कछुआ और घमंडी मगरमच्छ | Tortoise and Crocodile Story

Tortoise and Crocodile Story
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Tortoise and Crocodile Story : एक नदी में एक मगरमच्छ रहता था। उसी नदी में एक कछुआ भी रहता था। मगरमच्छ को पता था, कि कछुए को वह खा नहीं सकता। उसका खोल मोटा है।

कछुए को भी पता था। कि मगरमच्छ उसे कभी नहीं खा सकता है।

एक दिन मगरमच्छ ने कछुए को कहा – ‘‘देख भाई न तो मैं तुझे खा सकता हूं और न ही तू मुझे नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिये अच्छा है कि हम दोंनो दोस्त बन जायें।

कछुआ कहता है – ‘‘भाई दोस्ती तो बराबर वालों में होती है। हम दोंनो में तो बहुत फर्क है।’’

मगरमच्छा को यह सुनकर गुस्सा आ गया। वह बोला – ‘‘अगर ऐसा है तो मैं तुझे उठा कर नदी से बाहर फेंक देता हूं। फिर देखता हूं तू कैसे नदी में आता है।’’

कछुआ चुपचाप सुन रहा था। वह बोला – ‘‘भाई लगता है तुमने खरगोश वाली कहानी नहीं सुनी है। एक बार खरगोश को भी ऐसे ही घमंड हो गया था। लेकिन नतीजा यह हुआ कि वह हार गया। इसलिये घमंड करना अच्छी बात नहीं है।’’

मगरमच्छा को और ज्यादा गुस्सा आ जाता है। वह कछुए को मुंह से धक्का देने लगता है। कछुआ अपने खोल में चला जाता है। मगरमच्छा उसे नदी के बाहर फेंक देता है। वह उसे नदी से बहुत दूर ले जाता है।

कछुआ जब बाहर निकलता है तो वह अपने आपको एक मैदान में पाता है। मगरमच्छ उससे कहता है – ‘‘आज के बाद अगर तू कभी नदी में आया तो मैं तुझे फिर से बाहर फेंक दूंगा।’’

कछुआ बोला – ‘‘कोई बात नहीं मैं नहीं आउंगा। मैं किसी और नदी में चला जाउंगा।

मगरमच्छ यह सुनकर हसने लगा वह बोला – ‘‘तुझे पता है दूसरी नदी यहां से कितनी दूर है। वहां तक तू पहुंच ही नहीं सकता।  अब या तो मुझ से माफी मांग या नदी में जाने का ख्याल छोड़ दे।’’

कछुआ बोला मैं धीरे धीरे नई नदी में पहुंच ही जाउंगा। लेकिन अब वापस नहीं आउंगा।

मगरमच्छ यह सुनकर वापस चल देता है। लेकिन इस बार वह रास्ता भूल जाता है और दूसरे रास्ते से नदी की ओर जाने लगता है उस रास्ते पर बहुत गीली और चिकनी मिट्टी थी।

जैसे ही मगरमच्छ वहां पहुंचता है। वह गीली मिट्टी में धस जाता है। अब वह न आगे बढ़ पा रहा था, न ही पीछे।

वह बहुत कोशिश करता है। लेकिन जितना भी वह कोशिश करता नीचे धस जाता था। इस तरह उसे अपनी मौत नजर आने लगी। उसे लगा कि वह यहीं पड़े पड़े मर जायेगा।

इधर कछुआ धीरे धीरे आगे बढ़ने लगा। तभी मगरमच्छ ने अपनी पूंछ गीली जमीन पर मारनी शुरू कर दी। जिसकी आवाज सुनकर कछुआ पलटा। वह मगरमच्छा के पास पहुंचा।

मगरमच्छ उसके सामने विनती करने लगा – ‘‘भाई मुझे यहां से किसी तरह निकालो नहीं तो मैं मर जाउंगा।’’

कछुआ बोला – ‘‘क्यों तुम्हें तो बहुत घमंड था। मैं तुम्हारी मदद क्यों करूं?’’

मगरमच्छ उससे माफी मांगता है। तब कछुआ अपने दोंनो हाथों से मिट्टी हटाने लगता है। बहुत देर तक मेहनत करते करते वह मिट्टी नदी में बहने लगती है। धीरे धीरे मिट्टी कम हो जाती है। मगरमच्छ पानी में पहुंच जाता है।

मगरमच्छ कहता है – ‘‘भाई मुझे माफ कर दो। आज से हम दोंनो दोस्त बन कर रहेंगे।’’

कछुआ उसकी दोस्ती स्वीकार कर लेता है। अब मगरमच्छ कछुए को अपनी पीठ पर बैठा कर नदी में घूमता रहता था। फिर दोंनो नदी से बाहर निकल कर एक पेड़ की छॉव में बैठ कर बातें करते रहते थे।

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