सोने की मछली | Small Story for Kids

Small Story for Kids

Small Story for Kids : प्रिया अपने स्कूल से निकली और जाकर बस में बैठ गई उसकी दोस्त सोनम ने बस में बैठते ही प्रिया से कहा –

सोनम: तुझे पता है स्कूल की ओर से हमें पिकनिक पर ले जा रहे हैं।

प्रिया: सच फिर तो बहुत मजा आयेगा, कहां ले जा रहे हैं?

सोनम: वो पता नहीं लेकिन कहीं पहाड़ों में झील के किनारे ले जाने की बात कर रहे थे।

प्रिया: सच में मजा आ जायेगा। तू तो जा रही है न?

सोनम: पता नहीं मम्मी भेजेंगी या नहीं।

प्रिया: चल देखते हैं मैं तो पापा से जिद करके उन्हें मना लूंगी। फिर मम्मी भी मान जायेंगी।

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प्रिया अपने घर आ जाती है। वह अपने पापा से बात करती है। पापा उसे भेजने के लिये तैयार हो जाते हैं। अगले दिन दोंनो दोस्त मिलती हैं।

प्रिया और सोनम दोंनो बहुत खुश होती हैं क्योंकि उनके मम्मी पापा मान जाते हैं।

शनिवार के दिन स्कूल वाले सभी बच्चों को एक पहाड़ की गहराई में बनी झील के पास ले जाते हैं।

स्कूल की टीचर बच्चों को समझाती हैं

टीचर : बच्चों देखा ये झील गहरी है इसके किनारे पर बैठ कर खेलना आगे  पानी में नहीं जाना।

सभी बच्चे झील के पास बैठ कर खेलने लगते हैं। तभी प्रिया देखती है कि उसकी बोतल में पानी खत्म हो गया।

प्रिया: सोनम मेरी बोतल में पानी खत्म हो गया चल झील से भर लेते हैं।

सोनम: पागल है क्या टीचर ने देख लिया तो बहुत डाट पड़ेगी।

यह सुनकर प्रिया अकेले बोतल लेकर पानी भरने चल देती है।

सोनम, प्रिया का ध्यान रखती है कहीं वह पानी में न चली जाये। प्रिया झील से बोतल में पानी भर लेती है। वह जैसे ही पानी पीने लगती है। बोतल में से आवाज आती है – ‘‘मुझे मत मारो मुझे मत मारो’’

प्रिया डर जाती है। वह बोतल को फेंक देती है। तब बोतल से आवाज आनी बंद हो जाती है। प्रिया बोतल को फिर से उठा कर देखती है तो उसमें एक बहुत छोटी सी सुनहरी मछली तैर रही होती है।

प्रिया सोचती है कि यह बोल कैसे सकती है। तभी वह मछली बोलने लगती है –

मछली: मुझे मत मारो।

प्रिया: लेकिन तुम कौन हो और हमारी तरह बोल कैसे सकती हो?

मछली: मैं रानी मछली की बेटी हूं। हम लोग पाताल लोक में रहते हैं। मैं छिप कर बिना बताये घूमने आयी थी।

यहां कोई मुझे खा न जाये इसलिये किनारे पर बैठ कर रात होने का इंतजार कर रही थी, तभी तुमने पानी भरा और मैं पानी के संग यहां आ गई।

प्रिया: लेकिन तुम हमारी भाषा कैसे बोल लेती हों?

मछली: तुम्हारी तरह हमारा भी पूरा संसार है। हम सब पाताल में रहते हैं। मेरी मां सोन मछली सब मछलियों की रानी है। लेकिन यहां के बड़े जानवर हमें खा जाते हैं। इसलिये हम नीचे रहते हैं।

वहां कोई नहीं जा सकता। मेरी मां के पास बहुत शक्ति है। उनसे ये शक्ति मेरे अंदर भी आ गई है। अगर तुम मुझे न मारने का वचन दो तो मैं तुम्हारे बहुत काम आ सकती हूं।

प्रिय: अच्छा चुपचाप इसी बोतल में रहो मैं तुम्हें घर ले चलती हूं। लेकिन कुछ बोलना मत।

प्रिया उस मछली को घर ले आई। फिर प्रिया अपने कमरे में गई और एक बड़े से शीशे के बरतन में बोतल का सारा पानी पलट दिया।

अब वह मछली प्रिया से बात करने लगी।

मछली: तुम्हारा घर तो बहुत सुन्दर है।

प्रिय: हां क्या तुम मेरी दोस्त बनोंगी?

मछली: हां क्यों नहीं मैं तो तभी तुम्हारी दोस्त बन गई थी तब तुमने मेरी जान बचाई थी।

प्रिया: लेकिन तुम्हारे घरवाले तुम्हें ढूंढेगे।

मछली यह सुनकर उदास हो जाती है। फिर वह कहती है –

मछली: हां ये बात तो ठीक है लेकिन इस नई दुनिया को देखने में बहुत मजा आ रहा है। मैं कुछ दिन तुम्हारे साथ रहकर वापस चली आउंगी।

अगले दिन प्रिया ने एक दूसरी बोतल में मछली को डाल दिया और बैग में छिपा कर स्कूल ले गई।

स्कूल में प्रिया पड़ रही थी। प्रिया की सारी बातें सोन मछली सुन रही थी। शाम को घर आने पर जब प्रिया अपने कमरे में गई तो उसने सोन मछली को एक बड़े बरतन में निकाल लिया।

मछली: तुम्हें पता है मैंने तुम्हारी सारी पढ़ाई सीख ली।

प्रिया: अच्छा ये तो बहुत अच्छी बात है। लेकिन तुम उसका क्या करोंगी?

मछली: कल तुम्हारा पेपर है न तुम पानी की बोतल में मुझे ले जाना फिर देखना।

अगले दिन प्रिया मछली को अपने साथ ले गई जैसे ही प्रिया को प्रश्न पत्र मिला। प्रिया ने देखा कि कुछ ही देर में अपने आप सारे उत्तर कापी में लिख गये वो भी प्रिया की राईटिंग में।

यह देख कर प्रिया बहुत खुश हुई। उसने मछली की मदद से सारे पेपर बहुत अच्छे से दिये जब रिजल्ट आया तो प्रिया क्लास में फर्स्ट आई थी।

प्रिया ने सोन मछली का धन्यवाद दिया।

एक दिन प्रिया के पापा अचानक प्रिया के कमरे में आ गये उन्होंने किसी के बोलने की आवाज सुनी।

पापा: बेटा किस से बातें कर रहीं थी?

प्रिया: कुछ नहीं पापा।

लेकिन पापा के डाटने पर प्रिया ने सब सच बता दिया।

पापा: बेटा ये गलत बात है गलत तरीके से किसी भी चीज को हांसिल करना सही नहीं है। आज ये मछली तुम्हारे पास है तो तुम फर्स्ट आ गईं। लेकिन कल जब यह नहीं होगी तो क्या करोंगी।

मछली: मैं हमेशा प्रिया के साथ रहूंगी।

पापा: नहीं तुम यहां नहीं रह सकती किसी को पता लग गया तो तुम्हें मार देंगे। इससे अच्छा है प्रिया तुम इसे उसी झील में छोड़ आओ।

यह सुनकर प्रिया रोने लगी, लेकिन अपने पापा की जिद के कारण वह मान गई। अगले दिन प्रिया ने सोन मछली को एक बोतल में डाल दिया और पापा के साथ उसी झील के किनारे पहुंच गई।

प्रिया: सोन मछली तुम्हें कोई खा गया तो क्या होगा।

मछली: तुम मुझे यहीं किनारे पर छोड़ दो।

प्रिया रोने लगी तब उसके पापा ने कहा –

पापा: सोन मछली तुम इसी बोतल में रहो हम रात तक यहीं रहेंगे जब तुम्हारे माता पिता तुम्हें लेने आयेंगे तभी हम जायेंगे।

रात तक वो सब इंतजार करते रहे। लेकिन कोई नहीं आया काफी समय बीत जाने पर सोन मछली ने कहा तुम मुझे झील के पानी में छोड़ दो मैं पानी में आवाज दूंगी तो वो सुन लेंगे।

झील के पानी में छोड़ते ही सोन मछली ने अपनी आवाज में घरवालों को पुकारा तभी झील की सतह पर बहुत सारी सोने जैसे रंग की मछलियां आ गईं।

सोन मछली उनके साथ जाने लगी तभी उसने सबको प्रिया के बारे में बताया।

रानी मछली ने प्रिया से कहा –

रानी मछली: तुमने मेरी बेटी की जान बचाई हम सदा तुम्हारा उपकार मानेंगे।

जब भी तुम्हें हमारी जरूरत हो इस झील पर आकर सोन मछली पुकारना हम आ जायेंगे।

प्रिया: क्या में कभी कभी सोन मछली से मिलने आ सकती हूं।

इस पर रानी मछली तैयार हो गई।

इस तरह सोन मछली और प्रिया की दोस्ती हमेशा चलती रही।

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