Story in Hindi Short | नई बहु और गरीब सास

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Story in Hindi Short | नई बहु और गरीब सास : पवित्रा जी की नई बहु ने आज ही घर में प्रवेश किया था। घर में नई बहु के आने से सब बहुत खुश थे। घर में बधाई देने वालों का और नई बहु की मुंह दिखाई करने वालों का तांता लगा था।

इसी बीच पवित्रा जी किसी काम से अपने कमरे में गईं तभी उनकी नजर अपने पति रमाकान्त जी की फोटो की ओर गई जिनकी अभी दो साल पहले मृत्यु हुई थी। पवित्रा जी जिस काम से आई थीं उसे भूल कर अपने पति की फोटो के सामने खड़ी होकर एकटक उन्हें देख रहीं थी। उनकी आंखों से आंसू गिरने लगे तभी उनका बेटा अमित आ गया।

अमित: मॉं क्या बात है आप रो क्यों रही हों? सब ठीक तो है।

पवित्रा जी: नहीं बेटा कोई बात नहीं बस तेरे पापा की याद आ गई वे आज होते तो बात ही कुछ ओर होती।

अमित: हॉं मॉं ये बात तो है पर आप दुःखी मत हो यह सब भगवान के हाथ में है चलो बाहर सब आपका इंतजार कर रहे हैं।

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पवित्रा जी आंसू पौंछ कर बाहर आकर मेहमानो की खातिरदारी में लग जाती हैं।

शादी से भरे घर में सभी नई बहु को घेरे बैठे थे। दो दिन बाद जब सब मेहमान चले गये तो पवित्रा जी ने बहु बेटे को एक जगह बिठाया और कहा।

पवित्रा जी: बेटी अब यह घर तुम्हें संभालना है। यह लो घर की चाबी।

अंजना: मांजी ये चाबी आप मुझे क्यों दे रही हैं। यह आपका घर है आप संभालिये। अमित तुमने मांजी को बताया नहीं कि शादी के बाद हम अपने नये ›लेट में रहेंगे।

पवित्रा जी: अमित बहु यह क्या कह रही है। मैंने इतने अरमानों से तुम्हारी शादी की थी और तुम दोंनो पहले ही मुझे छोड़ कर जाने का प्लान बना कर बैठे हो।

यह कहकर पवित्रा जी रोने लगीं।

अमित: मॉं ऐसी कोई बात नहीं है। तुम जो जानती हो अंजना नये ख्यालों की लड़की है। इसलिये हम अलग रहना चाहते हैं। यहां यह एडजस्ट नहीं हो पायेगी हम आपसे कभी कभी मिलने आया करेंगे और आप चाहो तो कुछ दिन के लिये हमारे साथ रहने आ सकती हों।

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यह सुनकर पवित्रा जी को बहुत झटका लगा उनके पति का स्वर्गवास हो चुका था। इकलौता बेटा अमित भी उन्हें छोड़ कर जा रहा था। अब वे अकेले किसके सहारे रहेंगी। यही सोचकर वे रोते हुए अपने कमरे में चली गईं। दो दिन बाद अमित और अंजना अपने नये घर में चले गये। जाते समय अमित ने मॉं से कहा

अमित: मॉं मैं आपसे मिलने आता रहूंगा और पैसे भी भिजवाता रहूंगा आप चिन्ता मत करो।

पवित्रा जी: उसकी तुम चिन्ता मत करो तेरे पापा इतना कुछ छोड़ कर गये हैं कि मैं जीवन भर सुख से रह सकती हूं तू जाकर अपनी गृहस्थी जमा मेरी चिन्ता छोड़ दे।

अमित और अंजना दोंनो चले गये उनके जाने के बाद पवित्रा जी फूटफूट कर रोईं। लेकिन अब कौन था जो उनको चुप कराता इसलिये वे रोते रोते सो गईं जब उठी तो छत पर जाकर बैठ गईं।

इसी तरह कुछ दिन बीत गये अमित ने अपने नये घर जाकर एक बार भी मॉं से बात नहीं की। अमित के इस व्यवहार से पवित्रा जी टूट सी गईं थीं।

एक दिन पवित्रा जी की बचपन की सहेली उनसे मिलने आई।

कविता: अरे पवित्रा कैसी हों अमित की शादी पर तो मैं आ न सकी सोचा आज जाकर बहु की मुंह दिखाई कर आती हूॅं। बहु कहां है?

पवित्रा जी: कविता वे दोंनो ये घर छोड़ कर चले गये। बहु मेरे साथ नहीं रहना चाहती है।

यह सुनकर कविता को बहुत गुस्सा आया उसने कहा

कविता: तू चिन्ता मत कर मैं हूं न तेरे साथ सुन इस घर को पेंइग गेस्ट बना देते हैं पास ही कॉलेज है उसके बच्चे यहां आकर रहेंगे। उससे तुझे इनकम भी हो जायेगी और तेरा मन भी लगा रहेगा।

पवित्रा जी: लेकिन यह सब कैसे होगा मुझे तो कुछ नहीं आता।

कविता: मैं काफी दिनों से यही काम कर रही हूं तू चिन्ता मत मैं सब इंतजाम कर दूंगी।

कुछ ही दिन में कविता ने सारा इंतजाम कर दिया।

कालेज के बच्चे पेइंग गेस्ट की तरह वहां रहने लगे पवित्रा जी उनसे बातें करती रहती थीं उनका अपने बच्चों की तरह ख्याल रखती इस सब में समय कब निकल जाता था पता ही नहीं चलता था।

पवित्रा जी इस सब से इतनी खुश रहने लगी कि उन्हें अब अमित और अंजना की याद भी नहीं आती थी।

बच्चे भी उन्हें बहुत मानते थे। इस तरह उनका अकेलापन भी दूर हो गया और उन्हें किसी पर बोझ भी नहीं बनना पड़ा

Anil Sharma is a Hindi blog writer at kathaamrit.com, a website that showcases his passion for storytelling. He also shares his views and opinions on current affairs, relations, festivals, and culture.