रिश्तों की डोर – भाग 9

Rishto-ki-Door-bhag-9

रिश्ता पक्का होने के बाद अंजली हर दिन सागर से मिलने लगती है। दोंनो शाम को समय बिताने लगते हैं। एक दूसरे को समझने का इससे अच्छा तरीका नहीं हो सकता था ये दोंनो जानते थे।

लेकिन सागर पिछली गलतियों से सबक लेते हुए थोड़ा सा सतर्क होकर बातचीत करता था। अंजली के बारे में वह ज्यादा से ज्यादा जानने की कोशिश करता था।

एक दिन अंजली ने सागर से कहा –

अंजली: सागर क्या तुम अपने पहले प्यार को भूल पाये हो?

सागर: देखों अंजली वह सिर्फ एक धोखा था जो अंदर से मेरे को झकझोर गया है। अगर तुम उसे कुरेदने की बात करोंगी तो मैं इस रिश्ते को यहीं खत्म करना चाहूंगा, क्योंकि मैं बहुत मुश्किल से किसी पर विश्वास करने की कोशिश कर रहा हूं।

अंजली: नहीं सागर वह बात नहीं है मुझे माफ कर दो। मैं समझ गई कि आपका दिल कितना साफ है। मैं फिर कभी ऐसी बात नहीं करूंगी।

इसी तरह कुछ दिन बीत जाते हैं।

इधर शालिनी बंगलौर में नौकरी करते करते सागर को ढूंढने का प्रयास करती है लेकिन वह उसे नहीं ढूंढ पाती।

एक दिन शालिनी ऑफिस से अपने फ्लेट पर पहुंची, तभी काव्या का फोन आया –

काव्या: शालिनी कैसी है तू?

शालिनी: मैं ठीक हूं। तू बता।

काव्या: तुझे एक बात बतानी थी। लेकिन मेरा नाम नहीं आना चाहिये।

शालिनी: चिंता मत कर मेरी अब किसी से बात नहीं होती, केवल पापा से कभी कभी बात होती है।

काव्या: सागर का रिश्ता पक्का हो गया है। बंगलौर में ही एक लड़की मिल गई है। शादी की डेट अभी फिक्स नहीं हुई है।

शालिनी: तू सच कह रही है? मुझे एक बार उससे मिलवा दे में तेरा एहसान जिन्दगी भर नहीं भूलूंगी।

काव्या: सुन कोई एम एन सी कंपनी है उसकी डिटेल में तुझे भेज दूंगी। लेकिन मेरा नाम नहीं आना चाहिये।

शालिनी: तूने मुझ पर जो उपकार किया है, वो मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकती।

कुछ देर बाद शालिनी को सागर की कंपनी की जानकारी मिल जाती है।

अगले दिन शालिनी ऑफिस से छुट्टी लेकर सीधे उस कंपनी में पहुंच जाती है। रिशेप्सन से सागर के बारे में पता करती है।

रिशेप्सन: सर कोई लड़की आपसे मिलना चाहती है। लेकिन अपना नाम नहीं बता रही है।

सागर: ठीक है भेज दो लेकिन उससे कहना केवल दो मिनट का टाईम है मेरे पास।

शालिनी जैसे ही सागर के केबिन के पास पहुंचती है केबिन का गेट खोलने से पहले उसके हाथ कांपने लगते हैं।

किसी तरह गेट खोल कर शालिनी सागर के सामने खड़ी हो जाती है।

सागर: मैं जानता था नाम न बताने वाली लड़की तुम ही हो। बैठो।

शालिनी: सागर मैं तुमसे माफी मांगना चाहती हूं। मैं अपनी मम्मी के कहने में आ गई। जब दो दिन तुम्हारा कोई मैसेज नहीं आया तो मुझे बहुत गुस्सा आ गया, मैं गुस्से में कनाडा चली गई।

शालिनी एक ही सांस में सारी बातें बोल गई।

सागर: जो होना था हो गया शालिनी मुझे तुमसे कोई शिकायत नहीं है।

शालिनी: मेरी मम्मी ने भी तुम्हारी बहुत बेज्जती कर दी। मुझे माफ कर दो।

सागर: शालिनी एक बात बोलूं। वो सब समय का फेर था, जो कुछ हुआ उसे मैं भूल चुका हूं और मैं चाहता हूं तुम भी भूल जाओ। मैं अब जिन्दगी में बहुत आगे निकल चुका हूं। उस शहर को उसकी यादों को भूल कर मैंने नये सिरे से यहां शुरूआत की है।

शालिनी: इसका मतलब तुमने मुझे माफ नहीं किया।

सागर: शालिनी जब मुझे तुम्हारी सबसे ज्यादा जरूरत थी, उस समय तुमने मुझे छोड़ दिया। अब मैंने अकेले जीना सीख लिया है और मैं चाहता हूं कि तुम भी सब कुछ भूल कर आगे बढ़ो।

शालिनी: क्या हम सब कुछ भूल कर पहले की तरह …

शालिनी को बीच में रोक सागर ने कहा …

शेष आगे …

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Anil Sharma is a Hindi blog writer at kathaamrit.com, a website that showcases his passion for storytelling. He also shares his views and opinions on current affairs, relations, festivals, and culture.