Bandar ki Kahani in Hindi : एक जंगल में एक बंदर रहता था। उसका नाम चिंकू था। चिंकू अपने आप को बहुत होशियार समझता था।
वह हमेशा जंगल के भोले भाले जानवरों को बेवकूफ बना कर उनके खाने पीने के सामान पर हाथ साफ करता रहता था।
एक दिन जंगल के सभी जानवरों ने मिलकर फैसला किया, कि चिंकू को जंगल से बाहर निकाल दिया जाये, क्योंकि जंगल में उसे छोड़ कर बाकी सब बहुत ईमानदार थे।
जंगल के राजा शेर सिंह ने सभी जानवरों को पंचायत में बुलाया और कहा –
शेर सिंह: चिंकू हम सबने यह फैसला किया है कि तुम्हें जंगल छोड़ कर जाना होगा क्योंकि तुम जंगल के भोले भाले जानवरों को अपनी बातों के जाल में फसा कर उनसे खाने पीने का सामान ऐठते रहते हो।
चिंकू: महाराज मुझे माफ कर दीजिये मैं आगे से कभी ऐसा नहीं करूंगा।
शेर सिंह: इसीलिये तो तुम्हें जंगल से निकाल रहे हैं तुम कहीं ओर जाकर रहो जब तुम्हारा पाला तुमसे भी तेज लोगों से पड़ेगा तो तुम्हें हमारी ईमानदारी समझ आयेगी। एक साल तक तुम्हें जंगल से बाहर जाना होगा।
चिंकू चुपचाप अपनी सजा सुनता रहा। फिर वह बेमन से जंगल छोड़ कर शहर आ गया।
शहर में न तो पेड़ थे जहां से वह फल तोड़ कर खा सके न उसे पीने का पानी मिल रहा था। दुकानों में रखे फलों को उठाने जाता तो दुकानदार लट्ठ लेकर उसके पीछे भागता।
चिंकू भूखा प्यासा बड़ी मुसीबत में फस गया। वह जंगल भी नहीं जा सकता था। एक दिन जब एक दुकानदार रात के समय अपनी दुकान बंद कर रहा था, तो चिंकू चुपचाप एक खाली फलों की टोकरी में छिप कर बैठ जाता है।
रात को जब दुकान बंद हो जाती है तो वह टोकरी में से निकल कर फल खाने लगता है। वहीं दुकान के फ्रिज में से पानी की बोतल और जूस निकाल कर पीने लगता है।
उसका पेट भर जाता है। अब उसे जोर से नींद आ रही थी। वहीं सो जाता है। सुबह जब उसकी आंख खुलती है। तो दुकान खुलने का समय हो जाता है। वह चुपचाप जाकर उसी टोकरी अंदर छिप जाता है।
दुकानदार जब दुकान खोलता है। तो वह देखता है कुछ फल आधे कुतरे हुए थे पानी की खाली बोतल और जूस का खाली डिब्बा पड़ा था।
वह इधर उधर देखता है तो उसे टोकरी के बाहर चिंकू की पूछ दिख जाती है। वह चुपचाप एक मदारी को बुला लेता है।
दुकानदार: देख भाई ये बंदर मेरा बहुत नुकसान कर रहा है तू इसे पकड़ कर ले जा।
मदारी चिंकू को पकड़ लेता है और अपने साथ ले जाता है।
मदारी चिंकू को रोज मारता था और बहुत कम खाने को देता था। धीरे धीरे उसने चिंकू को नाचना सिखाया और बाकी सारे करतब सिखा दिये।
मदारी: सुन बे तुझे मैंने जो कुछ सिखाया है कल से तू तमाशे में दिखाना। सही से दिखायेगा तो मेरी कमाई होगी। अगर एक भी गलती की तो पिटाई होगी और शाम को खाना भी नहीं मिलेगा।
अगले दिन से चिंकू मदारी के इशारे पर करतब दिखाने लगा। शाम तक वह थक जाता था। तब कहीं उसे खाना मिलता था।
चिंकू रात को रोता रहता था। उसे अपने जंगल की याद आती थी।
चिंकू: काश मैं ईमानदारी से रहता तो जंगल में खाने पीने की कोई कमी नहीं थी। बिना मेहनत के खाना मिल जाता था। फिर आराम से किसी पेड़ पर सो जाते थे।
एक दिन चिंकू तमाशा दिखा रहा था। तभी उपर आसमान में चिड़िया का एक झुंड निकला।
एक चिड़िया: अरे ये तो अपने जंगल का चिंकू है।
चिंकू भी उन्हें देख लेता है।
चिड़िया: क्यों चिंकू भाई क्या हाल हैं? यह कहकर सारी चिड़िया हसने लगती हैं।
चिंकू: बहन मैं बहुत मुसीबत में हूं। तुम शेरसिंह से कहो मुझे माफ करके जंगल में बुला लें नहीं तो मैं मर जाउंगा।
चिड़िया को उस पर तरस आ जाता है। वह उस समय तो चली जाती है अगले दिन फिर वापस आ जाती है।
चिड़िया: चिंकू मैंने बात कर ली है तुम्हें शेरसिंह और बाकी जानवरों ने माफ कर दिया है। मैं रात को तुम्हारे पास आउंगी और तुम्हारी रस्सियां काट कर तुम्हें आजाद कर दूंगी फिर तुम जंगल चले आना।
रात के समय जब मदारी सो रहा था चिड़िया अन्य चिड़ियों के साथ आई और चिंकू की रस्सियां काट दीं।
चिंकू वहां से चुपचाप बाहर आ गया और दौड़ता हुआ जंगल में पहुंच गया। अगले दिन पंचायत में चिंकू ने पंचायत में सबसे माफी मांगी अब वह ईमानदारी से जंगल में रहने लगा।
Read Also


















