Ram ji ki Kahani : एक गॉव में भोला नाम का एक व्यक्ति भगवान राम का भक्त था। वह दिन रात राम नाम जपता रहता था। जो भी मिलता उससे राम नाम की महीमा सुनाने बैठ जाता था। गॉव वाले उसे बहुत मानते थे। लेकिन उसकी पत्नी उससे बहुत दुखी रहती थी।
भोला गॉव में एक हलवाई की दुकान चलाता था। वह बहुत मेहनत से मिठाईयां बनाता था। उसकी बनाई मिठाई दूर दूर तक लोगों को पसंद आती थी। कुछ लोग उससे राम राम करके मुफ्त में मिठाई खा लेते थे।
सुमित्रा: तुम इतने सीधे हो कि लोग तुम्हारा फायदा उठा लेते हैं।
भोला: मैं तो प्रभु श्री राम का नाम लेकर मिठाई बनाता हूॅं कुछ लोग खरीद लेते हैं और कुछ लोगा प्रसाद समझ कर खा लेते हैं।
सुमित्रा: लेकिन राम जी के चक्कर में नुकसान तो हो ही रहा है।
भोला: तुम्हें पता है राम जी के नाम से जो मिठाई बनाता हूॅं वह इतनी स्वादिष्ट बनती है कि ग्राहकों को बहुत पसंद आती है।
सुमित्रा उसके इस स्वभाव से बहुत दुखी रहती थी। एक दिन सुमित्रा की एक सहेली उससे मिलने आई
सुमित्रा: बहन मैं तो अपने पति से बहुत दुःखी हूॅं वे तो कुछ समझते ही नहीं कि दुकान कैसे चलती है।
सहेली: एक काम कर तू उनकी दुकान को संभालना शुरू कर दे। कुछ दिन तू उनसे कह कि वे मिठाई बनायें बेचने का काम वह स्वयं करेगी। ऐसे में नुकसान नहीं होगा।
अगले दिन सुमित्रा भोला से कहती है।
सुमित्रा: सुनो जी आप आज से मिठाई बनाओ मैं दुकान पर मिठाई बेचूंगी।
भोला: ठीक है जैसा तुम चाहो लेकिन दो बातें याद रखना एक तो कोई भी ग्राहक दुकान से वापस न जाये और दूसरा सबसे पहले भगवान का भोग लगाना।
सुमित्रा दुकान पर बैठ जाती है। वह पूजा करती है। भगवान का भोग भी लगाती है। उसके बाद उसके पास ग्राहक आने लगते हैं। पहले के दिनों की तरह उसकी मिठाई खूब बिकने लगती है।
तभी एक बूढ़ा आदमी दुकान पर आया।
सुमित्रा: बाबा क्या चाहिये।
बूढ़ा आदमी: बेटी मुझे एक मिठाई खाने का मन है लेकिन मैं खरीद नहीं सकता।
सुमित्रा: बाबा यहां तो बिना पैसे मिठाई नहीं मिलेगी। मेरे पति पहले ही बहुत नुकसान कर बैठे हैं। अब यह सब नहीं होगा।
बूढ़ा आदमी: कोई बात नहीं बेटा। वो जो रामजी को भोग लगी मिठाई है वही मुझे दे दो। उसे तो तुम अब बेचोंगी नहीं। भगवान का प्रसाद समझ कर ही दे दो।
सुमित्रा: नहीं बाबा कहा न आपको पैसे लाओ तभी मिठाई मिलेगी।
यह सुनकर बूढ़ा आदमी वापस चला जाता है।
शाम के समय जब भोला दुकान पर पहुंचा तो देखा भोग की मिठाई रखी है।
भोला: क्या हुआ आज बाबा नहीं आये।
सुमित्रा: कौन बाबा। एक बूढ़ा आदमी आया था मैंने भगा दिया।
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भोला: यह तूने क्या किया जब से मैंने दुकान खोली है हर दिन वे बाबा आते हैं और भोग की मिठाई खाते हैं। उनके आने से पहले मेरी दुकान कम चलती थी। जब से वे आने लगे शाम तक सारी मिठाई बिक जाती है।
सुमित्रा: तुमने तो न जाने कितने लोगों को मुफ्त में मिठाई खिला दी अब यह सब नहीं चलेगा।
अगले दिन वह बूढ़ा आदमी नहीं आया।
पूरे दिन सुमित्रा दुकान पर बैठी रही लेकिन सारी मिठाई रखी रही। कोई ग्राहक नहीं आया।
इसी तरह कुछ दिन और बीत गये सारी मिठाई फेंकनी पड़ी।
घर का खर्च भी चलाना मुश्किल हो गया। हार कर सुमित्रा ने कहा
सुमित्रा: मुझे लगता है आप ठीक कह रहे थे। आप जल्दी से जाकर बाबा को ढूंढ लाईये। नहीं तो हम भूखे मरने लगेंगे।
भोला: अब कहां मिलेंगे बाबा?
सुमित्रा रोने लगती है। अगले दिन भोला दुकान खोलता है। भगवान राम का भोग लगाता है। फिर दोंनो एक डिब्बे में मिठाई लेकर मन्दिर पहुंच जाते हैं।
भगवान श्रीराम के चरणों में मिठाई रख कर भोला कहता है
भोला: प्रभु आपने आना बंद कर दिया।
सुमित्रा: यह आप क्या कह रहे हैं।
भोला: ध्यान से देख श्री राम की मूर्ति को।
सुमित्रा मूर्ति देखती है तो उसकी आंखों से आंसू बहने लगते हैं। क्योंकि मूर्ति के अंदर उसी बूढ़े आदमी की झलक दिखाई दे रही थी।
सुमित्रा: प्रभु मुझे माफ कर दीजिये आप स्वयं भोग लगाने आते थे। मैं मूर्ख आपको पहचान न सकी।
मन्दिर से आकर भोला ने दुकान खोली उसकी मिठाई पहले की तरह बिकने लगी। लेकिन उस दिन से प्रभु राम नहीं आये।
अब भोला और सुमित्रा सुबह दुकान खोलते ही भगवान का भोग लगाते उसके बाद दुकान के बाहर खड़े होकर मिठाई आने जाने वालों बांट देते। उन्हें आज भी इंतजार था कि शायद प्रभु किसी और वेश में आ जायें।

















