किले की पहेली | Horror Story of Fort

Horror Story of Fort
Horror Story of Fort

Horror Story of Fort : दोस्तों आज की कहानी एक ऐसी पहेली के बारे में है जिससे पूरा गॉव डरा हुआ था। किसी की भी हिम्मत नहीं थी कि वह उस पहेली को सुलझा कर गॉव को बचा सके।

राजस्थान के उदयपुर के एक गॉव में रहने वाले सभी गॉव वालों ने एक दिन पंचायत बुला कर फैसला किया कि गॉव के सभी नौजवानों को गॉव से बाहर भेज दिया जाय।

सरपंच ने सभी को सूचना दी – ‘‘जैसा कि आप जानते हैं कि किले में प्रेतात्मा का वास है। वह गॉव में रात के समय घूमती है और जिस घर में कोई भी जवान लड़का होता है। वह उसे वश में करके किले में ले जाती है। फिर उसका कुछ पता नहीं लगता।

इसलिये हमने तय किया है कि यहां के नौजवानों को किसी शहर में भेज दिया जाये। जब इस प्रेतात्मा की पहेली सुलझ जायेगी तो हम इन्हें बुला लेंगे।’’

तभी गॉव के एक बुजुर्ग मोहनराम जी खड़े हुए और बोले – ‘‘क्या कह रहे हो सरपंच हम बचपन से सुनते आ रहे हैं उस पहेली के बारे में आज तक तो कोई उसे हल कर नहीं पाया।’’

यह सुनकर सरपंच ने कहा – ‘‘लेकिन इन बच्चों की रक्षा तो करनी ही होगी। कैसे बचायेंगे इन्हें उस प्रेतात्मा के कहर से।’’

तभी संजय जिस उम्र पच्चीस साल थी। वह बोला – ‘‘सरपंच जी वह पहेली तो बताईये और हम उसे सुलझाने की कोशिश करते हैं और उसको सुलझा कर क्या प्रेतात्मा किसी को परेशान नहीं करेगी।’’

सरपंच ने कहा – ‘‘बेटा वो हम नहीं बता सकते क्योंकि तुम्हारी जान को खतरा हो सकता है तुम उस पहेली को सुलझाने की कोशिश करोगे।’’

यह बात सुनकर गॉव के कुछ लोग तो अपने बच्चों को शहर भेजने के लिये तैयार हो गये लेकिन ज्यादातर इस बात को मानने को तैयार नहीं थे।

सरपंच ने सबको समय दिया सोचने के लिये। सभी गॉव वाले अपने अपने घर चले गये। संजय जब अपने घर आया तो उसने अपनी मां से पूछा – ‘‘मां तुम्हें तो पता होगा उस पहेली के बारे मुझे बताओ न।’’

संजय की मां पुष्पा जी ने कहा – ‘‘बेटा उस बात को भूल जा इसी चक्कर में तेरे पिता की जान चली गई और भी न जाने गॉव के कितने लोग अपनी जान गंवा बैठे।’’

संजय यह सुनकर बहुत घबरा गया वह बोला – ‘‘क्या मां पिताजी की मौत उस प्रेतात्मा के कारण हुई थी। अब तो आपको बताना ही पड़ेगा। मैं उससे अपने पिता की मौत का बदला लेकर रहूंगा।’’

पुष्पा जी उसे ने कहा – ‘‘बेटा हम सब बड़े लोगों ने मिल कर यह फैसला किया है कि बच्चों को इस बारे में कुछ नहीं बतायेंगे। तुझे मेरी कसम मुझसे कुछ मत पूछ।’’

संजय कसम देने से चुप रह गया, लेकिन उसके मन के अंदर एक तूफान उठ रहा था। कि उसके पिता की मौत का बदला कैसे ले?

अगले दिन वह अपने दोस्तों से मिला और उन्हें सारी बात बता दी। उसका दोस्त नीरज बोला – ‘‘भाई मेरे भी चाचा ऐसे ही मारे गये। हमें पता लगाना ही होगा।’’

यह सुनकर संजय ने कहा – ‘‘भाई गॉव में तो कोई कुछ बतायेगा नहीं हमें गॉव के बाहर जाकर किसी से पता करनी चाहिये। आखिर बाहर के लोगों को भी तो इसके बारे में पता होगा।’’

अगले दिन का समय तय करके सभी दोस्त गॉव बाहर जाकर दूसरे गॉव में पहुंच गये वहां जाकर उन्होंने पूछताछ की तभी उन्हें एक बुढ़िया माई मिली।

बुढ़िया माई के घर पहुंच कर संजय और नीरज ने उनसे पूछा बुढ़िया माई की बात सुनकर दोंनो के होश उड़ गये। उन्होंने कहा – ‘‘बेटा उस गॉव के ही नहीं कई गॉवों के लोग मारे जा चुके हैं उस पहेली के चक्कर में।’’

संजय बोला – ‘‘मांजी मेरे पिता भी जा चुके हैं आप बस ये बताओ वह पहेली है क्या?’’

तब बुढ़िया माई ने कहा – ‘‘बेटा अगर तुम वहां कभी मत जाना इसी शर्त पर मैं तुम्हें बताउंगी।’’

संजय और नीरज मान जाते हैं तब वह बुढ़िया माई कहती है – ‘‘उस किले में एक राजा राज करता था। हम सब उसकी प्रजा थे। राजा रानी बहुत भले थे। सबका कल्याण करते थे। कुछ सालों बाद रानी ने एक कन्या को जन्म दिया। उसका नाम था। कोमलमति जब वह पैदा हुई थी। उस दिन चन्द्रग्रहण था। नकारात्मक शक्तियां ऐसे में बहुत ताकतवर होती हैं।

उसमें से एक नकारात्मक शक्ति ने उस कन्या पर अपना कब्जा कर लिया। जब तक वह छोटी थी तब तक तो सब ठीक था। लेकिन जैसे जैसे वह बड़ी हुई उसका स्वभाव बदलने लगा।

वह तंत्र मंत्र करने लगी जब उसके पिता ने उसे शिक्षा के लिये भेजना चाहा तो वह बहुत गुस्सा हो गई। कहते हैं रात को उसने अपने माता पिता दोंनो को मार दिया और महारानी बन कर राज करने लगी।

वह गरीबों पर बहुत अत्याचार करती थी। सभी उसके राज्य में परेशान रहते थे। एक दिन वह तंत्र मंत्र कर रही थी। तब उसने मंत्रों की शक्ति से राजा का सारा खजाना महल में ही एक गुप्त स्थान पर छिपा कर उस जगह को ताले में बंद कर दिया।

सेनापति राघव जो कि उससे बहुत प्यार करता था। उसने शादी का प्रस्ताव रखा।  जिसे सुनकर कोमलमति बहुत गुस्सा हो गई और सौनिकों को उसे कैद कर जेल में डालने के लिये कहा। लेकिन सैनिक सेनापति को बहुत पसंद करते थे। उन्होंने रानी की बात नहीं मानी।

इस पर सेनापति ने राज्य के लालच में उसे मार दिया। लेकिन जब वह राजा बना तो खजाने में एक भी पैसा नहीं था। बहुत ढूंढने पर भी खजाना नहीं मिला। राज्य में भुखमरी फैल गई।

इधर रानी की आत्मा पूरे महल में घूम रही थी। एक दिन सेनापति अपने कक्ष में मरा हुआ मिला।

तब से वहां कोई राजा नहीं बन पाया और हम लोग अपने अपने छोटे छोटे गॉव में बट गये। आज भी वह प्रेतात्मा उस खजाने को किसी को लेने नहीं देती। इसी लालच में कई लोग वहां गये और उस प्रेतात्मा के हाथ अपनी जान गंवा बैठे।’’

यह सुनकर संजय बोला – ‘‘लेकिन मैंने तो सुना है कि गॉव में आकर जवान लड़को को अपने साथ ले जाती है।’’

बुढ़िया माई ने कहा – ‘‘हां यही तो पहेली का दूसरा हिस्सा है। जब गॉव वालो ने वहां जाना बंद कर दिया तब वह खुद अपना शिकार ढूंढने गॉव में आने लगी और खजाने का लालच देकर गॉव के नौजवानों को जिन्हें इस कहानी का पता नहीं है उन्हें अपने साथ ले जाती है।’’

इसी बीच नीरज ने कहा – ‘‘लेकिन मांजी ऐसे में उस खजाने का पता कैसे लगे और उस प्रेतात्मा से पीछा कैसे छुड़ाया जाये।’’

बुढ़िया माई ने कहा – ‘‘उन मंत्रों से बंधे खजाने को ढूंढने के लिये उस प्रेतात्मा की मुक्ति जरूरी है तभी वह मंत्रों से मुक्त हो पायेगा। लेकिन यह काम वही कर सकता है जिसे उस खजाने का लालच न हो वह सारा धन जनता के भलाई के कामों में लगा दे।’’

बुढ़िया माई से सारी बात सुनकर दोंनो वापस आ गये। अगले दिन दोंनो ने किले में जाने का फैसला किया। बिना किसी को बताये दोंनो किले में पहुंच गये।

संजय के पास गंगा जल था और नीरज के पास एक मंत्र से अभिमंत्रित किया हुआ कलावा था। सबसे पहले उन्होंने वह कलावा किले के दरवाजे पर बांध दिया। जिससे रानी की प्रेतात्मा बाहर न जा सके उसके बाद संजय हर जगह गंगा जल छिड़कता हुआ आगे बढ़ने लगा।

कुछ दूर जाने पर उनके सामने काला साया दिखाई देने लगा। संजय ने गंगाजल छिड़कना शुरू किया। तभी प्रेतात्मा बोली – ‘‘अपनी जान की खेर चाहता है तो चले जाओ यहां से।’’

संजय ने जबाब दिया – ‘‘हम तुझे मुक्ति दिलाने आये हैं इस खजाने को छोड़ और मुक्त हो जा।’’

यह कह कर संजय ने सारा गंगा जल उस काले सायें पर डाल दिया। कुछ ही देर में प्रेतात्मा तड़पने लगी। तभी उसके पीछे खजाने का सन्दूक दिखाई दिया। प्रेतत्मा के मुक्त होते ही खजाने का सन्दूक खुल गया।

दोंनो खजाना लेकर गॉव में आ गये और सरपंच को सौप दिया। इस तरह पूरा गॉव डर के सायें से बाहर आ गया। सरपंच ने खजाना गॉव के विकास में लगा दिया। इससे गॉव वालों के घरो में खुशहाली आ गई।

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