Nand Bhabhi Story in Hindi : सुमित्रा जी जैसे ही सब्जी लेकर घर में आईं। उनकी बहु प्रिया और उनकी बेटी संगीता में नोक झोंक हो रही थी। सुमित्रा जी ने सोफे पर बैठते हुए कहा
सुमित्रा: बहु क्या बात है तू हमेशा संगीता से लड़ती रहती है।
प्रिया: हां मांजी आप भी मुझे सुना लो। दीदी की गलती तो आपको कभी दिखेगी नहीं।
तभी दूसरे कमरे से संगीता रोती हुई आई और अपनी मां के पास सोफे पर बैठ गई।
संगीता: मां अगर मेरे सुसराल में झगड़ा नहीं हुआ होता तो मैं कभी यहां मुंह दिखाने नहीं आती। पापा के जाने के बाद ही मुझे समझ जाना चाहिये था, कि मायके में मेरी भाभी का राज हो गया है।
सुमित्रा जी: लेकिन बात क्या हुई कोई बतायेगा मुझे।
प्रिया: मांजी आप दीदी से पूछो मैंने इनको सिर्फ इतना कहा था कि नहाने के बाद कपड़े धो कर डाल दिया करो सारे ऐसे ही पड़े रहते हैं।
संगीता: हां मम्मी भाभी आपके, भैया के अपने और चिंटू के कपड़े तो धो सकती हैं लेकिन जब मेरे कपड़े धोने की बारी आती है तो कहती हैं खुद धो लो।
प्रिया: बात को गलत दिशा में मत ले जाओ दीदी, मैंने इसलिये कहा था कि आप सबसे बाद में नहाती हो तब तक मैं कपड़े धो चुकी होती हूं। फिर वो अगले दिन तक पड़े रहते हैं।
सुमित्रा: तो अब क्या मेरी बेटी तेरे हिसाब से नहायेगी। दो कपड़े बाद में धुल जायेंगे तो क्या तेरे हाथ टूट जायेंगे।
प्रिया: वाह माजी आप भी गलत का साथ दे रही हैं। एक तो ये शाम के समय नहाती हैं। क्या ये सुबह नहीं नहा सकती।
संगीता: हां अब तो तुम्हारी गुलामी करनी ही पड़ेगी। मेरे पापा थे तब तो किसी ने नहीं टोका मेरी जब मर्जी होती थी। नहाती थी।
प्रिया: गलत आदतों को बदल लेना चाहिये। मैं तो आपके भले के लिये कह रही हूं। आप दोपहर को सो कर उठती हों फिर नहाने जाती हों। कल ससुराल में क्या करोंगी।
सुमित्रा: बहु तू अंदर जा अभी मैं बैठी हूं। सब तेरे हिसाब से नहीं चलेगा।
प्रिया बिना कुछ बोले अपने कमरे में चली जाती है।
इधर संगीता अपना सामान पैक करने लगती है। सुमित्रा उसे समझाती है लेकिन वह नहीं मानती और अपने पति विनोद को फोन करती है।
संगीता: सुनो जी तुम मुझे आकर ले जाओ मैं अब यहां नहीं रहना चाहती हूं।
विनोद: लेकिन तुमने तो कहा था कि मेरी मां के साथ नहीं रहोगी।
संगीता: मुझे माफ कर दो मैं उनके साथ कभी लड़ाई नहीं करूंगी।
शाम को विनोद, संगीता को लेने आया।
संगीता: भाभी मैं जा रही हूं और अब शायद कभी नहीं आउंगी। भैया आयें तो उन्हें कुछ मत बताना नहीं तो परेशान हो जायेंगे।
प्रिया: दीदी मैंने जो कुछ कहा उसे याद रखना। ससुराल में ये गलती मत करना मैं आपकी दुश्मन नहीं हूं। मैं तो आपका भला चाहती हूं।
संगीता अपनी मां के गले लग कर कहने लगी
संगीता: बहुत ढील दे रखी है आपने अपनी बहु को, किसी की भी बेज्जती कर देती है। मैं तो जा रही हूं। ऐसा ही रहा तो किसी दिन आपको भी बाहर का रास्ता दिखा देगी।
सुमित्रा: बेटी तू चिंता मत कर आने दे चन्दन को इसे ठीक करवाती हूं।
संगीता अपनी ससुराल पहुंच जाती है।
वहां कुछ दिन सब ठीक चल रहा था। लेकिन जो आराम संगीता को मायके मिल रहा था। वह यहां नहीं था। सुबह जल्दी उठ कर नहा धो कर सबके लिये नाश्ता और खाना बनाना पड़ता था। फिर दिन भर घर की साफ सफाई फिर शाम का खाना। ऐसे में उसे मायके की याद आने लगी।
एक दिन उसने अपने भाई चन्दन को फोन किया।
संगीता: कैसे हो भाई?
चन्दन : बहन मैं तेरे से बहुत गुस्सा हूं। तूने मेरे आने का इंतजार भी नहीं किया अचानक ससुराल चली गई।
संगीता: भाई क्या करती भाभी नहीं चाहती थीं मैं वहां रहूं, यहां सारे जुल्म सहने पड़ रहे हैं फिर भी मैं अब कभी वहां नहीं आउंगी।
चन्दन : क्या कहा वे लोग तुझ पर जुल्म कर रहे हैं। बहन ये घर तेरा भी है। मैं अभी तुझे लेने आ रहा हूं और मैं देखता हूं प्रिया तुझे कैसे परेशान करती है।
शाम को चन्दन संगीता को लेने पहुंचा।
विनोद: आईये साले साहब आज अचानक कैसे आना हुआ?
चन्दन : आप मेरी बहन को परेशान कर रहे हैं मैं उसे लेने आया हूं।
विनोद: लेकिन हमने क्या किया।
चन्दन : वो सब मुझे नहीं पता। संगीता चल अपने घर।
संगीता बाहर आती है। उसने सामान पहले ही पैक कर लिया था।
विनोद, संगीता से पूछता रहा लेकिन वह बिना कुछ बोले चन्दन के साथ घर के लिये रवाना हो गई।
घर पहुंच कर चन्दन ने प्रिया को बुलाया।
चन्दन : प्रिया संगीता अब यहीं रहेगी, इसके ससुराल वाले इसे परेशान कर रहे थे। अगर तुम्हें यह पसंद नहीं तो तुम अपने घर जा सकती हो।
प्रिया रोते हुए अपने कमरे में चली जाती है। सुबह प्रिया अपना सामान पैक करके अपने घर चल देती है।
चन्दन : ये तुम्हारा आखिरी फैसला है। मैं तुम्हें लेने नहीं आउंगा।
प्रिया: जिस घर में सही गलत में फर्क न समझा जाये वहां रहने का क्या फायदा।
संगीता: भैया आप मेरी वजह से भाभी को मत निकालिये। मैं इनके साथ रह लूंगी।
तभी पीछे से विनोद की आवाज आती है।
विनोद: हां हां भाभी को रोक लो। वरना तुम्हें काम करना पड़ेगा।
चन्दन : अरे आप यहां कैसे?
विनोद: भाई तुम्हारी बहन यहां इसलिये रहना चाहती है, क्योंकि इसे काम नहीं करना पड़ता। अगर तुम्हारी पत्नी चली गई तो इसे यहां भी काम करना पड़ेगा।
चन्दन : संगीता क्या ये सच है?
संगीता: भैया मुझसे गलती हो गई। यहां सारा काम भाभी करती हैं और ससुराल में सारा काम मुझे करना पड़ता है। इसलिये मैंने झूठ बोला था कि ये मुझे परेशान करते हैं। मैं यहां मजे से रहना चाहती थी।
सुमित्रा: बेटी ये तूने अच्छा नहीं किया। जा यहां से आज के बाद कभी यहां मत आना।
चन्दन : बहन यह अच्छी बात नहीं, विनोद जी मुझे माफ कर दीजिये।
संगीता: भाभी और भैया मुझे माफ कर दो।
विनोद: चलो अभी भी कुछ नहीं बिगड़ा अपने घर चलो।
संगीता अपनी ससुराल वापस चली जाती है।

















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