आज सागर थोड़ा ठीक था। ऐसा अक्सर होता है जब भी हम किसी परेशानी में होते हैं तो कुछ समय बाद मन उसे स्वीकार कर लेता है कि शायद यही नियति थी।
वैसे ही आज सागर यह मन बना चुका है कि शायद उसका और उसके पापा का साथ कुछ ही दिन का बचा है, ऐसे में उसे ही घर की जिम्मेदारी संभालनी है। उसे इस बात से बहुत आस बंधी थी कि उसके हर सुख दुख में शालिनी उसके साथ खड़ी है।
इधर शालिनी जब घर पहुंचती है तो वह पहले से भी ज्यादा दुःखी होती है। एक तरफ सागर के साथ इतना लंबा रिलेशनशिप और दूसरी ओर अपना भविष्य कुछ समझ नहीं आ रहा था।
तभी शालिनी की मॉं सुशीला जी उसके कमरे में आती हैं।
सुशीला: बेटी मैं तेरे भविष्य को लेकर बहुत चिंतित हूं इसीलिय तुझे बार बार सागर से दूर रहने के लिये कह रही हूं। आज सागर पर परेशानी चल रही है वह बात अलग है लेकिन प्रोक्टिकल होकर सोच ऐसे हारे हुए आदमी से तुझे क्या सुख मिलेगा। दूसरों की भलाई के चक्कर में तू अपना जीवन तो बर्बाद नहीं कर सकती।
शालिनी: लेकिन मॉं यह तो सोचो अगर यह सब मेरे साथ हुआ होता तो क्या होता।
सुशीला: बेटी तू बहुत सीधी है अगर यह सब तेरे साथ हुआ होता तो सागर तुझे कभी का छोड़ कर भाग गया होता, क्योंकि तू एक लड़की है तुझे वो इमोशनल कर देता है।
यह सुनकर शालिनी सोच में पड़ जाती है, उसे रात भर नींद नहीं आती सुबह उठ कर वह एक फैसला करती है।
इधर सागर अगले दिन ऑफिस जाने के लिये तैयार होता है। तभी उसके पापा उसके पास आते हैं।
प्रशांत जी: बेटा तेरी मम्मी अभी किचन में है। मुझे लगता है कि तू कल से बहुत परेशान है। क्या बात है।
सागर: नहीं पापा ऐसी कोई बात नहीं है। बस ऑफिस में काम ज्यादा था, उसी की टेंशन है।
प्रशांत जी: बेटा मेरी बीमारी को लेकर तो कोई बात नहीं है जो तू छुपा रहा है।
सागर: नहीं पापा ऐसा कुछ भी नहीं है, अब मैं चलता हूॅं बहुत देर हो रही है।
सागर ऑफिस पहुॅंच जाता है। वह बहुत कोशिश करता है काम करने की लेकिन उसका मन काम में नहीं लग रहा था।
सागर: क्या मैंने पापा से झूठ बोल कर सही किया?
तभी शालिनी का फोन आ जाता है।
शालिनी: सागर मुझे तुमसे कुछ जरूरी बात करनी है अभी।
सागर: क्या हुआ शालिनी हम शाम को मिल तो रहे हैं तभी बात कर लेंगे।
शालिनी: नहीं सागर सुन लो तुम्हारे सामने मैं बोल नहीं पाउंगी। मैंने आज फैसला किया है, मैं चाहती हूॅं अगले पन्द्रह दिन में हम शादी कर लें।
सागर: ये तुम क्या कह रही हों?
शालिनी: सागर प्लीज पहले पूरी बात सुन लो। या तो हम अगले पन्द्रह दिन में शादी कर लें या फिर मैं प्रमोशन लेकर तीन साल के लिये कनाडा चली जाउं। यही दो रास्ते हैं मेरे सामने अब मैं अपना कैरियर और रिलेशन दोंनो को लटका कर नहीं रख सकती।
सागर: शालिनी तुम मुझे छोड़ कर जाने की बात सोच भी कैसे सकती हों?
शालिनी: सागर मुझे भी अपने बारे में सोचने का हक है या नहीं या मैं केवल तुम्हारे इंतजार में अपना सब कुछ दॉंव पर लगा कर बैठी रहूं।
सागर: शालिनी मुझे कुछ टाईम दो मैं सब ठीक कर दूंगा। इस समय पापा की बीमारी के अलावा मुझे कुछ दिखाई नहीं दे रहा।
शालिनी: मैं भी तो यही चाहती हूं कि तुम्हारे पापा अपने सामने अपने बेटे की शादी देख लें। तुम आज ही उन से बात कर लो दो दिन का समय है तुम्हारे पास।
यह कहकर शालिनी ने फोन काट दिया।
सागर (मन में): शालिनी कितनी स्वार्थी हो गई है। इसे केवल अपनी शादी अपने कैरियर की पड़ी है। मेरे हालात के बारे में तो वह सोच ही नहीं रही। चली जाये जहां जाना है।
सागर कुछ देर अपनी चेयर पर बैठ कर सोचता रहा।
सागर: लेकिन मैं शालिनी के बिना जिन्दगी की कल्पना भी नहीं कर सकता। मुझे उससे बात करके उसे समझाना चाहिये।
सागर शाम को बात करने के लिये शालिीनी को बुलाता है।
शालिनी: देखो सागर मैं तुम्हारे हालात जानती हूॅं। लेकिन मैं अब और इंतजार नहीं कर सकती।
सागर: शालिनी तुम्हें मेरे पापा की बीमारी नहीं दिखाई दे रही। एक बार सब सेटल हो जाये फिर शादी भी कर लेंगे।
शालिनी: नहीं सागर तुम्हारे पास दो दिन हैं अगले सप्ताह मेरा कनाडा का ट्रांसफर है मुझे बता देना यह कहकर शालिनी उठ कर चली गई।
सागर निराश होकर घर आ गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। क्या करे? किससे बात करे?
अगले दिन सागर शालिनी को फोन करता रहता है। लेकिन शालिनी फोन नहीं उठाती।
शालिनी घर पर अपनी मॉं से बात करती है।
शालिनी: मॉं मैंने ठीक तो किया न मुझे बहुत बुरा लग रहा है।
सुशीला जी: बेटी अगर वो तेरा साथ चहता है तो उसे तेरी बात माननी चाहिये, उसके पिता भी बेटे की शादी देख लें इसमें बुराई क्या है और अगर वह अपनी जिम्मेदारी से बचना चाहता है तो तुझे उसका साथ छोड़ देना चाहिये।
दो दिन बीत जाने के बाद भी सागर की तरफ से कोई जबाब नहीं आया अब तो उसने फोन भी नहीं किया।
शेष आगे …
















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