Elephant Cycle Story : सरकस में रिंग मास्टर ने हंटर हवा में लहराया और मोती हाथी। रिंग में करतब दिखाने गला कभी वह सूंड उपर करके दो पैरों पर एक छोटे से रस्ते पर चलता।
कभी वह बॉल को हवा में उछल कर करतब दिखाता। हर दिन उसे कुछ नया करतब दिखाना पड़ता था। तभी उसे भरपेट खाना मिलता था। जिस दिन दर्शक कम आते थे या मोती थका होता था। जैसे रात का शो तब तक वह बहुत थक जाता था।
इस कारण वह वही पुराने आसान करतब दिखा कर। वापस चला जाता था। उस दिन रिंग मास्टर उसे आधा ही खाना दिलवाता था। भूख से परेशान मोती एक जगह बैठ कर सोचता काश किसी तरह यहां से भागा जाये।
मोती का सबसे पसंद का करतब था। साईकिल चलाना। उसके लिये एक बड़ी सी साईकिल लाई जाती थी। जिसकी बड़ी सी सीट पर बैठ कर मोती पूरे रिंग में साईकिल चलाता था।
यह देख कर बच्चों के साथ साथ बड़े भी तालियां बताते थे। इसी सरकस में एक सफेद तोता था। हरिया जिससे मोती की दोस्ती हो गई थी। हरिया का पिंजरा मोती के पास ही टंगा होता था। दोंनो बातें करते रहते थे। जो कि बाहर वालों को समझ में नहीं आती थीं।
हरिया तोता बोला – ‘‘क्यों मोती भाई आज भी कम खाना मिला है क्या?’’
मोती बोला – ‘‘हां भाई आज तो बहुत ही कम खाना मिला है। तुम्हें तो पूरा खाना मिल जाता है।’’
यह सुन कर हरिया बोला – ‘‘कहां मोती भाई खाना तो पूरा मिलता है। लेकिन वो खाना डालने वाला आधी हरी मिर्च तो अपने घर ले जाता है।’’
मोती बोला – ‘‘हां भाई मैं तो थक गया हूं। सोने की कोशिश कर रहा हूं। तो भूख के कारण नींद नहीं आ रही है।’’
हरिया बोला – ‘‘भाई मुझे तो इन्होंने पिंजरे में बंद कर रखा है, लेकिन तुम तो ताकतवर हो यहां से भाग सकते हो।’’
मोती ने अपनी सूंड हिलाते हुए कहा – ‘‘हां भाई कई बार मन में आया लेकिन यहां से मेरा जंगल बहुत दूर है। पैदल कैसे जाउंगा और शहर में रहा तो ये फिर से पकड़ लेंगे।’’
हरिया बोला -‘‘मेरे पास एक तरकीब है, लेकिन अगर तुम मुझे भी साथ ले चलो तो मैं बता सकता हूं।’’
मोती यह सुनकर बहुत खुश हुआ वह बोला – ‘‘हां हां बताओ, मैं पक्का तुम्हें ले चलूंगा। अरे तुम्हें पिंजरे समेत ले चलूंगा। जंगल में जाकर हम पिंजरा तोड़ देंगे।’’
हरिया बोला – ‘‘वो देखो सामने तुम्हारी साईकिल खड़ी है। उस पर ही चलते हैं। रात को तुम खूंटा तोड़ कर साईकिल ले आना फिर मेरे पिंजरे को उसमें रख लेना।’’
मोती को हरिया की बात बहुत अच्छी लगी। रात को उसने साईकिल उठा ली और हरिया का पिंजरा अपनी सूंड से उठा कर साईकिल पर रख कर वह चुपचाप साईकिल चलाता हुआ जंगल की ओर चल दिया।
रातभर चलने के बाद सुबह के समय दोंनो जंगल में पहुंच गये थे।
मोती ने कहा – ‘‘भाई बहुत थक गये अब तो कुछ खाने के लिये चाहिये।’’
हरिया ने कहा – ‘‘ठीक है भाई तुम जाकर कुछ खा लो।’’
मोती ने देखा सामने गांव के पास गन्ने का खेत था। वह गन्ने खाने लगा। गन्ने खाकर उसका पेट भर गया वह वापस आया तो देखा। उसकी साईकिल के पास कई सारे जानवर खड़े हैं।
मोती हाथी ने कहा – ‘‘क्या बात है सब ऐसे क्या देख रहे हो?’’
एक हिरण बोला – ‘‘यह क्या है हमने इसे पहली बार देखा है?’’
मोती बोला – ‘‘भाई ये साईकिल है इतनी बड़ी इसलिये है, क्योंकि ये मेरे लिये है।’’
सभी जानवर बहुत खुश हुए और बारी बारी साइकिल को चला कर देखने लगे। तभी हरिया ने कहा – ‘‘अरे कोई मुझे तो पिंजरे से निकालो।’’
मोती को ध्यान आया वह बोला – ‘‘भाइयों मदद करो हरिया को पिंजरे से निकालना है।’
सभी ने पिजरे को पकड़ लिया। फिर एक चीते ने दोंनो पैरों से पिंजरे की सलाखों को चौड़ा कर दिया और हरिया बाहर निकल आया।
सभी जानवर बहुत खुश हुए। हरिया मोती की पीठ पर गया और मोती साईकिल चलाने लगा। पूरे जंगल में घूम घूम कर सब मजे करने लगे।
इस तरह एक तोते की सूझबूझ से मोती को कैद से आजादी मिल गई।
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