समझदार बहु | Saas Bahu Moral Story Hindi

saas bahu story in hindi

Saas Bahu Moral Story Hindi : राजेश एक कामयाब इंसान। अपने माता पिता सरला जी और मधुसूदन का इकलौता बेटा। एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी में काम करते हुए उसे संजना से प्यार हो जाता है।

संजना एक इंडिपेंडेट लड़की उसके पिता जगदीश जी एक डॉक्टर हैं। अपनी बेटी को पढ़ा लिखा कर इस काबिल बना दिया है कि वह बहुत अच्छे पैकज पर उसी कंपनी में नौकरी कर रही थी जिसमें राजेश काम करता था।

दोंनो काफी दिन से एक दूसरे को डेट कर रहे थे। राजेश के पिता मधूसूदन जी एक सुलझे हुए इंसान थे, लेकिन उनकी पत्नी यानी राजेश की मां सरला जी पुराने विचारों का मानने वाली थीं।

सरला जी को संजना और राजेश के प्यार के बारे में पता लगता है तो वो बहुत गुस्सा होती हैं। अपने इकलौते बेटे की शादी के लिये उन्होंने बहुत से सपने देखे थे, लेकिन एक मार्डन बहु उन्हें मंजूर नहीं थी।

परिवार को किसी तरह मना कर राजेश और संजना ने शादी कर ली। शादी के बाद भी सरला जी संजना को अपना न सकीं उन्हें उसकी हर बात में उसके रहन सहन में, उसके ऑफिस जाने में, उसके सजने संवरने में हर चीज में प्रोब्लम थी।

राजेश और संजना किसी तरह सब संभाल रहे थे। राजेश अपने माता पिता खासतौर पर अपनी मां से बहुत प्यार करता था। इसी बीच एक दोंनो की कंपनी उनके घर से बहुत दूर शिफ्ट होने की तैयारी में लगी थी। अब या दो दोंनो जॉब छोड़ दें। या वहीं शिफ्ट हो जायें।

कंपनी के शिफ्ट होते ही, सरला जी चाहती थीं कि नौकरी छोड़ दी जाये बहु घर का काम संभाले और राजेश यहीं पास में छोटी सी नौकरी कर ले, लेकिन राजेश की जिद थी दोंनो उसी कंपनी में नौकरी करते रहें। राजेश की जिद के आगे सरला जी को झुकना पड़ा।

राजेश और संजना दोंनो अलग फ्लेट में शिफ्ट हो गये। इसका इल्जाम भी संजना पर आया। सरला जी यही बात दोहराती रहती थीं, कि मेरा बेटा कभी मुझे छोड़ कर नहीं जाता, लेकिन संजना उसे बहला फुसला कर ले गई।

दोंनो के अलग होने से सरला जी की नफरत अपनी बहु के प्रति बढ़ती जा रही थी। हालाकि दोंनो हर वीक एंड पर उनसे मिलने आते थे, लेकिन संजना कभी भी अपनी सास के मन में अपनी जगह नहीं बना पाई।

इसी बीच जिन्दगी एक ऐसा मोड़ ले लेती है। कि संजना का पति और सरला जी का इकलौता बेटा राजेश का एक्सीडेंट हो जाता है। जिसमें उसकी जान चली जाती है।

यह पहाड़ सा दुःख एक तरफ संजना को तोड़ कर रख देता है। दूसरी तरफ सरला जी का दुःख एक सितम बन कर संजना पर गिर जाता है।

संजना के पिता जगदीश जी अपनी बेटी के प्रति इस व्यवहार को सहन नहीं कर पाते। वे अब फैसला करते हैं, कि संजना की दूसरी शादी कर दी जाये। वे संजना के सास ससुर से इस बारे में बात करते हैं। सरला जी तो चाहती थीं, कि वो आज ही अपनी बेटी को ले जायें।

आगे कहानी में।

क्या संजना दूसरी शादी कर लेगी?

क्या वह अपने सास ससुर को बेसहारा छोड़ कर अपने भविष्य के बारे में सोचेगी?

जगदीश जी संजना की दूसरी शादी के लिये संजना को कैसे मनायेंगे।

राजेश के माता पिता जिनके पास इन्कम का कोई साधन नहीं है, क्या वे असहाय जीवन बितायेंगे। या अपना सब कुछ बेच कर किसी वृट्ठा आश्रम में चले जायेंगे।

सरला जी क्या कभी संजना को माफ कर पायेंगी?

क्या संजना के प्रति उनका व्यवहार बदलेगा और वो उसे अपना लेंगी?

इस परिवार की बहु क्या अपने भविष्य के बारे में सोचेगी या अपने सास ससुर के भविष्य के बारे में?

इन्हीं सब सवालों के जबाब आपको हमारी कहानी में मिलेंगे।

समझदार बहु – भाग 1समझदार बहु – भाग 2
समझदार बहु – भाग 3समझदार बहु – भाग 4
समझदार बहु – भाग 5समझदार बहु – भाग 6

यह एक काल्पनिक कहानी है। इसका किसी भी जीवित या मृत व्यक्ति, स्थान या घटना से कोई सम्बन्ध नहीं है।