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#8 प्यार का एग्रीमेन्ट | Love Story Modern Kahani

अशोक वकील साहब को लेकर अन्दर आया तभी शिप्रा सोफे से उठ कर खड़ी हो गई। वह बोली – ‘‘ये सब क्या है अशोक? मेरे प्यार को कितनी परीक्षा देनी होंगी। पहले ही तुम्हारे घरवालों ने मुझे इतना कुछ सुना कर जलील किया और अब ये कोर्ट कचहरी का चक्कर।’’

अशोक ने वकील साहब को सोफे पर बैठने के लिये कहा और शिप्रा को लेकर एक कोने में गया – ‘‘शिप्रा मैं जो कुछ भी कर रहा हूं। हमारे भले के लिये कर रहा हूं। मैं नहीं चाहता कि मुझसे रिश्ता रखने के चक्कर में कोई हमारे प्यार पर सवाल उठाये।’’

शिप्रा ने गुस्से में कहा – ‘‘लेकिन सवाल तो पहले ही उठ रहे हैं। मैं एक गरीब लड़की हूं। शायद इसलिये मुझे हर इम्तिहान से गुजरना पड़ रहा है।’’

इससे पहले कि अशोक कुछ कहता शिप्रा वकील साहब के पास आकर बोली – ‘‘सर क्या हमें इस रिश्ते में रहने के लिये यह एग्रीमेंट करना जरूरी है?’’

वकील साहब बोले – ‘‘नहीं बिल्कुल नहीं बल्कि मैं तो सर को यही समझा रहा था कि अगर आप एक दूसरे से प्यार करते हैं और शादी करना चाहते हैं तो इस एग्रीमेंट की क्या जरूरत है।’’

अशोक बोला – ‘‘वकील साहब हम दोंनो एक दूसरे को बेहद पसंद करते हैं। प्यार भी करते हैं, लेकिन हम दोंनो के घरवाले हमारे प्यार के रास्ते में सबसे बड़ा कांटा बने हुए हैं।’’

अशोक की बात सुनकर शिप्रा ने जबाब देते हुए कहा – ‘‘तुम अपनी जगह ठीक हो, लेकिन क्या इस एग्रीमेंट से उनकी नफरत हम दोंनो के लिये कम हो जायेगी।’’

अशोक वहीं सोफे पर बैठ गया। कुछ देर सोचने के बाद वो बोला – ‘‘शिप्रा नफरत तो वक्त के साथ खत्म होगी। जब तक तुम्हारे और मेरे घरवाले हम दोंनो पर विश्वास नहीं कर लेते, कि हम सुखी हैं। वे हमसे नफरत करते रहेंगे। मैं नहीं चाहता कि शादी के बाद अगर मुझे कुछ हो जाये, या तुम्हें कुछ हो जाये तो दूसरे का जीवन जेल में बीते।’’

शिप्रा ने झुंझलाते हुए कहा – ‘‘मुझे लगता है यह एग्रीमेंट ही हमारे रिश्ते को तोड़ कर रख देगा। भला ऐसा भी कोई एग्रीमेंट होता है। वकील साहब क्या आपने इससे पहले ऐसा एग्रीमेंट बनाया है।’’

वकील साहब ने ना में सिर हिलाया तो शिप्रा ने यही सवाल अशोक से कर दिया। अशोक बोला – ‘‘शिप्रा मैं क्या करूं घरवाले मानते ही नहीं हैं। उन्हें लगता है मेरे साथ कुछ गलत हो जायेगा।’’

शिप्रा बोली – ‘‘ये डर तो मेरे घरवालों को भी है, लेकिन वे किसी एग्रीमेंट को नहीं मानते। वो तो बस लव मैरिज करने के पक्ष में नहीं हैं। उनका मानना है कि लड़का किसी रिश्तेदार का जान पहचान वाला होना चाहिये।’’

तभी वकील साहब बोले – ‘‘बेटी एक बार ये एग्रीमेंट मैं पढ़ कर सुनाता हूं। फिर तुम दोंनो डिसाईड कर लेना। सुनो इसके अनुसार अगर तुम दोंनो शादी करते हो और तुम दोंनो में से किसी एक को कुछ हो जाता है, या उसकी जान चली जाती है और दूसरे पार्टनर पर शक होता है, तो ऐसे में दोंनो की संपत्ती कोर्ट जब्त कर लेगी और दूसरे पार्टनर पर केस चलाया जायेगा।

केस के बाद अगर वह बेकसूर पाया गया। तब भी उसे अपने पार्टनर के परिवार को आधी सम्पत्ति देनी होगी।’’

शिप्रा ने यह सुनकर अपना माथा पकड़ लिया – ‘‘ये सब क्या है अशोक क्या हम दोंनो एक दूसरे की जान लेने के लिये शादी कर रहे हैं। इससे तो अच्छा है हम अलग हो जायें तुम अपने रास्ते मैं अपने रास्ते।’’

अशोक ने इस बार बहुत प्यार से शिप्रा का हाथ हाथ में लेते हुए कहा – ‘‘शिप्रा ऐसा नहीं है आज कल जो कुछ हो रहा है। हम जो कुछ सोशल मीड्यिा पर या खबरों में देख रहे हैं। उसी से हमारे घरवाले डरे हुए हैं। तुम्हें भी पता है ऐसा कुछ नहीं होने वाला है। हम जीवन भर साथ रहेंगे। बस एक बार इस पर साईन कर दो, जिससे हम आराम से शादी कर सकें।’’

शिप्रा को मना कर अशोक ने एग्रीमेंट पर साईन करा लिये। वकील साहब वहां से चले गये। कुछ ही दिनों में अशोक और शिप्रा के परिवार एक दूसरे से मिले और शादी तय कर दी।

शादी के बाद शिप्रा अशोक के घर में बड़े आराम से रह रही थी। दोंनो एक कॉपरेट कंपनी में नौकरी करते थे। वहीं से उनके प्यार की शुरूआत हुई थी। कुछ ही दिनों में दोंनो ने एक फ्लेट खरीदने की सोची।

शिप्रा ने अशोक से कहा – ‘‘अशोक हम कब तक इस फ्लेट का किराया भरते रहेंगे। क्यों न हम एक फ्लेट खरीद लें, डाउनपेमेंट हम दोंनो मिल कर दे देंगे और इएमआई आधी आधी बांट लेंगे।’’

अशोक ने उसकी हां में हां मिलाई, लेकिन उसे फ्लेट खरीदना अच्छा नहीं लग रहा था। वह बोला – ‘‘शिप्रा बात तो तुम्हारी ठीक है, लेकिन अगर कल हमारी जॉब चली गई। कही ट्रांसफर हो गया तो क्या करेंगे? इससे तो किराये का फ्लेट ही अच्छा है।’’

शिप्रा और अशोक में इसी बात को लेकर कई बार बहस हुई। हर बार अशोक फ्लेट लेने से मना कर देता था। इससे शिप्रा को शक होने लगा उसे लगा कि कहीं वह एक प्रोपर्टी इसलिये नहीं खरीदना चाहता क्योंकि एग्रीमेंट में एक क्लाउज था कि प्रोपर्टी कोर्ट ले लेगा या दूसरे के परिवार को उसका आधा हिस्सा देना होगा।

बहुत दिनों तक बात चलते चलते एक दिन शिप्रा ने अशोक से साफ साफ पूछ ही लिया – ‘‘अशोक अब तो हमारी शादी को काफी दिन हो चुके हैं मैं चाहती हूं कि हम उस एग्रीमेंट को फाड़ कर फेंक दें।’’

अशोक बोला – ‘‘क्यों उससे क्या फर्क पड़ता है। हमारी लाईफ तो ठीक ही चल रही है।’’

शिप्रा को गुस्सा आ गया – ‘‘मैं तुम्हारी सब प्लानिंग समझ रही हूं अशोक! तुम फ्लेट उस एग्रीमेंट के कारण ही नहीं खरीद रहे हो। हमारी आधी सैलरी किराये में चली जाती है। जो किसी काम का नहीं है। इससे ई एम आई जाती तो कितना अच्छा रहता, लेकिन तुम्हें तो कुछ चाहिये ही नहीं।’’

अशोक ने भी गुस्से में कहा दिया – ‘‘जो तुम्हें समझना है समझ लो मैं वो एग्रीमेंट केंसिल नहीं करूगा। रही बात फ्लेट की तो हो सकता कल हम वापस अपने घर जाना पड़े या कुछ और काम करना पड़े उसके लिये पैसे सेव करके रखने चाहिये।’’

इसी बात पर काफी कहा सुनी हो गई। यह झगड़ा बढ़ते बढ़ते तलाक तक पहुंच गया। एक साल तक कोर्ट के चक्कर काटने के बाद उनका तलाक मंजूर हो गया।

शादी का रिश्ता जो पहले प्यार और विश्वास पर टिका होता था। एक एग्रीमेंट के कारण तलाक की भेंट चढ़ गया। एक तरफ जहां अशोक के मन में ऐसा कुछ नहीं था, जैसा शिप्रा सोच रही थी। वहीं शिप्रा का शक ही उसके विनाश का कारण बन गया।