Heart Touching Story : रवि आज तुम फिर से अपनी मॉं के घर गये थे। घर में घुसते ही श्रेया ने सीधा सवाल किया।
रवि ने पहले कुछ सोचा फिर जबाब दिया … श्रेया वो मेरी मॉं हैं, पापा की तबियत ठीक नहीं रहती, मॉं हमेशा परेशान रहती हैं। मैं उनका अकेला सहारा हूॅं।
श्रेया को इन बातों से कोई फर्क नहीं पड़ रहा था। मुंह बनाते हुए श्रेया ने कहा … वो सब मैं नहीं जानती मैं तो बस इतना चाहती हूॅं कि तुमने उनसे अलग होते हुए मुझसे वादा किया था कि अपने घरवालों से कोई मतलब नहीं रखोगे … मैं सब जानती हूॅं, जब तो बहु बेटे को घर से निकाल दिया अब बेटे की कमाई के चक्कर में उसे बार बार बुलाते रहते हैं।
रवि को बहुत गुस्सा आ रहा था, लेकिन घर में क्लेश न हो इसलिये उसने खुद को संभालते हुए कहा … देखो श्रेया पैसों के लिये मेरे पापा की पेंशन ही काफी है … और रही बात वहां जाने की तो मेरे सिवा उनका है ही कौन … पापा की बीमारी को देखते हुए मेरा फर्ज है कि मैं उनका ध्यान रखूं … बेटा होने के नाते मेरा भी तो कुछ फर्ज है।
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रवि श्रेया को बहुत देर तक समझाता रहा लेकिन श्रेया नहीं मानी और उसने रवि से कसम ली कि वह बिना उससे पूछे कभी अपने मॉं बाप से मिलने नहीं जायेगा।
रवि श्रेया का स्वभाव जानता था … अगर उसके मन का काम न करो तो वह बहुत ज्यादा गुस्सा हो जाती है और डिप्रेशन में चली जाती है, जहां तक कि आत्महत्या भी करने का विचार करने लगती है।
रवि ने उसकी यह शर्त भी मान ली … लेकिन उसका मन हमेशा अपने माता पिता के लिये तरसता रहता था। उसे आज भी याद है कैसे पापा ने अपना पेट काट कर उसे पढ़ाया लिखाया, रवि की हर इच्छा पूरी की … जहां तक कि रिश्तेदारों के दबाब में न आकर रवि को अपनी पसंद की लड़की से शादी करने की इजाजत दी।
लेकिन शादी के दो महीने बाद ही श्रेया ने लड़ाई झगड़ा कर उनसे अलग होने का फैसला कर लिया … रवि के पिता जगन्नाथ जी ने एक दिन रवि से बात की … बेटा अगर बहु हम लोगों के साथ खुश नहीं है तो तू अलग हो जा … हमारी चिन्ता मत कर।
यह सुनकर रवि ने कहा … पापा अब जब मुझे आपका ध्यान रखना चाहिये आप चाहते हैं आपको बेसहारा छोड़ दूॅं … यह मुझसे नहीं होगा।
रवि की मॉं शान्ती जी ने कहा … बेटा सही तो कह रहा है यह बहु को समझायेगा तो वह भी धीरे धीरे मान जायेगी … आपकी भी तबियत ठीक नहीं रहती।
जगन्नाथ जी ने शान्ति को चुप कराते हुए कहा … कैसी बात करती हों तुम वह नये जमाने की माडर्न लड़की है। आज कल हर किसी को प्राईवेसी चाहिये होती है। जाने दे इनको … बेटा रवि तुम बहु को लेकर जहां वह जाना चाहें चले जाओ … हमारी चिन्ता मत करो।
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रवि अकेला टेरस पर खड़े होकर यही सब सोच रहा था … तभी फोन की घंटी बजी … दूसरी तरफ मॉं थीं … उनकी आवाज लड़ाखड़ा रही थी … बेटा रवि न जाने तेरे पिता को क्या हो गया … मैं इन्हें हॉस्पिटल ले जा रही हूॅं … तू जल्दी से आ जा।
रवि ने कहा … मॉं तुम चिन्ता मत करो मैं अभी पहुंचता हूॅं … यह कहकर रवि जल्दी से नीचे आया और जूते पहनने लगा।
श्रेया ने देखा रवि कहीं जाने की तैयारी कर रहा है … रवि तुम कहां जा रहे हो इतनी रात को और भी फोन किसका आया था … रवि की आंखों से आंसू बस छलकने ही वाले थे उसने कहा … श्रेया पापा की तबियत बहुत खराब है … मुझे जाना होगा, मॉं उन्हें लेकर अस्पताल गई हैं।
श्रेया गुस्से से बोली … रवि मैंने तुम्हें कहा था कि तुम उनसे मिलने नहीं जाओगे … ठीक है तुम जाओ लेकिन जब वापास आओगे तो अपनी बीबी को जिंदा नहीं पाओगे।
रवि उसके आगे गिड़गिड़ाते हुए बोला … श्रेया आज जाने दो मुझे … एक बार पापा ठीक हो जायें तो मैं फिर बिना तुम्हारी मर्जी के कभी उनसे मिलने नहीं जाउंगा।
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लेकिन श्रेया का गुस्सा तो सातवें आसमान पर था … रवि के लिये जिन्दगी और मौत का सामना एक साथ होने जा रहा था … एक तरफ उसका फर्ज उसे बुला रहा था … दूसरी तरफ उसका प्यार उसे फर्ज निभाने से रोकने के लिये मरने को तैयार था … श्रेया तुम्हें मरना है तो मर जाओ मैं अपने पापा को इस हाल में नहीं छोड़ सकता … रवि के मन में ये विचार बार बार आ रहा था लेकिन वह इसके लिये जुबान न खोल सका … कहीं श्रेया ने सचमुच कुछ गलत कर लिया तो क्या होगा … यही सोच कर वह चुप रह गया।
रवि ने जल्दी से अपने दो राहुल को फोन किया … राहुल मेरे भाई मैं कहीं फसा हुआ हूॅं। मेरे पापा हॉस्पिटल में हैं तू उनके पास पहुंच जा और जितने भी पैसों की जरूरत पड़े मुझे बता दियो मैं भेज दूंगा … और मुझे हर एक घंटे में फोन कर उनका हाला बता देना प्लेज।
राहुल यह सुनकर बोला … भाई तू चिन्ता मत कर मैं अभी पहुंचता हूॅं … और पैसों की चिन्ता मत कर मैं सब संभाल लूंगा।
रवि की आंखों से झर झर आंसू बह रहे थे … लेकिन श्रेया उसकी परवाह करे बगैर किचन में काम करने चली गई। रवि अपने बेडरूम में जाकर तकिये में मुंह छिपा कर रोता रहा।
कुछ देर बाद उसने राहुल को फोन किया … लेकिन राहुल का फोन नहीं लग रहा था … रवि और बैचेन हो गया तभी उसे ध्यान आया कि हो सकता है पापा आई सी यू में हों वहां फोन बंद रखना पड़ता है … इसी तरह अपने आप को समझा रहा था।
कुछ देर बाद श्रेया आई और बेड के एक तरफ मुंह फेर कर सो गई … जैसे रवि को गुनाह करने जा रहा था जिसे श्रेया ने पकड़ लिया।
कुछ देर बाद उसने फिर से राहुल को फोन लगाया … लेकिन फोन नहीं लगा … रवि का मन बहुत बैचेन हो रहा था … उसके हाथ पैर ठंडे पड़ रहे थे … वह अपने आप को कोस रहा था … कि क्यों उसने श्रेया से प्यार किया और आज तक उसकी हर जिद मानता रहा जबकि उसे उसकी किसी बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।
कुछ देर बाद फोन की घंटी बजी … क्या बात है राहुल पापा कैसे हैं तेरा फोन नहीं लग रहा था … राहुल का फोन देखते ही रवि ने एक ही सांस में सारे सवाल पूछ डाले।
राहुल बहुत घबराहट में बोला … रवि संभाल अपने आप को तू ही टूट जायेगा तो बाकी परिवार को कौन सम्हालेगा … तू जहां भी है जल्दी से हॉस्पिटल आ जा अंकल हम सब को छोड़ कर चले गये।
यह सुनते ही रवि के पैरों तले जमीन खिसक गई … ये क्या हो गया अभी शाम को ही तो वह उनसे मिल कर आया था … काश वह आखिरी समय में अपने पिता के साथ होता … वह जोर जोर से रोने लगा … उसकी आवाज सुन कर श्रेया उठी और पूछने लगी … क्या बात है रवि तुम क्यों रो रहे हो।
रवि ने उसे झिड़कते हुए कहा … सब खत्म हो गया श्रेया … मेरे पापा भी और शायद तुम्हारा मेरा रिश्ता भी। यह कहकर वह तेरी से बाहर निकल गया।
श्रेया भागती हुई उसके पीछे रवि रवि चिल्लाते हुए भागी … लेकिन इससे पहले कि वह कुछ कह पाती रवि वहां से जा चुका था।
श्रेया की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे … कहीं अब रवि उससे नफरत तो नहीं करने लगेगा कहीं उसे छोड़ तो नहीं देगा … यही सोच कर वह रो रही थी।
अगले दिन रवि के पिता के घर पर सारे रिश्तेदार इकट्ठे हो गये थे … रवि एक तरफ कोने में गुमसुम बैठा था … तभी वहां श्रेया आई … उसने रवि को देखा लेकिन रवि को तो जैसे होश ही नहीं था … फिर वह अपनी सास से मिल कर रोने लगी … उसकी रोने की आवज सुनकर एक बार रवि ने उसकी ओर देखा और नजरे फेर लीं।
रवि ने भारी मन से अपने पिता को अंतिम विदाई दी … आज उसके पिता को मरे पांच दिन हो चुके थे … इन पांच दिनों से श्रेया भी वहीं रह रही थी … लेकिन रवि ने एक बार भी श्रेया से बात नहीं की … यह बात शान्ति जी अच्छे नोटिस कर रहीं थीं।
जगन्नाथ जी की तेरहवी के अगले दिन शान्ति जी ने रवि और श्रेया को एक कमरे में बुलाया … रवि श्रेया को देख कर उठ कर जाने लगा … बेटा मेरी बात सुन मैंने ही बात करने के लिये बहु को बुलाया है … लेकिन मुझे कोई बात नहीं करनी मॉं … पापा की बात मान कर मैं अगल हो गया … लेकिन अब मैं आपके साथ रहूंगा … चाहें आप कितना भी कहें मैं कहीं नहीं जाउंगा … और इसे जहां जाना है चली जाये।
यह सुनकर श्रेया रोने लगी … शान्ति जी ने उसे चुप कराया और कहा … बेटा ये दो चिट्ठी तेरे पापा तुम दोंनो के नाम से छोड़ गये थे … एक तेरे लिये और एक बहु के लिये।
रवि ने जल्दी से चिट्ठी मॉं के हाथ से ले ली जैसे उसे पापा को पाने का मौका मिल गया हो। उस चिट्ठी में लिखा था … बेटा मुझे मालूम है कि बहु हम दोंनो के साथ नहीं रहना चाहती लेकिन मुझे पता है मेरे जाने के बाद तू मॉं को अकेला नहीं छोड़ेगा … फिर से इसे लेकर घर में क्लेश न हो इसलिये मैं तुझसे एक वादा लेना चाहता हूं कि अपने पापा की अंतिम इच्छा पूरी कर और बहु कहना मान कर उसके साथ चला जा … तेरी मॉं के लिये मैंने पहले ही वृद्धा आश्रम में इंतजाम कर दिया है। वह वहां सुख से रहेगी … कभी कभी उससे मिलने चले जाना … अगर तू मुझे प्यार करता है तो मेरी अंतिम इच्छा जरूर पूरी करेगा।
इधर श्रेया ने भी अपनी चिट्ठी खोली उसमें लिखा था … बेटी तू चिन्ता मत कर मेरा बेटा भावना में बह जाता है … मैं जानता हूं वह मेरे बाद यहां रहने की जिद करेगा … तुमसे लड़ाई भी करेगा … लेकिन तू चिन्ता मत कर मैं चहता हूं तुम दोंनो हसी खुशी रहो … मेरी चिट्ठी पढ़ने के बाद वह तेरे साथ चलने के लिये राजी हो जायेगा … मेरा आशीर्वाद हमेशा तुम दोंनो के साथ रहेगा।
चिट्ठी पढ़ते ही श्रेया रवि के पैरों में गिर गई … रवि मुझे माफ कर दो … ससुर जी जैसे देवता को मैंने उनके बेटे से अलग किया। इसकी सजा मुझे मिलनी ही चाहिये … तुम मुझे तलाक दे दो।
शान्ति जी ने श्रेया को उठा कर गले से लगा लिया … खबरदार बहु जो फिर कभी ऐसी बात कही … तुम्हारे ससुर जी का एक ही सपना था कि तुम दोंनो सुख से रहो … आज वो तुम दोंनो को देख कर कितने दुःखी हो रहे होंगे।
श्रेया शान्ति जी के पैरों में गिर गई … मांजी अब मैं हमेशा आपके साथ रहूंगी।
रवि भी रो कर मॉं से लिपट गया … नहीं मॉं मेरे रहते तुम वृद्धा आश्रम नहीं जाओंगी।
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