भगवान विष्णु और एक सच्चे भक्त की कहानी | Hindi Story
एक गॉव में भोला नाम का एक गरीब ब्राह्मण रहता था। उसे शास्त्रों का बहुत ज्ञान था। उसके पास गॉव का कोई व्यक्ति कुछ पूछने आता था तो वह उसकी परेशानी का उपाय बता देता था।
एक दिन उसकी पत्नि सुधा ने कहा
सुधा: सुनो जी आप जो सबको उपाय बताते रहते हो। यह सब लोगों को मूर्ख बनाते हो या इस सबमें कोई सच्चाई भी है।
भोला: तुम मेरी धर्म पत्नि होकर मेरी शिक्षा पर प्रश्न चिन्ह लगा रही हों मेरी बात कभी झूठी नहीं होती।
सुधा: तो फिर अपने लिये कोई उपाय क्यों नहीं करते तुम्हें दिखाई नहीं दे रहा हम कितने गरीब हैं।
भोला: अमीरी गरीबी की माया तो मेरे श्री हरि जाने लेकिन एक बात है उन्होंने आज तक हमें भूखा सोने नहीं दिया।
सुधा: एक दिन ऐसा भी आयेगा कि गॉव में आपको कोई नहीं पूछेगा तब भूखा ही सोना पड़ेगा।
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इसी तरह भोला भगवान विष्णु की भक्ति में लीन रहकर गुजर बसर कर रहा था। तभी एक दिन उसके पास एक सेठ जी आये उन्होंने कहा
सेठ जी: भोला मेरे पास बहुत पैसा है लेकिन सुख भोगने के लिये सन्तान नहीं है। मेरा क्या कसूर है जो मुझे सन्तान का सुख प्राप्त नहीं हो रहा है।
भोला: सेठ जी आपके पिछले जन्म के कर्मों के कारण आपके घर में सन्तान नहीं है। पिछले जन्म में आप एक शिकारी थे आपने एक चिड़िया को मार दिया था। वह अपने बच्चों के लिये दाना लेने गई थी। जिससे उसके बच्चे भूख से तड़प कर मर गये। इसी कारण इस जन्म में आपको सन्तान का सुख नहीं मिल पाया है।
सेठ जी: पंडित जी कोई तो उपाय होगा।
भोला: सेठ जी जब आपके पाप कर्म समाप्त हो जायेंगे तो आपको यह सुख मिल सकता है इसके लिये इंतजार करना होगा।
सेठ जी: मैं आपका घर धन से भर दूंगा किन्तू मेरे घर में सन्तान होने का उपाय बता दीजिये।
यह सुनकर भोला को गुस्सा आ गया उसने कहा तुम मुझे धन से खरीदना चाहते हो। चले जाओ यहां से।
उसके जाने के बाद सुधा ने कहा
सुधा: जब वह सेठ धन देने को तैयार था तो तुम्हें क्या हो गया था उसे उल्टा सीधा कुछ भी उपाय बता देते।
भोला: श्री हरि विष्णु का भक्त हूं झूठ बोल कर पाप की कमाई नहीं कर सकता यदि तुम्हें मेरे साथ रहना है तो रहो नहीं तो चली जाओ यहां से।
यह सुनकर सुधा को बहुत गुस्सा आया लेकिन वह कुछ नहीं बोली और चुपचाप अपने घर के कामों में लग गई।
जिस दिन से वे सेठ जी गये उस दिन से गॉव वालों ने भोला के पास आना बंद कर दिया क्योंकि सेठ जी ने पूरे गॉव में जाकर कहा कि वह तो लोगों मूर्ख बना कर पैसा ठगता हे।
ऐसी बातों को सुनकर गॉव वाले भोला का विरोध करने लगे।
कुछ समय के बाद भोला और सुधा की भूखे मरने की नौबत आ गई।
तब सुधा ने कहा: मैंने तुम्हें कितना समझाया लेकिन तुम तो अपने विष्णु भगवान के चक्कर में पड़े हो अब जब हम जिन्दा ही नहीं रहेंगे तो भगवान जी की पूजा कैसे करोगे।
कुछ और दिन बीत गये अब दोंनो से उठा बैठा भी नहीं जा रहा था। वे दोंनो अपने घर में लेटे हुए थे।
सुधा: लगता है मरने का समय आ गया है।
भोला: मुझे तो लगता है भगवान से मिलने का समय आ गया है तू भी आखिरी समय में भगवान श्री हरि का ध्यान कर ले।
भोला और सुधा दोंनो श्री हरि भगवान विष्णु का ध्यान करने लगते हैं।
उसी समय भगवान श्री हरि विष्णु उन्हें दर्शन देने के लिये प्रकट हो जाते हैं।
भोला: भगवान अब तो हमारे अंदर इतनी भी हिम्मत नहीं कि आपके श्री चरणों में प्रणाम कर सकें। अब तो आप हमें अपनी शरण में ले लीजिये।
भगवान विष्णु: तुम मेरे ऐसे भक्त हो जो बिना किसी लालच के मेरी भक्ति कर रहे हो इस कारण तुम्हें इसी संसार में रहकर कर धर्म की शिक्षा देनी है।
तभी भगवान विष्णु की कृपा से भोला और सुधा दोंनो पूर्ण रूप से ठीक हो जाते हैं। दोंनो को भगवान विष्णु आशीर्वाद देते हैं।
विष्णु जी: मेरी कृपा से तुम्हें अन्न धन की कभी कमी नहीं होगी आज से तुम्हारा केवल मेरी भक्ति करना है।
ऐसा कहकर भगवान श्री हरि अर्न्तध्यान हो गये।
शिक्षा: इस कहानी से हमें यह शिक्षा मिलती है कि हमें अपने काम को पूर्ण निष्ठा और ईमानदारी से करना चाहिये। धन के लालच में पाप कर्म कभी नहीं करने चाहिए।


















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