रिश्तों की डोर – भाग 1

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सागर आज सुबह जल्दी उठ गया। उसे आज अपने पापा को हेल्थ चेकअप के लिये लग जाना था। सुबह जल्दी उठ कर वह पापा के कमरे में गया। उसने देखा वहां पापा नहीं थे। वह किचन में मॉं के पास गया।

सागर: मॉं पापा कहां हैं। हॉस्पिटल जाना था।

पुष्पा जी: बेटा तेरे पापा सैर करने गये हैं।

सागर: लेकिन मॉं आपको पता उनका बी.पी. कितना बढ़ा हुआ है। उन्हें अकेले सैर पर नहीं जाना चाहिये था आपको उनके साथा जाना चाहिये था। या फिर मुझे बोल देते मैं चल देता।

पुष्पा जी: कोई बात नहीं बेटा उनके साथ कई लोग जाते हैं सैर करने आ जायेंगे अभी। तू तैयार हो गया तो नाश्ता कर ले।

सागर नाश्ता करने बैठ गया। कुछ ही समय में प्रशांत जी सैर करके आ गये।

सागर: पापा आप जल्दी तैयार हो जाईये चेकअप के लिये चलना है। उसके बाद आपको घर छोड़ कर मुझे ऑफिस भी जाना है।

प्रशांत जी: बेटा तू क्यों परेशान हो रहा है। मैं अकेले ही चला जाउंगा।

सागर: नहीं पापा आपको पता है न पिछली बार आप अकेले गये थे पूरे दिन भूखे प्यासे रहने से आपको चक्कर आने लगे थे। आप जल्दी से तैयार हो जाईये मैं गाड़ी निकालता हूं।

कुछ देर में दोंनो हॉस्पिटल के लिये निकल जाते हैं। रास्ते में प्रशांत जी सागर से बात करते हैं।

प्रशांत जी: बेटा तेरी अच्छी खासी नौकरी लग गई है। अब तू शादी के बारे में सोच मेरा क्या भरोसा। एक ही सपना है तेरी बहन तान्या की तरह तेरी भी शादी देख लूं।

सागर: पापा आप कैसी बात कर रहे हैं। आपको कुछ नहीं होगा वैसे भी अभी दीदी की शादी को एक साल भी नहीं हुआ है।

प्रशांत जी: बेटा वो तो ठीक है चल मेरी छोड़ पर शालिनी भी कई सालों से शादी के इंतजार में बैठी है। उसके बारे में भी तो सोच।

सागर: पापा मैंने शालिनी से बात कर रखी है। उसका इस साल फाईनल ईयर है उसके बाद हम दोंनो शादी कर लेंगे।

ऐसे ही बातें करते करते दोंनो हास्पिटल पहुंच जाते हैं।

सागर अकेले में डॉक्टर से बात करता है।

सागर: डॉक्टर कोई मेजर प्रोब्लम तो नहीं है पापा को।

डॉक्टर: सागर उम्र के साथ साथ शरीर ढलने लगता है। वैसे कुछ बड़ा नहीं लग रहा लेकिन वे ठीक से खाना नहीं खा पा रहे ये चिन्ता का विषय है। लेकिन तुम चिन्ता मत करो। मैं कुछ दवाईयां बढ़ा रहा हूॅं। बस एक बात का ध्यान रखना तुम्हारे पापा दवाईंया टाईम पर ले लें।

सागर पापा को घर छोड़ कर ऑफिस चला जाता है। शाम को वह ऑफिस से निकलने वाला होता है तभी शालिनी को फोन आ जाता है। दोंनो शाम को एक कैफे में मिलते हैं।

शालिनी: क्या बात है सागर कुछ परेशान हो।

सागर: शालिनी पापा की तबियत ठीक नहीं रहती आज वे शादी की बात भी कर रहे थे। तुम्हें तो पता है तान्या दीदी की शादी को अभी एक साल भी नहीं हुआ है। उनकी शादी के लिये मैंने लोन लिया था। जिसकी ईएमआई चल रही है। ऐसे में पापा के इलाज का खर्च। मैं शादी के बारे में अभी सोच भी नहीं सकता।

शालिनी: तुम चिन्ता मत करो दो महीने बाद मेरा कॉलेज खत्म हो जायेगा उसके बाद मुझे नौकरी मिल जायेगी। दोंनो मिल कर सब संभाल लेंगे।

सागर: नहीं शालिनी मैं अपने हालात का बोझ तुम पर कैसे डाल सकता हूं। मैं चाहता हूं कि तुम्हें सुख दे सकूं। बस थोड़ा सा समय और दो मुझे एक बार सब सेटल हो जाये फिर शादी कर लेंगे।

शालिनी चुप रह जाती है। दोंनो कुछ देर साथ समय बिता कर अपने अपने घर चले जाते हैं।

दो दिन बाद सागर के पास डॉक्टर का फोन आता है। सागर उनके पास पहुंच जाता है।

सागर: डॉक्टर साहब क्या बात है पापा की रिपोर्ट आ गईं क्या ?

रिश्तों की डोररिश्तों की डोर – भाग 2

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