भोलू हाथी की कार | Elephant and Car Story

Elephant and Car Story
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Elephant and Car Story : भोलू हाथी एक जंगल में रहता था। वह जंगल में रहना नहीं चाहता था। जगंल के पास से जो रास्ता गुजरता था। उस पर वह सुन्दर और चमकीली कारों को आते जाते देखता था।

उसका बहुत मन करता था, कि उसके पास भी एक कार होनी चाहिये।

एक दिन वह जंगल के पास वाले रोड के पास एक जग खड़ा था। तभी पास ही में एक कार आकर रुकती है। कार में दो लोग सवार थे उनकी गाड़ी खराब हो जाती है। गाड़ी को खोल कर ठीक करने की कोशिश करते हैं। लेकिन वह ठीक नहीं हो पाती।

तभी उन्हें एक हाथी नजर आता है। वह उसे देख कर डर जाती हैं। लेकिन तभी भोलू उनके सामने आ जाता है। वह धीरे धीरे चल कर पूरी गाड़ी को चारों ओर से देखता है। फिर वह उन दोंनो को उसमें बैठने के लिये इशारा करता है।

दोंनो उसका इशारा समझ कर गाड़ी में बैठ जाते हैं। उसके बाद भोलू गाड़ी को अपनी सूंड से धक्का देने लगता है। वह धीरे धीरे उन्हें जंगल से बाहर निकाल देता है।

पास ही में गाड़ी ठीक करने की गैराज थी। दोंनो उतर कर हाथी से कहते हैं – ‘‘आपने हमारी बहुत मदद की हम आपके लिये क्या कर सकते हैं? क्या आपके लिये केले ला दें?’’

यह सुनकर भोलू गाड़ी के चारों ओर घूमने लगता है और गाड़ी पर बार बार सूंड मारने लगता है।

उन दोंनो में एक सेठ जी थे और दूसरा उनका नौकर।

सेठ जी कहते हैं – ‘‘तुम्हें यह कार चाहिये।’’

यह सुनकर भोलू हां में सूंड हिलाने लगता है।

सेठ जी भोलू से कहते हैं – ‘‘तुम जाओ बहुत जल्दी हम यह गाड़ी तुम्हें देने आयेंगे।’’

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भोलू मुड़ कर वापस चला जाता है।

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सेठ जी का नौकर कहता है – ‘‘ये क्या कर रहे हो सेठ जी वो कौन सा हमें पकड़ लेगा बेकार ही इतनी मेहंगी गाड़ी उसे दे रहे हैं।’’

सेठ जी ने कहा – ‘‘अगर वो चाहता तो हमसे ये गाड़ी छीन भी सकता था। लेकिन उसने हमारी मदद की।’’

यह कहकर सेठ जी गैराज में चले जाते हैं। वहां के इंजिनियर को कुछ समझाते हैं।

इसी तरह कई दिन बीत जाते हैं। एक दिन भोलू नदी के किनारे पानी पी रहा था। तभी उसे गाड़ी का र्हान सुनाई दिया। भोलू दौड़ कर रोड पर आया तो देखा सेठ जी गाड़ी के साथ खड़े थे।

उन्होंने गाड़ी को लंबा करा दिया था बड़ा सा गेट लगवा दिया था जिससे भोलू उसमें चढ़ सके आगे दो बड़े बड़े डिब्बे जैसे रबर के बटन लगा दिये पैर से आगे पीछे करने से गाड़ी चलने लगती थी ये कार के पेडल थे।

सेठ जी ने गेट खोला भोलू उसमें जाकर बैठ गया। अब वह पैर आगे पीछे करने लगा जिससे धीरे धीरे गाड़ी चलने लगती है।

भोलू को बहुत मजा आता है। वह गाड़ी को रोक कर उससे नीचे उतर कर जमीन पर बैठ कर सेठ जी के पैरों को सूंड से छूता है। जैसे सेठजी को धन्यवाद दे रहा हो।

सेठ जी उसे बहुत प्यार करते हैं। फिर वे कुछ दूर खड़ी अपनी गाड़ी में बैठ कर चले जाते हैं।

इस तरह भोलू का कार चलाने का सपना पूरा हो जाता है।

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Image Source : Playground

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