फौजी की बहन का रक्षा बन्धन | Raksha Bandhan ki Kahani

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Raksha Bandhan ki Kahani : सुखवीर फौज में नया नया भर्ती हुआ सुखबीर के घर में उसकी पत्नि राधिका और एक छोटी बहन थी सपना।

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एक दिन राधिक ने सुखबीर से कहा ‘‘आपकी छुट्टीया खत्म होने वाली हैं। अपनी छोटी बहन सपना के लिए कोई अच्छा सा लड़का देख कर इसकी शादी पक्की कर देते तो अच्छा रहता’’

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यह सुनकर सुखबीर बोला ‘‘उसके लिए मैं अपनी मौसी से बात की है वह एक लड़का बता रही हैं कल हम उसे देखने चलेंगे सब सही रहा तो इसी साल सपना की शादी कर देंगे। तब तक मैं कुछ पैसा भी जोड़ लूंगा।’’

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अगले दिन वे लड़का देखने जाते हैं उन्हें लड़का पसंद आ जाता है और कुछ ही दिनों में सपना की शादी हो जाती है।

सपना बहु बन कर अपनी पति आनन्द के घर पहुंचती है। वहां शुरू से ही उसे परेशान किया जाने लगा क्योंकि वह एक फौजी की बहन थी इसलिए उसके ससुराल वालों को ज्यादा दहेज नहीं मिला था। इसलिए वे उसे बुरा भला सुनाते रहते थे।

एक दिन सुखबीर अपनी बहन से मिलने गया। तब सुखबीर ने सपना से पूछा ‘‘बहन तू यहां ठीक से तो रह रही है कोई परेशानी हो तो बता’’

यह सुनकर सपना बोली ‘‘भैया मैं मजे में हूं लेकिन आप मुझे भूल गये बहुत दिनों बाद आये मुझसे मिलने’’

तब सुखबीर ने कहा ‘‘ऐसी बात नहीं है बहन शादी के बाद कुछ परेशानी चल रही थी। कर्ज भी तो लिया था तेरी शादी पर और फिर तेरे घर खाली हाथ कैसे आता इसलिए इतने दिन बाद आया हूं’’

यह सुनकर सपना रोने लगी और बोली ‘‘भैया मुझे पता होता आपको इतनी परेशानी होगी तो मैं शादी ही नहीं करती।’’

यह सुनकर सुखबीर हसने लगा और बोला ‘‘तू तो ससुराल जाते ही बड़ी हो गई बड़ी बड़ी बाते करने लगी तू चिन्ता मत कर मैंने सारा कर्जा उतार दिया है अब किसी बात की चिन्ता नहीं है। और हॉं कल में वापस जा रहा हूं मेरी छुट्ट्यिा खत्म हो गई।’’

तब सपना ने कहा ‘‘भैया रक्षा बन्धन पर तो आओगे न मैं आपका इंतजार करूंगी।’’

तब सुखबीर बोला ‘‘मैं कोशिश करूंगा अगर नहीं आ पाया तो तू गुस्सा मत हो जाना राखी भेज देना’’

यह कहकर सुखबीर चला गया उसके जाने के बाद सपना की सास ने पूछा ‘‘बहु तेरा भाई कुछ देकर भी गया है या खाली हाथ आया था।’’

सपना बोली ‘‘मांजी भैया सबके लिए कपड़े लाये थे लेकिन उनके पास पैसे नहीं हैं वे बड़ी मुश्किल से शादी का कर्ज उतार पाये हैं।

यह सुनकर सपना की सास बोली ‘‘यह सब तो बहाना है। सुन अगर रक्षा बन्धन पर तेरा भाई आने कहे तो उसे कह देना या तो दस हजार रुपये लेकर आये वरना भूल कर भी राखी बन्धवाने नही आये।

यह सुनकर सपना रोने लगती है।

कुछ दिन बाद रक्षा बन्धन का दिन आया सपना तैयार होकर भैया का इंतजार करने लगी। दोपहर को सपना के गॉव का एक लड़का सपना के ससुराल पहुंचा और बोला ‘‘सपना तुम्हारे भैया आने वाले हैं तुम्हारी भाभी चाहती हैं जब वे आयें तो तुम घर पर रहो इसलिए मैं तुम्हें लेने आया हूं।’’

यह सुनकर सपना ने अपनी सास से पूछा।

उसकी सास ने कहा ‘‘चली जा लेकिन वापस आये तो दस हजार रुपये लेकर आना नहीं तो हमेशा अपने भाई के घर रहना’’

कविता बिना कुछ बोले अपने घर आ जाती है।

शाम के समय सुखबीर घर आता है यह देख कर कविता और राधिका बहुत खुश होती हैं। कविता सुखबीर को राखी बांधती है। पूरा घर खुशियों से भर जाता है।

दो दिन बाद सुखबीर सपना से कहता है। ‘‘बहन अगर तू कहे तो में तुझे ससुराल छोड़ आता हूँ नई नई शादी हुई कहीं वे लोग बुरा न मान जायें कि तू अपने घर ही जाकर बैठ गई।’’

यह सुनकर सपना रोने लगी और उसने रोते रोते सारी बात सुखबीर को बता दी।

यह सुनकर सुखबीर को बहुत बुरा लगा। उसने अपनी बहन से कहा कोई जरूरत नहीं है वहां जाने की तू यहीं।

सपना वहां रहने लगती है। कुछ दिन बाद कविता की सास और उसका पति आनन्द वहां पहुंच जाते हैं। आनन्द सुखवीर के पैर पकड़ लेता है। पूछने पर वह बताता है ‘‘न जाने कैसे दस हजार रुपये वाली बात गॉव में फैल गई और एक फौजी की बहन से दहेज मांगने के कारण पूरे गॉव ने हमारा बहिष्कार कर दिया हमसे बहुत बड़ी भूल होगई हमें माफ कर दीजिये।

तभी सपना की सास बोली ‘‘बेटी मुझे माफ कर दे पैसों के लालच ने हमें अन्धा बना दिया। तू उस फौजी की बहन है तो दिन रात हमारी रक्षा के लिए अपनी जान लगा देते हैं। मैं अब तुझे कभी परेशान नहीं करूंगी।

यह सुनकर सुखबीर बहुत खुश होता है और अपनी बहन को खुशी खुशी विदा कर देता है।