Inspirational Stories in Hindi : सोहनलाल एक गॉव में फलों की ठेली लगाता था। वह खेतों से ताजा फल खरीद कर लाता था इस लिए उसके फल बहुत जल्दि बिक जाते थे।
एक दिन एक सेठ जी सोहनलाल के पास आये
सेठ जी: अरे भाई सोहनलाल तुम्हारे फल तो फटाफट बिक जाते हैं। लेकिन इस गॉव में सस्ते फल बेच कर तुम्हें कम बचत होती होगी मैं गॉव से फल लेकर शहर जाकर बेचता हूं तो ज्यादा मुनाफा होता है।
सोहनलाल: वह तो ठीक है सेठ जी लेकिन वहां पहुंचते पहुंचते बहुत से फल सड़ जाते होंगे।
सेठ जी: अरे शहर में सब बिक जाता है कोई नहीं पूछता उन्हें क्या पता ताजे फलों के बारे में वहां तो सड़े फलों के भी पूरे दाम मिल जाते हैं। तू भी शहर में अपनी दुकान लगा ले।
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सोहनलाल: नहीं सेठ जी मैं तो यहीं खुश हूं। मैं किसी को सड़े फल नहीं खिला सकता।
अगले दिन सेठ जी शहर वापस चले जाते हैं और सोहनलाल अपने फल बेचने में व्यस्त हो जाता है।
एक दिन सोहन लाल फल बेच रहा था। तभी उसने देखा एक पेड़ के नीचे एक बुढ़िया माई बैठी है। वे काफी कमजोर थी और उनसे ठीक से बैठा भी नहीं जा रहा था। कुछ देर बाद बुढ़िया माई वहीं लेट गई।
सोहनलाल उनके पास और बोला: मांजी आप ऐसे क्यों लेटे हो आपकी तबियत तो ठीक है।
बुढ़िया माई: बेटा मेरी तबियत ठीक नहीं है। मैं बहुत बीमार हूं मेरा बेटा बहू शहर गये हैं मैं यहां अकेली रहती हूं। तबियत ठीक नहीं होने के कारण खाना नहीं बना पाती। आज वैद्यजी से दवा लाई हूं उन्होंने कहा कि खाना खाने के बाद दवाई खाना। लेकिन मुझमें इतनी ताकत नहीं कि मैं अपने लिए खाना बना सकूं यही सोच कर कुछ देर इस पेड़ के नीचे बैठ गई।
सोहन लाल: अरे मांजी आप क्यों चिन्ता करती हो मैं अभी आपके लिए ताजे फल लाता हूं
यह कहकर सोहनलाल मांजी को फल लाकर देता है। फल खाकर मांजी अपने घर जाने के लिए चल देती हैं। सोहनलाल उन्हें पकड़ कर घर छोड़ देता है।
सोहनलाल: मांजी मैं रोज आपको घर पर ही फल दे जाया करूंगा जब तक आप ठीक नहीं हो जाती खाना मत बनाईयेगा।
बुढ़िया माई: लेकिन बेटा मेरे पास तो इतने पैसे नहीं हैं जो मैं तेरे फलों को मोल दे सकूं।
सोहनलाल: मांजी मुझे आपसे कुछ नहीं चाहिए। आप पैसों की चिन्ता न करें।
अगले दिन से सोहनलाल बुढ़िया माई के घर ताजे फल पहुंचाने लगा। धीरे धीरे बुढ़िया माई ठीक हो गई।
एक दिन सोहनलाल फल बेच रहा था तभी उनके पास एक औरत आई और उसने कहा: भैया मेरे पति बहुत बीमार हैं। डॉक्टर के कहने पर मैं उन्हें शहर से गॉव लाई हूं हम सामने वाले घर में रहते हैं तुम रोज सुबह ताजे फल हमारे घर भिजवा देना।
अगले दिन सोहनलाल फल लेकर उनके घर पहुंच गया।
सोहन लाल: बहनजी फल लेलो, फल लेलो फल
लेकिन उसकी आवाज सुनकर कोई नहीं आया। सोहन लाल ने कई बार आवाज दी जब कोई नहीं आया तो वह फल लेकर घर के अन्दर चला गया।
अन्दर जाकर उसने देखा एक आदमी बिस्तर पर लेटा था।
सोहनलाल: भाई साहब मैं आपके लिए फल लाया हूं बहनजी ने कल मुझसे फल पहंुचाने के लिए कहा था।
यह कहकर वह बिस्तर के पास गया वहां पहुंच कर उसने देखा कि यह तो वहीं सेठ जी हैं जिनकी शहर में फलों की बड़ी सी दुकान थी।
सोहनलाल: अरे सेठ जी आप यहां कैसे आप की तो शहर में फलों की दुकान थी।
सेठ जी: भाई मैं अब सेठ नहीं रहा शहर में मैंने ज्यादा पैसों के लालच में फलों पर कैमिकल लगाना शुरू कर दिया। उन फलों को खाकर एक लड़का मर गया उसके घर वालों ने मेरी दुकान में आग लगा दी। इसी सदमें से मैं बीमार पड़ गया वहां शहर में कई लोग मेरी तलाश कर रहे हैं किसी तरह छुपते छुपाते मैं इस गॉव में आ गया। तुम्हें कल मेरी पत्नि ने फल देने के लिए कहा होगा। लेकिन मैं यह फल नहीं ले सकता मेरे पास पैसे नहीं हैं।
सोहनलाल: सेठ जी पैसों के लालच में आपने सड़े फल लोगों को खिला दिये अब न आपके पास सेहत रही न पैसा। मैं इमानदारी से ताजे फल बेचता हूं और मजे मैं रहता हूं।
उसकी बात सुनकर सेठ जी रोने लगे।
सोहनलाल: सेठ जी आप चिन्ता न करें मैं रोज आपको ताजे फल दे जाया करूंगा आप जल्दि ही ठीक हो जायेंगे।
अगले दिन से सोहनलाल सेठ जी के घर फल पहुंचाने लगा। कुछ दिनों में सेठ जी ठीक हो गये। सेठ जी ने सोहनलाल के साथ वहीं छोटी सी फलों की दुकान खोल ली और ताजे फल बेचने लगे।
कुछ दिनों बाद सोहनलाल की दुकान पर वही बुढ़िया माई आई उनके साथ उनका बेटा भी था। उसने आते ही सोहनलाल के पैर छुये और कहा
भैया आपने मेरी मॉं की जान बचाई मैं आपका अहसान कभी नहीं भूल सकता। मैं इसी जिले में कलैक्टर बन कर आया हूं। यदि आपको कोई भी परेशानी हो तो मुझे अवश्य बताईयेगा।
यह सुनकर सोहनलाल बहुत खुश हुआ। उसे विश्वास नहीं हो रहा था कि जिले का कलैक्टर उसे जैसे मामूली आदमी के पैर छू रहा था।
सोहनलाल की दरियादिली ने सबका दिल जीत लिया था।















