एक विधवा और खाटूश्याम जी का सहारा | Khatushyam ji ka Chamatkar

Khatushyam ji ka Chamatkar
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Khatushyam ji ka Chamatkar : बाबा खाटू श्याम जी…. जिनके बारे में यह कहा जाता है कि वे हारे के सहारे हैं। उनके दरबार में आने वाले हर भक्त की कोई न कोई कहानी जरुर होती है।

किसी के साथ कोई चमत्कार होता है। किसी भक्त के बिगड़े हुए ऐसे काम बन जाते हैं जो असंभव थे।

ऐसे ही बाबा के किस्सों में से एक सच्चा किस्सा हम आपको बताने जा रहे हैं।

ये घटना 2022 की है। दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में मधु जी अपनी छोटी सी बेटी काजल के साथ रहती थीं। पिछले साल कोरोना की वजह से उनके पति का देहांत हो गया था।

पति के मर जाने के बाद ससुराल वालों का रवैया बदल गया। मधु के सास ससुर और देवर, जेठ सब ये चाहते थे कि वह किसी तरह यहां से चली जाये और उसे प्रार्पटी में हिस्सा न देना पड़े।

मधु को ये सब बातें समझ में आ रही थीं। वह बुरा भला सुनकर भी किसी तरह वहां अपनी बच्ची की खातिर रह रही थी।

लेकिन एक दिन उसके ससुर ने साफ साफ कह दिया – ‘‘बहु तुम अपने पीहर चली जाओ तुम्हारा खर्च कौन उठायेगा। वैसे भी इस लड़की की पढ़ाई और इसकी शादी की जिम्मेदारी उठाना हमारे बस की बात नहीं है।’’

उनकी बात का समर्थन करते हुए सबने मिलकर मधु को घर से बाहर निकाल दिया। मधु के पीहर में उसके भैया भाभी खुद एक छोटे से किराये के मकान में रहते थे। इसलिये वह वहां भी नहीं जा सकती थी।

लेकिन वह मजबूरी में अपने भाई के घर पहुंच जाती है। वह अपने भैया से कहती है – ‘‘भैया आप मुझे कुछ दिन यहां रहने दो फिर मैं कोई काम ढूंढ लूंगी और रहने का इंतजाम कर लूंगी।’’ भाई मान जाता है। मधु काजल के साथ वहां रहने लगती है।

अगले दिन से ही वह काम की तलाश में भटकने लगती है। लेकिन उसे कहीं भी काम नहीं मिलता। शाम को जब वह घर आती है तो देखती है काजल की तबियत बहुत खराब है। वह काजल को लेकर डॉक्टर के पास जाती है। डॉक्टर काजल का चैकअप करता है और कहता है इसमें खून की कमी है। इसके खाने पीने का अच्छे से ध्यान रखो। फल खिलाओ और साथ में ये दवाईयां लिख रहा हूं समय समय पर देना।

मधु के पास कुछ पैसे थे वह काजल को घर छोड़ कर कैमिस्ट की दुकान पर जाती है। कैमिस्ट पर्चे को देख कर कहता है। ये सारी दवाईयां मिला कर पांच सौ रुपये की हैं।

मधु के पास केवल दो सो रुपये थे। वह कैमिस्ट से दवाई उधार देने के लिये कहती है लेकिन वह मना कर देता है। पर्चा वापस लेकर मधु घर की ओर चल देती है। रास्ते में एक बंद दुकान की सीढ़ियों पर बैठ कर वह अपने भाग्य पर रोने लगती है।

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तभी उसे कहीं से भजनों की आवाज आती है। मधु उस आवाज की ओर चल देती है। बराबर वाली गली में खाटू श्याम जी का कीर्तन हो रहा था। वह रोते रोते वहां जाकर बैठ जाती है। सामने श्याम बाबा की मूर्ति को देख कर रोने लगती है। भजन सुनते सुनते वो भूल जाती है कि वह तो दवाई लेने निकली थी।

सब हारे के सहारे की जयजयकार कर रहे थे। लेकिन मधु इस सब से बेखबर बस रोये जा रही थी। बैठे बैठे कब घंटो बीत गये उसे पता नहीं लगा।

जब कीर्तन खत्म हो गया तो प्रसाद बांटा जा रहा था। मधु ने भी प्रसाद लिया। वह प्रसाद लेकर खाटू श्याम जी की मूर्ति के पास गई उसने बाबा के चरणों में सर झुकाया। रोते हुए उसने बाबा से अपनी बेटी के लिये प्रार्थना की। जब वह कीर्तन से बाहर निकल रही थी तो उसे दवाई की याद आई पर्चा देखा एक हाथ में प्रसाद था..लेकिन वह दो सौ रुपये कहीं नहीं दिखे। फिर उसे याद आया कि वे पैसे तो उसके हाथ से बाबा के चरणों में गिर गये थे।

मधु घबरा गयी…अब मेरी बेटी का क्या होगा – यह सोच कर वह रोने लगी। पैसे वापस मांग भी नहीं सकती थी। वहां तो बहुत से लोग पैसे चढ़ा रहे थे। वह वहीं खड़े खड़े रोने लगी।

फिर मुड़ कर घर की ओर चल दी तभी उसे किसी ने आवाज दी। मधु ने पलट कर देखा। एक आदमी जो प्रसाद बांट रहा था। वह उसके पास आया और बोला बहन मैं तुम्हें बहुत देर से देख रहा हूं तुम जब से आई हों रो रही हों क्या बात है।

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मधु ने कहा कुछ नहीं… और वो चल दी।

लेकिन उस आदमी ने कहा – बहन मैं तो समझ रहा था तुम बाबा के गुणगान सुनकर खुशी में रो रही हो लेकिन लगता है बात कुछ और है….मुझे बताओ तुम कौन हो ये कीर्तन मैंने ही करवाया है… बाबा के दरबार से कोई निराश जाये यह सही नहीं है…. बताओ क्या परेशानी है??

मधु ने रोते हुए उसे सारी बात बता दी। तब उस आदमी ने काम कर रहे एक लड़के को बुलाया और मधु के हाथ से पर्चा लेकर उसे दिया। एक हजार रुपये दिये और कहा – इस पर्चे की दवाईयां और बाकी बचे पैसों के फल लेकर आओ।

उसे भेजकर उस आदमी ने कहा – बहन जब तुम निराश हो गई तभी तुमने बाबा के भजन सुने जिसे सुनकर तुम यहां आईं बस समझो बाबा ने तुम्हें बुलाया है। चिन्ता मत करो… कल तुम आकर मुझसे मिलना बाबा की कृपा से मेरी बहुत बड़ी फैक्ट्री है। जिसमें तुम्हारे जैसी बहने काम करती हैं। तुम्हें काम भी मिलेगा और रहने का इंजताम भी हो जायेगा।

मधु कुछ बोल न सकी वह बस रोये जा रही थी। यह देख कर उस आदमी ने कहा – ‘‘बस बहन जितना कष्ट था वो तुमने सह लिया अब सब बाबा पर छोड़ दो बाबा ने तुम्हें अपनी शरण में ले लिया है।’’

तभी वह लड़का दवा और फल लेकर आ गया। उस आदमी ने फल और दवा मधु को दिये।

मधु उन्हें धन्यवाद देकर घर आ गई।

अगले दिन से मधु को उस फैक्ट्री में काम मिल गया। और उसे वहीं फैक्ट्री के पास रहने की जगह भी मिल गई। जहां बहुत सी औरते रहती थीं। जो अलग अलग शिफ्ट में काम करती थीं। उनसे जान पहचान हो जाने पर वे काजल का ध्यान भी रखने लगीं। कुछ ही दिनों में वह अच्छे से काम सीख गई।

मधु अब हर दिन खाटू श्याम जी का दीपक जलाती उनकी पूजा करके घर से निकलती।

छः महीने बाद उसे पता लगा कि उसकी फैक्ट्री की ओर से बस में सबको खाटू श्याम जी ले जाया जा रहा है। वह बहुत खुश हुई काजल को साथ लेकर वह खाटू श्याम जी के मंदिर पहुंच गई।

लाईन में लगे लगे उसे बहुत देर हो गई जब वह बाबा के सामने पहुंची तो उसकी आंखों से आंसू बह रहे थे।

बाबा ने बिना मांगे उसकी सारी परेशानी हल कर दी थीं। बाबा के दर्शन करके वह बाहर आई। उसका मन बहुत शांत था। अब उसने मन बनाया कि वह हर महीने खाटू श्याम जी जाया करेगी।

फैक्ट्री में मेहनत करते करते उसकी तरक्की होती रही और वह सुपरवाईजर बन गई।

कुछ दिन बाद श्याम बाबा की कृपा से उसने काजल का दाखिला बहुत अच्छे स्कूल में करा दिया।

बाबा किसी न किसी रूप में मदद करने अवश्य आते हैं। श्याम बाबा कभी भी अपने भक्तों को निराश नहीं होने देते हैं।

जय श्री श्याम….

Image Source : PNGMANGO

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