Flower Story for Kids : एक बाग में बहुत से फूल लग रहे थे। उनकें सूरजमुखी, गुलाब, गेंदा और भी बहुत से फूलों के पौधे थे। गुलाब का पौधा सबको बहुत भाता था छोटा सा पौधा था।
इसलिये उसे बहुत घमंड था। उसमें खुश्बू रहती थी।
एक दिन गेंदे के पौधे ने सूरजमुखी से पूछा – ‘‘भाई तुम तो सूरज के हिसाब से मुंह मोड़ लेते हो ऐसा क्यों करते हो। सूरज पूर्व में तो तुम पूर्व की ओर देखते हो सूरज पश्चिम में तो तुम पश्चिम की ओर देखने लगते हो।’’
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सूरजमुखी: भाई मुझे बनाया ही ऐसे गया है। मैं अगर सूरज की ओर न देखूं तो सूरज गुस्सा हो जायेगा और मैं मर जाउंगा।
गेंदा: लेकिन हम भी तो सूरज से ही धूप लेते हैं। हमारे साथ तो सूरज कोई शर्त नहीं रखता।
सूरजमुखी: भाई मेरा नाम ही सूरजमुखी है। मैं दिखता भी सूरज जैसा हूं। इसलिये मुझे तो उसके हिसाब से चलना पड़ता है हमेशा उसे खुश रखना पड़ता है।
इतना सुनकर गुलाब का पौधा हसने लगा।
गेंदा: अरे गुलाब भाई तुम क्यों हस रहे हो?
गुलाब: तुम सारे फूल जितना भी उग लो लेकिन लोग तो मुझे ही पसंद करते हैं। देखो जब भी कोई आता है मेरी ही तारीफ करता है। मेरी खुश्बू से उसे बहुत मजा आता है। इसीलिये मुझे फूलों का राजा कहा जाता है।
सूरजमुखी: वो तो ठीक है लेकिन इसमें इतना घमंड नहीं करना चाहिये। ये मत भूल जाना सबसे ज्यादा तुम्हें ही तोड़ा जाता है। सजावट के लिये इस्तेमाल करके फेंक दिया जाता है।
उसकी बात सुनकर गुलाब का फूल गुस्सा हो जाता है।
गुलाब: तुम दोंनो मुझसे जलते हो, क्योंकि लोग तुम्हें देख कर आगे बढ़ जाते हैं। लोग मुझे प्यार करते हैं इसलिये सब मुझे अपने साथ ले जाते हैं।
गेंदा: लेकिन काम तो हम ही ज्यादा आते हैं। सूरजमुखी तेल निकालने के काम आता है और में भगवान की माला बनने में काम आता हूं। गुलाब के फूल की माला तो कम ही चढ़ाई जाती हैं। सारी सजावट तो मेरे ही फूलों से होती है।
यह सुनकर गुलाब को गुस्सा आ जाता है वह कहता है –
गुलाब: अच्छा ठीक है मैं कल से उगना बंद कर देता हूं फिर देखता हूं इस बगीचे में तुम्हें देखने कितने लोग आते हैं।
सूरजमुखी: अरे भाई तुम तो नाराज हो गये। इसमें नाराज होने की क्या बात है प्रकृति ने हमें जैसा बनाया है हम वैसे ही ठीक हैं।
लेकिन गुलाब नहीं मानता। अगले दिन से गुलाब के सारे पौधों पर फूल नहीं आते। अब जो भी बाग को देखने आते वे गुलाब को न देख कर निराश हो जाते और वापस चले जाते शाम को गुलाब ने दोंनो से कहा –
गुलाब: देखा आज लोगों के चेहरे कैसे उतरे हुए थे। कोई भी ज्यादा देर रुक नहीं पाया।
गुलाब के घमंड को देख कर सभी फूलों के पौधे चुप रह जाते हैं। तभी शाम के समय दो माली बाग में आते हैं।
माली: अरे ये गुलाब का पौधा तो फूल नहीं दे रहा। इसे उखाड़ कर दूसरा लगाना पड़ेगा। मैं गांव से पौधे मंगवाता हूं फिर इसे उखाड़ देंगे।
यह सुनकर गुलाब के पौधे के होश उड़ जाते हैं वह तो मर जायेगा।
रात को सूरजमुखी और गेंदा उससे कहते हैं –
गेंदा: देखा अपने घमंड का नतीजा तुम हमें नीचा दिखाने के लिये फूल नहीं खिला रहे थे। अब तो खुद तुम्हारे उखड़ने की बारी आ गई।
सूरजमुखी: प्रकृति ने हमें किसी न किसी काम के लिये बनाया है। हमें अपनी मर्जी नहीं चलानी चाहिये।
गुलाब: हां भाईयों तुम ठीक कह रहे हो लेकिन अब क्या करूं फूल आते आते तो तीन दिन लग जायेंगे तब तक तो ये मुझे उखाड़ देंगे।
गेंदा: एक काम करो तुम कोशिश करो कि फूल जल्दी आ जायें और वैसे भी गांव से पौधे आने में तीन चार दिन लग जायेंगे। जब माली आयेंगे तो उन्हें फूल लगे दिखें तो वे वापस चले जायेंगे।
तीन दिन में फूल आ गये। जब माली नये पौधे लेकर आये वहां गुलाब के बड़े बड़े फूल लहलहा रहे थे उन्हें देख कर वे वापस चले गये।
सूरजमुखी: किसी को कम नहीं समझना चाहिये। आज गेंदे की सूझबूझ से तुम्हारी जान बच गई। वरना अपने घमंड में तो तुमने नुकसान कर ही लिया था।ं
उसके बाद तीनों पास पास खुशी से रहने लगे।
Image Source : playground


















