज?
अनुज इसी उधेड़ बुन में अपने घर आ गया। वहां उसके पिता रामपाल जी ने कहा – ‘‘अनुज मैं चाहता हूं, तू कल शहर वापस चला जा। मैंने सुना है कि तू अपने दोस्त की मौत का बदला, उस नरपिशाच से लेना चाहता है। इस सब चक्कर में मत पड़ और शहर चला जा।’’
सफर भाग – 1 | Horror Story Pishach Ki Kahani
‘‘पिताजी आप बात को समझिये, यह सब मैं अपने दोस्त के लिये नहीं कर रहा हूं। बल्कि इस गांव को, नरपिशाच के चंगुल से मुक्त कराने के लिये कर रहा हूं।’’ अनुज ने अपने पिता को समझाते हुए कहा।
रामपाल जी ने गुस्से से उसे डाटा – ‘‘मैं तुझे जो कुछ कह रहा हूं। बस वही कर, कल अगर तुझे कुछ हो गया, तो हम क्या करेंगे। आज तक उस तांत्रिक से कोई नहीं जीत पाया। न जीते जी, न उसके मरने के बाद।’’
अनुज बहुत डर गया था। वह अपने पिता के गुस्से को जानता था। अनुज बोला -‘‘पिताजी मैं शहर चला जाउंगा, लेकिन किसी को तो आगे बढ़ना पड़ेगा। आप गॉव वालों से कहिये मेरा साथ दें। अगर सब मिल कर इस समस्या से निकलने की कोशिश करेंगे। तो हम बच पायेंगे। नहीं तो एक न एक दिन, पूरा गांव उसका शिकार बन जायेगा।’’
रामपाल जी बोले – ‘‘ठीक है कोशिश कर लेते हैं। मैं गांव वालों से बात करूंगा, लेकिन तू कुछ भी अकेले मत करना।’’
अनुज मान गया। अगले दिन गांव में पंचायत रखी गई। उसमें फैसला हुआ कि गांव के चार आदमी दूसरे गांव जाकर तांत्रिक ढूंढेंगे। उनके साथ अनुज भी जायेगा।
अगले दिन अनुज अपने साथ गांव के चार लोगों को लेकर, सुबह ही निकल गया। वे सब दूसरे गांव गये। कई तांत्रिकों से मिले, लेकिन सभी ने मना कर दिया, क्योंकि वो सब उस तांत्रिक और उसकी शक्तियों के बारे में जानते थे।
इस सब में शाम होने लगी थी। तभी एक गांव वाले ने कहा – ‘‘हमें वापस गांव चलना चाहिये अगर अंधेरा हो गया, तो वह नरपिशाच हमें नहीं छोड़ेगा। उसे सब पता होगा कि हम क्या कर रहे हैं।’’
सबने उसकी बात का समर्थन किया और गांव की ओर चल दिये। गांव तक पहुंचने से पहले ही अंधेरा होने लगा। यह देख कर सभी डर गये। अनुज ने चारों को रोका और कहा – ‘‘भाईयों अंधेरे में जाना ठीक नहीं। मैं पहले ही अपना दोस्त खो चुका हूं। हम यहां किसी धर्मशाला में रुक जाते हैं।’’
चारों गांव वाले भी डरे हुए थे, वे मान गये। सभी वापस मुड़ गये, लेकिन तभी उन्हें किसी के रोने की आवाज सुनाई दी। अनुज पीछे मुड़ जाना चाहता था। तभी एक गांव वाले ने उससे कहा – ‘‘ऐसी गलती मत करना यह उसी नरपिशाच की चाल है। पीछे मुड़ कर देखा तो वो तुम्हें अपनी ओर बुला लेगा।’’
अनुज सावधान हो गया और वापस चलने लगा तभी उसके कानों में आवाज पड़ी – ‘‘रुक जा दोस्त इतने साल की दोस्ती। अब दोस्त को अकेला छोड़ कर जा रहा है। यह नरपिशाच मुझे रोज मारता है। मुझे बचा ले।’’
अनुज पीछे मुड़ा और देखा एक खेत की पगडंडी पर उसका दोस्त राहुल खड़ा रो रहा था। उसके कपड़े फटे हुए थे। उसके कपड़ों पर कई जगह खून लगा था। उसके हाथों से भी खून बह रहा था।
अनुज रोता हुआ अपने दोस्त की तरफ तेजी से भागा, लेकिन गांव के चारा लोगों ने उसे तेजी से पकड़ लिया।
अनुज चिल्लाने लगा – ‘‘छोड़ो मुझे। मेरा दोस्त बुला रहा है। मुझे उसे छुड़ाना है।’’
तभी एक गांव वाले उसे थप्पड़ मारा – ‘‘बेवकूफ तू तो मरेगा ही हमें भी मरवायेगा। वो तेरा दोस्त नहीं है। नरपिशाच ने उसे अपना चेला बना लिया है। वह अब तेरा दोस्त नहीं है। नरपिशाच मार डालेगा हम सब को।’’
अनुज की हालत खराब हो गई थी। वही वहीं जमीन पर बैठ गया। एक ने उसे पानी पिलाया। उसकी आंखों से अब भी आंसू बह रहे थे। दो आदमियों ने उसे उठाया और अपने साथ लेकर आगे बढ़ गये। पांचो अब एक धर्मशाम में रुक गये थे और सुबह होने का इंतजार कर रहे थे।
सबने फैसला किया, कि उनमें से बारी बारी एक जागता रहेगा। कहीं अनुज उठ कर उधर न चला जाये। अनुज की रखवाली करना जरूरी था।
अनुज गहरी नींद में सो रहा था। तभी उसने सपने में देखा कि वह नरपिशाच राहुल को मार रहा है। अपने नखून उसके शरीर में गड़ा कर उसका खून पी रहा है। राहुल अनुज अनुज पुकार रहा था।
अचानक अनुज की आंख खुली, वह दरवाजे की ओर भागा। एक आदमी ने सबको शोर मचा कर जगा दिया फिर चारों ने अनुज को पकड़ लिया।
तभी उपर सीढ़ियों से गेरुए कपड़े पहने, एक साधू बाबा नीचे आये। उन्होंने अनुज के उपर गंगाजल के छींटे मारे। अनुज शांत हो गया। वह अब बेहोश सा होने लगा था। दो आदमी उसे पकड़ कर कमरे के अंदर ले गये।
साधू बाबा के पूछने पर, बाकी दोंनो आदमियों ने सारी बात बता दी। उन्होंने कहा – ‘‘इसे कल साथ में लेकर मेरे आश्रम में आना।’’
सुबह जब अनुज की आंख खुली, तो चारो आदमी उसे लेकर साधू बाबा के आश्रम में पहुंच गये। अनुज से बाबा ने अकेले में बात की, और उसे गांव जाने के लिये कहा।
बाबा से मिलकर अनुज और चारो आदमी गांव पहुंच गये। वहां जाकर अनुज ने मुखिया से कहा – ‘‘मुखिया जी साधू बाबा गांव में आयेंगे और यहां हवन पूजन करके, उस तांत्रिक को मुक्ति दिलायेंगे। साथ उन्होंने कहा आज तक जितने भी लोग उसका शिकार हुए हैं। वे उन्हें भी मुक्ति दिलायेंगे।’’
मुखिया जी बहुत खुश हुए वे बोले – ‘‘अगर ऐसा हो जाये तो हमारे गांव का कल्याण हो जायेगा। बेटा तुमने बहुत अच्छा काम किया है। अपनी जान पर खेल कर, इस गांव को बचाने की कोशिश की है।’’
दो दिन बाद साधू बाबा गांव पहुंचे। उनके साथ उनके कुछ शिष्य भी थे। उन्होंने गांव में हवन करना शुरू किया। उन्होंने उस दरवाजे को खोलने के लिये कहा। दरवाजा खोल दिया गया। तभी दरवाजे से बहुत भयानक आवाजें आने लगीं। रात का समय था। बहुत तेजी से एक साया उस दरवाजे पर आया। उसके मुहं से भयानक आवाजें निकल रहीं थीं।
साधू बाबा ने उसे मंत्रों से बांध कर, हवन कुण्ड के पास बुलाया।
साधू बाबा की शक्ति के सामने, उस नरपिशाच की शक्ति कम पड़ गई थी। बुराई पर अच्छाई की जीत हो रही थी। कुछ ही देर में उसकी आत्मा को मुक्ति मिल गई।
गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। साधू बाबा ने खेतों में जाकर गंगा जल छिड़का, साथ ही गांव वाले भी अपने अपने खेत में पहुंचे। इसके बाद साधू बाबा ने गांव की सीमा पर जाकर, एक बड़ी सी कील, मंत्र सिद्ध करके मुखिया जी को दी और कहा – ‘‘इसे यहां गाड़ दो। आज के बाद कोई भी बुरी शक्ति, गांव में प्रवेश नहीं कर सकेगी।’’
इस तरह गांव वालों को उस नरपिशाच से मुक्ति मिल गई।

















