रिश्तों की डोर – भाग 5

Rishto ki Door Bhag 5

शालिनी: पापा सागर का फोन नहीं आया। लगता है उसे बुरा लग गया।

हिम्मतलाल जी: बेटी अब मैं क्या कह सकता हूं। यह तुम दोंनो का आपस का मामला है।

तभी सुशीला जी किचन से निकल कर आ जाती हैं।

सुशीला जी: बेटी तूने उसे दो दिन दिये थे इसका मतलब तो यही है कि वह शादी नहीं करना चाहता अब तू उसका पीछा छोड़ कर आगे बढ़।

यह सुनते ही हिम्मतलाल जी को गुस्सा आ गया। वे बोले

हिम्मतलाल जी: किसी मजबूरी का फायदा उठाना अच्छी बात नहीं है। तुम दोंनो मॉं बेटी अपनी जिद्द में यह भी भूल गईं कि उसने शालिनी की कितनी मदद की थी जब वह नौकरी के लिये भटक रही थी।

शालिनी को कुछ याद आता है –

सागर: देखिये मेडम आपकी क्वालीफिकेशन कम है इस जॉब के लिये हमें एक्पीरियंस वाला स्टॉफ चाहिये।

शालिनी: सर एक चांस दे दीजिये मैं दो महीने में सारा काम सीख जाउंगी।

सागर: मेडम मैं आपको नहीं रख सकता आप टारगेट पूरे नहीं कर पायेंगी।

यह सुनकर शालिनी रोने लगती है उसे रोता देख कर सागर उसे बाहर ले जाता है।

कैन्टीन में बैठ कर सागर उसे समझाता है कि वह इस जॉब के लायक नहीं है।

शालिनी: सर मेरे पापा को बिजनेस में बहुत नुकसान हुआ है। मुझे नौकरी की बहुत सख्त जरूरत है। आप कुछ भी करके मुझे यह जॉब दे दीजिये मैं दिन रात एक करके काम सीख लूंगी।

सागर: ठीक है मैं तुम्हें एक महीने के लिये रख लेता हूं लेकिन तुम्हें ऑफिस से जाने के बार घर से काम करना होगा तभी टारगेट पूरे हो पायेंगे, और मैं तुम्हें ऑनलाईन गाईड करता रहूंगा।

शालिनी: सर मैं आपका अहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।

इस तरह दोंनो एक ही कंपनी में जॉब करते करते नजदीक आ गये। इसके बाद सागर ने दूसरी कंपनी ज्वाईन कर ली, और शालिनी को प्रमोशन मिलता रहा।

एक पल के लिये ये सारी घटनायें शालिनी के सामने से गुजर गईं। वह कैसे सागर से एक जॉब के लिये भीख मांग रही थी। आज सागर उसका साथ देने के लिये उससे भीख मांग रहा है।

हिम्मतलाल जी: बेटी किसी की अच्छाई का यह सिला नहीं देना चाहिये कुछ तो उसके बारे में सोच।

सुशीला जी: समय के साथ आगे बढ़ जाना चाहिये। तू ज्यादा मत सोच कनाडा की प्रमोशन ले ले।

शालिनी: माँ ठीक है लेकिन मैं एक बार सागर से मिल लेती हूॅं।

सुशीला जी: उसे तेरी परवाह होती तो वो तुझसे मिलने आ सकता था। वह तो दो दिन पूरे होने का इंतजार कर रहा है। ताकि तुझसे पीछा छूटे।

हिम्मतलाल जी माँ बेटी की बातें सुनकर दुःखी मन से घर से बाहर चले गये।

इसी तरह दो दिन और बीत गये। न तो सागर का कोई फोन आया न शालिनी ने फोन किया।

शालिनी को सागर पर बहुत गुस्सा आ रहा था।

इसी गुस्से में शालिनी ने कनाडा जाने का फैसला किया। ऑफिस से घर आकर उसने सामान पैक किया जब वह एयरपोर्ट के लिये निकल रही थी, हिम्मतलाल जी ने उसे समझाया –

हिम्मतलाल जी: बेटी तूने जो फैसला ले लिया उसके लिये मैं तुझे कुछ नहीं कहूंगा। लेकिन जाते समय एक बार सागर से मिल ले या फोन पर बात कर ले।

शालिनी की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे।

शालिनी: नहीं पापा उसने एक बार भी मेरे से बात नहीं की अब मैं उससे कभी बात नहीं करूंगी।

यह कहकर वह एयरपोर्ट के लिये निकल गई।

कनाडा पहुंच कर उसने सबसे पहले अपनी सिम चेंज की जिससे सागर उससे कॉन्टेक्ट न कर सके। कुछ ही दिनों में वह अपने काम में बिजी हो गई।

सागर से उसका संपर्क बिल्कुल खत्म हो गया था।

उसे आजादी सी महसूस हो रही थी। लेकिन शाम के समय उसे कभी कभी सागर के साथ बिताये लम्हे याद आते तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगते थे।

शालिनी को कनाडा गये छः महीने बीत गये। इस बीच उसे सागर की कोई खबर नहीं मिली।

एक दिन वह ऑफिस से घर आई खाना खाकर सोने जा रही थी, तभी हिम्मतलाल जी का फोन आया।

हिम्मतलाल जी: बेटी कैसी है कई दिन से फोन पर बात नहीं हुई।

शालिनी: पापा मैं बिल्कुल ठीक हूॅं। आप कैसे हैं?

हिम्मतलाल जी: मैं ठीक हूं। ये ले काव्या से बात कर।

काव्या और शालिनी एक ही ऑफिस में काम करती थीं। काव्या शालिनी के घर आई थी अपनी शादी का न्यौता देने।

काव्या: शालिनी तू तो विदेश जाकर सबको भूल गई।

शालिनी: नहीं बहन तुझे कैसे भूल सकती हूं। एक तू ही तो है जिससे में अपनी हर बात शेयर करती हूॅं। सुना तू कैसी है।

काव्या: मेडम इंड्यिा आने के लिये तैयार हो जाओ। एक महीने बाद मेरी शादी है और मैं कोई बहाना नहीं सुनुंगी।

शालिनी: सच मजा आ गया। मैं तो वैसे भी आने वाली थी चल अच्छा हुआ अब तेरी शादी में जरूर आउंगी।

काव्या: हाँ आजा बहुत मजे करेंगे।

शालिनी वापस आने की तैयारी करने लगती है। वह छुट्टी के लिये अप्लाई करती है। उसे छुट्टी मिल जाती है।

शालिनी एयरपोर्ट पहुंच कर देखती है तो सामने उसके मम्मी पापा खड़े होते हैं। इतने दिनों बाद किसी अपने को देख कर उसकी आंखें छलक आती हैं। वह दौड़ कर उनके गले लग जाती है।

क्रमशः

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रिश्तों की डोर – भाग 5रिश्तों की डोर – भाग 6
रिश्तों की डोर – भाग 7रिश्तों की डोर – भाग 8
रिश्तों की डोर – भाग 9रिश्तों की डोर – भाग 10
Anil Sharma is a Hindi blog writer at kathaamrit.com, a website that showcases his passion for storytelling. He also shares his views and opinions on current affairs, relations, festivals, and culture.