Emotional Hindi Kahani : मेघना जी अपनी दो बेट्यिों गुंजन और पायल के साथ एक मकान में रह रहीं थी। मेघना जी के पति के जाने के बाद एक यही सहारा रह गया है, कि सिर छिपाने की जगह है।
पति के एक्सीडेंट में गुजर जाने से परिवार पर मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा था। सुरेश जी चाहते थे पहले मकान बनवा लें उसके बाद आराम से बेट्यिों की शादी करेंगे।
सभी रिश्तेदारों ने किनारा कर लिया था। कि कहीं पैसे न मांगने लगें। कहने को पीछे पूरा परिवार था। सुरेश जी के बड़े भाई और छोटे भाई ने मिलकर जैसे तैसे तेहरवीं तक का समय साथ रहकर गुजारा। तेहरवीं के अगले दिन वे सब चले गये। अब मेघना जी अपनी बेट्यिों और इस टूटे हुए मकान के साथ रह गई थीं।
एक दिन गुंजन घर आई तो मेघना जी ने उसे पानी दिया और पूछा – ‘‘बेटा कहीं बात बनी क्या?’’
आप चिन्ता न करें मम्मी कहीं न कहीं काम मिल जायेगा।
मेघना जी: बेटी मैं तुझे पढ़ाना चाहती थी। लेकिन क्या करूं। तुम दोंनो से एक ही पढ़ सकती है।
गुंजन: मम्मी सब ठीक हो जायेगा मैं नौकरी ढूंढ रही हूं न। वैसे आज चाचा जी मिले थे, वो कह रहे थे कि घर आयेंगे कुछ जरूरी बात करनी है।
कुछ देर बाद गुंजन के चाचा घर आ गये।
चाचा: कैसी हों भाभी? कोई परेशानी तो नहीं है। बहुत दिनों से आप लोगों की कोई खबर नहीं मिली इसलिये सोचा जाकर मिल आया जाये।
मेघना जी: ठीक है भैया आप बताईये घर में सब कुशल मंगल है?
चाचा: हाँ भाभी सब ठीक है। मैं अपनी गुंजन के लिये एक रिश्ता लाया हूं। मेरे साले का लड़का है। गॉव में बहुत जमीन है। लड़के का अपना काम है गॉव में जमींदारी है। कई बीघे खेत में फसल होती है। नौकर चाकर सब लगे हैं।
मेघना जी: लेकिन उसकी तो शादी हो चुकी थी न?
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चाचा: अरे भाभी वो तो लड़की मक्कार निकली पांच महीने भी नहीं रुक पाई। लालची थी। बहुत पैसा और जमीन लेकर पीछा छोड़ा है।
मेघना जी: लेकिन मैंने तो सुना था वो पीकर उसे मारता था। क्या इसीलिये छोड़ गई।
चाचा: नहीं भाभी वो सब अफवाह फैल जाती है। बस आप चिन्ता न करें गुंजन बहुत मजे में रहेगी और फिर उनकी कोई डिमांड भी नहीं है। बस एक जोड़े में ब्याह ले जायेंगे।
मेघना जी: भैया ये क्या कह रहे हो कहां गुंजन और कहां वो लड़का दोंनो में कम से कम दस साल का अंतर है और उपर से दूजिया।
तभी गुंजन बाहर आई
गुंजन: चाचा जी पापा को गये छः महीने हो गये तब से तो आप पूछने नहीं आये आज आये भी हैं तो ऐसा रिश्ता लेकर। मुझे नहीं करनी ऐसी शादी।
मेघना जी: गुंजन तू अंदर जा। मैं बात कर रही हूं न।
चाचा: वाह भाभी खूब जबान खुलवा रखी है बेट्यिों की। भलाई का जो जमाना ही नहीं है। बिना पैसे कौन करेगा शादी। भाभी मैं चलता हूं सोच के बता देना।
उसके जाने के बाद मेघना जी, गुंजन पर बरस पड़ी
मेघना जी: तुझे पता है बिन पैसे कैसे शादी होगी। सही तो कह रहे हैं तेरे चाचा। शादी नहीं करनी न सही पर जबान तो मत चला।
गुंजन: मम्मी अगर मैं शादी करके चली गई तो तुम दोंनो का क्या होगा? पायल को पढ़ाना है। मुझे कुछ दिन में नौकरी मिल जायेगी और समय आने पर शादी भी हो जायेगी।
दो दिन बाद सुरेश जी के बड़े भाई का फोन आया।
ताउजी: गुंजन ये मैं क्या सुन रहा हूं तूने छोटे के लाये रिश्ते को ठुकरा दिया। अपनी मॉं से बात करा।
गुंजन ने फोन मम्मी को पकड़ा दिया।
मेघना जी: नहीं भाई साहब ये तो बच्ची है। इसे खूब डाटा मैंने, दरअसल मैं सोच रही थी कि उस लड़के की शादी पहले हो चुकी है, और शराब भी बहुत पीता है। कोई ओर हो तो बताना।
ताउजी: चलो रिश्ता तो में बता दूंगा। लेकिन ये बताओ शादी में कितना खर्च करोंगी। सुरेश कुछ जोड़ के रख गया है।
मेघना जी: जी नहीं वो तो लोन लेकर घर बनवाना चाहते थे।
यह कहकर मेघना जी रोने लगीं।
ताउजी: इसीलिये कह रहा हूं जैसा रिश्ता मिल रहा है कर लो।
मैं रविवार को उन लोगों को बुला रहा हूं साथ मैं भी आउंगा।
रविवार को सभी लोग आ गये। उन्हें जलपान कराया गया। चाचा और ताउजी ने मिल कर रिश्ता पक्का कर दिया।
गुंजन और मेघना जी की आवाज दबा कर सबने अपनी ओर से ही हॉं कर दी।
लड़के वाले बहुत सारे कपड़े मिठाईयां और सोने के गहने साथ में नकद दो लाख रुपये दे गये।
उनके जाने के बाद गुंजन ने अपने आप को कमरे में बंद कर लिया। बहुत मुश्किल से दरवाजा खोला। मेघना जी और पायल भी रो रहीं थीं।
गुंजन: मम्मी काश पापा होते तो कम से कम हमारी पसंद का ख्याल तो रखते।
मेघना जी: मुझे ऐसा लग रहा है जैसे तेरा रिश्ता तय नहीं हुआ बल्कि तुझे बेच दिया है।
तभी पीछे से आवाज आई – कौन बेच सकता है मेरी बहन को?
तीनों ने पलट कर देखा तो – ताउजी का बड़ा लड़का सोनू खड़ा था।
सोनू: क्यों चिंता करती हों चाची – मेरे रहते यह रिश्ता नहीं हो सकता। अभी अभी पापा से लड़ कर आ रहा हूं और रही बात चाचा की तो ये शगन का सामान कल उनके मुंह पर मार कर आउंगा। तुम चिन्ता मत करो मैं भी इस घर का बेटा हूं।
मेघना जी को जैसे हिम्मत मिल गई। सोनू ने उनके पैर छुए तभी दोंनो बहने रोते हुए उससे लिपट गईं।
सोनू: मैं आज ही आया तो पता चला गुंजन का रिशता पक्का हो गया। मैं बाहर रहता हूं तो क्या हुआ मुझे बताना जरूरी नहीं समझा चाची एक फोन करती। अपने आप को इतना अकेला क्यों समझ रही हों।
मेघना: बेटा मैंने आज तक इस घर में जबान नहीं खोली। लेकिन आज तेरी बातों से हिम्मत आ गई।
सोनू: चाची चिंता मत करो। मेरी दोंनो बहने पढ़ेंगी। कल से कॉलेज जाना और इस घर को मैं बनवा दूंगा फिर ठाठ से शादी करेंगे।
गुंजन: नहीं भैया मैं नौकरी कर लूंगी पायल को पढ़ाना जरूरी है।
सोनू: नहीं बहन बड़ों की बातें छोड़ मेरे इतना कमाने का क्या फायदा मेरे घर वाले गरीबी में गुजारा करें और हॉं अब कभी मत कहना काश पापा होते। पापा यहीं हैं। समझ ले उन्होंने ही भेजा है मुझे।
यह सुनकर तीनों फूट फूट कर रोने लगीं।
सोनू: अरे गंगा जमुना बहाती रहोंगी या चाय भी पिलाओंगी।
अगले दिन सोनू लड़ झगड़ कर सारा सामान वापिस कर आया। उसके बाद उसने मकान बनवा कर दोंनो बहनों की शादी अच्छे घरों में की। बाद में चाची को अपने साथ लेकर शहर चला गया।
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