Horror Story Pishach Ki Kahani : अनुज आज कई साल बाद, अपने गॉव जा रहा था। उसके साथ उसका दोस्त राहुल भी था। दोंनो दोस्तों ने ट्रेन पकड़ ली थी।
शाम तक उन्हें गॉव पहुंचना था। ट्रेन में खाना खाकर, दोंनो बातें करते करते बाहर के नजारे देख रहे थे।
राहुल ने कहा – ‘‘भाई मैंने आज तक सिर्फ ट्रेन से ही, गॉव और खेत देखें हैं। मैं कभी गॉव नहीं गया। इसलिये जब तूने अपने साथ चलने के लिये कहा, तो मैं बहुत खुश हो गया।’’
यह सुनकर अनुज हसने लगा, वह बोला – ‘‘ज्यादा खुश मत हो, गॉव मैं तू एक ही दिन में परेशान हो जायेगा। वहां न लाईट ठीक से आती है। न इन्टरनेट।’’
यह सुनकर राहुल हसने लगा। दोंनो की ट्रेन एक जगह खड़ी हो गई। गाड़ी को खड़ी हुए दो घंटे बीत गये थे। तभी वहां से टी.टी. गुजर रहा था। पूछने पर उसने बताया, कि आगे पटरी खराब है, काम चल रहा है। ट्रेन कम से कम छः घंटे लेट हो जायेगी।
ट्रेन में बैठे बैठे ही रात हो गई। दोंनों की गाड़ी गॉव के पास वाले स्टेशन पर, रात को एक बजे पहुंची।
ट्रेन से उतर कर, दोंनो ने सवारी ढूंढने की कोशिश की, लेकिन उन्हें कोई सवारी नहीं मिली। दोंनो ने पैदल ही गॉव जाने का फैसला किया। स्टेशन के बाहर, एक चाय वाले की दुकान थी। दोंनो उसके पास गये।
अनुज ने कहा – ‘‘भैया क्या दो कम चाय बना दोगे।’’
चायवाला बोला – ‘‘हां हां आप बैठो मैं अभी बना देता हूं।’’
दोंनो ने चाय पीकर पैसे दिये और चलने लगे, तब चायवाले ने कहा – ‘‘भैया इस समय गॉव मत जाओ। मेरी बात मानो तो यहीं रुक जाओ। रात में वहां एक नरपिशाच का आतंक रहता है। वो किसी को भी अपना शिकार बना लेता है।’’
यह सुनकर अनुज थोड़ा डर जाता है। लेकिन राहुल कहता है – ‘‘अरे यार मैं शहर में, रात को तीन बजे तक घूमता रहता हूं। कभी कुछ नहीं हुआ। ये तुम लोगों ने डराने के लिये कहानियां बना दी हैं।’’
राहुल नहीं माना और दोंनो चायवाले की बात को अनसुना करके, गॉव की ओर चल देते हैं। सड़क से रास्ता लम्बा था। इसलिये अनुज राहुल को एक छोटी पग्डंडी से लेकर चल देता है। रास्ता सकरा था, इसलिये अनुज आगे और राहुल उसके पीछे चल रहा था।
अनुज बीच बीच में मुड़ कर रहुल को देखता, और उससे बातें करते करते आगे बढ़ रहा था। राहुल भी उसकी हां में हां मिल देता था।
कुछ देर बाद अनुज को लगा, कि राहुल जबाब नहीं दे रहा है। उसने पीछे मुड़ कर देखा, तो राहुल वहां नहीं था। अनुज बड़बड़ाने लगा – ‘‘हे भगवान ये कहां गया। कहीं इधर उधर तो नहीं चला गया। जरूर पेशाब करने रुक गया होगा।’’
वह धीरे धीरे राहुल को आवाज देने लगा, लेकिन उसे कोई उत्तर नहीं मिला। अब वह तेजी से गॉव की ओर चल दिया। जिससे कि किसी को मदद के लिये बुला सके।
अभी अनुज कुछ ही दूर चला था। कि राहुल ने पीछे से आवाज दी – ‘‘मुझे छोड़ कर चल दिया अनुज। अभी तो मुझे तेरा गॉव देखना है।’’
अनुज ने पीछे मुड़ कर देखा तो अंधेरे में एक साया दिखाई दिया। वह बोला – ‘‘अरे राहुल कहां चला गया था यार, मैं बहुत डर गया था।’’
राहुल ने कहा – ‘‘कहीं नहीं मैं बस यहीं था। चल गॉव चलते हैं।’’
अनुज ने महसूस किया कि, राहुल की आवाज कुछ बदल गई है। उसने मुड़ कर देखा तो राहुल की आंखे लाल थीं। अनुज ने कहा – ‘‘ये तुझे क्या हुआ और तेरी आंखे लाल क्यों हो गई हैं।’’
राहुल हसते हुए बोला – ‘‘कुछ नहीं बस थक गया हूं। तू चल जल्दी से।’’
दोंनो गॉव पहुंचने वाले होते हैं। जैसे ही गॉव शुरू होता है। वहां एक कच्चा सा लकड़ी का बड़ा सा दरवाजा था। अनुज उस दरवाजे के पास पहुंचता है, अनुज कहता है -‘‘राहुल देख गॉव आ गया।’’
राहुल तेजी से चीखने लगता है – ‘‘तेरी इतनी हिम्मत, तू मुझे फसाने के लिये लाया है। अब देख मैं तेरा क्या हाल करता हूं।“ अनुज दरवाजे के दूसरी तरफ खड़ा था।
अनुज बोला – ‘‘राहुल ये तू क्या कह रहा है। रुक मैं आता हूं तेरे पास।’’
वह आगे बढ़ने लगा। तभी किसी ने उसका हाथ पकड़ कर पीछे खींच लिया।
सामने गॉव के मुखिया। गंगा प्रसाद जी खड़े थे। वो बोले – ‘‘बच गया तू। वरना तू भी मारा जाता। कौन है तू।’’
अनुज बोला – ‘‘मुखिया जी मैं अनुज हूं। रामपाल जी का बेटा, शहर से अपने दोस्त के साथ आया हूं। लेकिन पता नहीं मेरे दोस्त को क्या हो गया।’’
मुखिया जी ने कहना शुरू किया – ‘‘मर गया तेरा दोस्त। जो सामने है वो एक नरपिशाच है। बस ये समझ तेरे दोस्त ने तेरी जान बचा ली। वरना उसके साथ तू भी मर गया होता। इस दरवाजे को हमने मंत्रों से बांध रखा है। इसलिये यह नरपिशाच इसके अंदर नहीं आ सकता’’
अनुज बोला – ‘‘लेकिन मुखिया जी वह तो सामने खड़ा है।’’
मुखिया जी ने कहा – ‘‘सामने नरपिशाच खड़ा है। वह इस दरवाजे से अंदर नहीं आ सकता। तेरे दोस्त को इसने अपना शिकार बना लिया। शुक्र मना जब इसका असर कम था। तब वह तुझे यहां तक छोड़ गया। तेरी दोस्ती के कारण उसने नरपिशाच को रोक कर रखा।’’
अनुज ने देखा सामने राहुल रो रहा था। वह बोला – ‘‘जा भाई मुझे माफ कर दे, जो मैं तुझे रात को यहां लाया। हम वहीं रुक जाते तो मैं भी बच जाता।’’
तभी उसकी आवाज में नरपिशाच बोला – ‘‘आज तो इसने तुझे बचा लिया, लेकिन कभी न कभी तो तुझे मैं मार कर तेरा खून पियूंगा। जैसे मैंने इसका पी लिया है।’’
तभी राहुल नीचे गिर जाता है। मुखिया जी कहते हैं – ‘‘चल यहां से, सुबह दिन निकलने पर इसकी लाश ले जायेंगे।’’
दोंनो गॉव में आगे चल देते हैं। अनुज अभी भी रो रहा था। मुखिया जी उसके घर पहुंच जाते हैं। दरवाजा खटखटाते हैं। रामपाल जी बाहर आते हैं।
मुखिया जी और अनुज को देख कर वे चौंक जाते हैं। मुखिया जी कहते हैं – ‘‘भाई रामपाल तुमने अपने बेटे को नहीं बताया, कि रात को इस गॉव में आना मना है। इसके दोस्त को नरपिशाच ने मार दिया। ये बच गया अपने दोस्त के कारण।’’
रामपाल जी ने मुखिया जी को धन्यवाद दिया। फिर उन्होंने अनुज को गले लगा लिया। लेकिन अनुज गहरी खामोशी में था। उसे गहरा सदमा लगा था। वह अब केवल रो रहा था।
मुखिया जी वापस लौट गये। अगले दिन सुबह राहुल की लाश को गॉव में लाया गया। फिर उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
अनुज अब शहर नहीं जाना चाहता था। वह अब गॉव में रहकर ही अपने दोस्त की मौत का बदला लेना चाहता था।
अनुज बहुत परेशान था, कि कैसे वो राहुल की मौत का बदला ले। वह गॉव के बड़े – बूढ़े लोगों से मिला। उन्होंने बताया। कि गॉव में एक तांत्रिक आया था। लोगों ने उसे बहुत मान सम्मान लिया। वह गॉव वालों से पैसे लेता और टोने टोटकों की मदद से] लोगों को उनका किसी से दुश्मनी का बदला लेने में मदद करता।
इस तरह पूरा गॉव एक दूसरे का दुश्मन बन गया। तब पंचायत ने इस खून खराबे को रोकने के लिये, तांत्रिक को गॉव से निकालने का फैसला किया।
लेकिन उसने सबको बर्बाद करने की चेतावनी दी। इससे गॉव वाले उससे बहुत गुस्सा हो गये। उन्होंने एक दिन तांत्रिक को जिन्दा जला दिया।
तब से वह नरपिशाच बन कर सबका खून पीने की फिराक में रहता है।
अनुज बोला – ‘‘लेकिन इसका कोई समाधान तो होगा।’’
तभी वहां मुखिया जी आ गये उन्होंने कहा – ‘‘बेटा गॉव के हर घर ने उस तांत्रिक की वजह से, किसी न किसी को खोया है। अगर हमें कोई तांत्रिक ऐसा मिल जाये, जो इसे वश में करके इसकी आत्मा को मुक्त करा दे। तभी यह संभव है।’’
अनुज अब ऐसे किसी तांत्रिक को ढूंढने लगा।
क्या अनुज तांत्रिक को ढूंढ पाया?
क्या तांत्रिक नरपिशाच को मुक्ति दिला पाया?
यह जानेंगे कहानी के अगले भाग में …
Read Also


















Leave a Reply
View Comments