सोने की गिलहरी | Squirrel Fun Story

Squirrel Fun Story
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Squirrel Fun Story : एक जंगल में एक पेड़ पर एक गिलहरी रहती थी। वह पेड़ की डाल पर इधर उधर फुदकती रहती थी। पेड़ से नीचे आकर अपना दाना चुगती थी। दाना खाकर पेड़ पर वापस चली जाती थी।

एक दिन गिलहरी ने सोचा यहां जगल का खाना खाते खाते बहुत दिन हो गये। क्यों न शहर जाया जाये। गिलहरी शहर जाने के लिये एक सड़क के किनारे पेड़ पर बैठ जाती है। थोड़ी देर में वहां से एक ट्रक गुजरता है।

गिलहरी उस पर कूद जाती है। ट्रक के अन्दर सब्जियां भरी हुई थीं, जो गांव से शहर जा रही थीं। गिलहरी ट्रक के अन्दर मजे से सब्जियां खाती हुई शहर में पहुंच जाती है।

जब ट्रक रुकता है, तो वह उतर कर पास ही में एक दुकान में घुस जाती है। दुकान में अनाज रखा था। गिलहरी वह अनाज खाने लगती है। कुछ देर में दुकान का मालिक गिलहरी को भगाने के लिये आता है। गिलहरी वहां से भाग जाती है।

एक आदमी अपना टिफिन लेकर एक पेड़ के नीचे बैठा था। उसने अपना टिफिन खोला तो उसके खाने की खुशबू पेड़ पर बैठी गिलहरी की नाक में पहुंची गिलहरी खाना खाने के लिये बेताब हो गई। तभी वह आदमी पानी लेने गया। गिलहरी चुपचाप नीचे उतरी और उसके टिफिन में से एक रोटी और अचार को खाने लगी।

कुछ ही देर में वह आदमी वापस आया। उसे देख कर गिलहरी वापस पेड़ पर चढ़ गई। वह अपने साथ रोटी का एक टुकड़ा भी उठा लाई थी। खाना खाकर उसे फिर से भूख लगने लगी। वह आगे चल दी। वहां एक जगह होली के लिये रंग तैयार किये जा रहे थे। दो बड़े बड़े ड्रम में होली के लिये एक चांदी का और एक सोने का रंग घोल कर रखा था। कुछ आदमी और औरतें इन रंगों को खाली बोतलों में भर रहे थे।

गिलहरी को लगा यह कोई खाने की चीज है। वह ड्रम के किनारे पर बैठ कर उसे खाने की कोशिश करने लगी। उसने अपनी जीभ उसे चाटने के लिये आगे बढ़ाई ही थी, कि वह ड्रम में गिर गई।

ड्रम से सोने के रंग की कुछ छींटे पास ही काम कर रही एक औरत पर गईं। वह उठ कर देखने लगी तो देखा ड्रम में एक गिलहरी पड़ी है और बाहर निकलने के लिये छटपटा रही है।

उस औरत ने और लोंगों को बुला लिया। तभी उनमें से एक बोला – ‘‘इसे जल्दी से निकलो नहीं तो यह मर जायेगी।’’

एक आदमी नें एक बड़ी सी रंग छानने की छलनी से गिलहरी को बाहर निकाला और वहीं पास में एक ओर रख दिया।

गिलहरी वहीं बैठी रही। वह धीरे धीरे हाथ पैर चला रही थी, लेकिन वह उठ नहीं पा रही थी। उसे छोड़ कर सभी अपने अपने काम में लग गये।

गिलहरी बहुत डर गई थी। कुछ देर बाद उसका रंग सूखने लगा। जहां वह लेटी हुई थी। कुछ देर में वहां तक घूप आने लगी। धूप के कारण उसका रंग जल्दी से सूख गया।

गिलहरी उठी और धीरे धीरे चल कर आगे चल दी। वह आगे जा रही थी, तभी उसने अपने आप को देखा तो उसका पूरा बदन सोने के रंग में रंग चुका था।

गिलहरी बहुत खुश हुई वह फिर से सड़क किनारे एक पेड़ पर बैठ गई। कुछ देर में एक बस उधर से गुजरी और गिलहरी कूद कर उस बस की छत पर बैठ गई। शाम तक वह बैठी रही शाम को बस जंगल के रास्ते से गुजरी। लेकिन तेज सपीड बस से गिलहरी उतर न सकी। रात के समय बस एक ढाबे के पास रुकी तब गिलहरी उतर कर जंगल में पहुंच गई। वह एक पेड़ पर चढ़ कर आराम करने लगी।

सुबह की पहली किरण के साथ उसकी आंख खुली, अब वह जंगल में इधर उधर खाना ढूंढने लगी। जंगल के सभी जानवर उसे देख कर हैरान थे।

तभी एक कबूतर उसके पास आया और बोला – ‘‘गिलहरी बहन तुम कहां से आई हों?’’

गिलहरी ने कहा  – ‘‘मैं दूर परियों के देश से आई हूं। वहां सभी जानवर सोने के होते हैं।’’

सभी जानवर उसे मेहमान समझ कर उसकी देखभाल करने लगते हैं। उसे तरह तरह के फल, अनाज लाकर देने लगे। गिलहरी के मजे आ गये। वह मजे से सब खाने लगी।

एक दिन एक कौआ उसके लिये अमरूद लेकर आया और बोला – ‘‘गिलहरी बहन क्या तुम मुझे अपने साथ परियों के देश ले चलोंगी। मैं काला हूं। यहां सब मुझे चिढ़ाते हैं। मैं भी वहां जाकर परियों के जादू से सोने का बन कर आना चाहता हूं।’’

यह सुनकर गिलहरी हसने लगी -‘‘ठीक है मैं अपने साथ ले जाउंगी, लेकिन तब तक तुम मेरी सेवा करते रहो।’’

बेचारा कौआ उसकी बातों में आ गया और उसके तरह तरह के अनाज, दालें, फल लाने लगा।

एक दिन गिलहरी हरी हरी घास पर कूद कूद कर खेल रही थी। तभी आसमान में काले काले बादल छा गये और तेज बारिश होने लगी। गिलहरी ने इधर उधर देखा, लेकिन वहां कोई भी पेड़ नहीं था। इस बारिश में उसका सुनहरा रंग धुलने लगा और जगह जगह से उसका असली रंग दिखने लगा।

बारिश रुकने पर सभी जानवर उसके पास आये उनमें से एक सियार ने कहा – ‘‘भाईयों इसने हम सीधे सादे जानवरों को बेवकूफ बनाया है। इसे सजा मिलनी चाहिये।’’

गिलहरी ने रोते हुए कहा – ‘‘नहीं मैं सच कह रही हूं। ये तो यहां का खाना खाने से मेरा रंग फीका पड़ गया।’’

सभी जानवर उसका विश्वास नहीं कर रहे थे। तभी कौआ बोला – ‘‘इसने सबसे ज्यादा मुझे बेवकूफ बनाया है। इसने अपने साथ ले जाकर मेरा रंग भी सोने जैसा करने का वादा किया और रोज मुझसे नया नया खाने का समान मंगाती थी।’’

कुछ देर इसी तरह भीड़ लगी देख कर जंगल का राजा शेर वहां आया। उसे देख कर गिलहरी कांपने लगी, क्योंकि अगर शेर को उसकी चालाकी पता लग गई तो वह उसे खा जायेगा।

शेर ने पूछा तो गिलहरी ने सारी बात बता दी। यह सुनकर सभी जानवर हसने लगे। शेर भी हसने लगा। वह बोला – ‘‘चलो हम तुम्हें माफ कर देते हैं, लेकिन तुम्हें वादा करना होगा, कि आज के बाद तुम शहर नहीं जाओंगी। अच्छा खाने का शौक आज तुम्हें मरवा देता।’’

गिलहरी रोते हुए बोली – ‘‘महाराज मैं आज के बाद कहीं भी नहीं जाउंगी और कौए भैया मैं कल से आपको दाना लाकर दिया करूंगी। जो कहोगे वह ला दूंगी।’’

कुछ देर में बारिश फिर से शुरू हो गई सभी जानवर कहीं न कहीं जाकर छुप गये। लेकिन गिलहरी वहीं घास पर उछल कूद करती रही, जिससे शहर का रंग पूरी तरह से उतर जाये।

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