लड्डू गोपाल आये माखन खाने | Krishna ji ki Kahani

Krishn Ji ki Kahani

Krishna ji ki Kahani : कर्मपुर गॉव में अनिकेत अपनी पत्नि सुधा के साथ रहता था। वह दूध बेचने का काम करता था। उसके पास दो गाय थीं। एक दिन अनिकेत दूध बेचने जा रहा था तो उसे किसी ने आवाज दी।

अनिकेत ने मुड़ कर देखा तो एक छोटाा सा बच्चा उसे पुकार रहा था।

अनिकेत: क्या है क्यों बुला रहा है मुझे।

बच्चा: मुझे मक्खन खाना है।

अनिकेत: मेरे पास तो सिफ दूध है।

बच्चा: ठीक है मुझे दूध ही दे दो।

अनिकेत: पैसे हैं तेरे पास जो दूध पियेगा। जा अपने घर से पैसे लेकर आ।

बच्चा: मेरे पास पैसे नहीं हैं बिना पैसों के दे दो

अनिकेत उसे डाट कर भगा देता है और दूध बेचने चला जाता है। 

वह सारा दिन भटकता रहता है लेकिन उसका आधा ही दूध बिक पाता है। शाम तक घूमने के बाद वह घर आ जाता है।

सुधा: क्या बात है आज बहुत परेशान हो।

अनिकेत: आज तो पता नहीं क्या हो गया आधा दूध बिका ही नहीं।

सुधा: कोई बात नहीं मैं इसका मक्खन निकाल कर तुम्हें दे दूंगी उसे तुम बेच आना।

तभी अनिकेत को बच्चे की बाद याद आ गई उसने सुधा को सारी बात बताई।

सुधा: यह आपने ठीक नहीं किया।

अनिकेत: तू नहीं जानती इन गॉव वालों को जान बूझ कर अपने बच्चों को भेज देते हैं। एक को दे दिया कर दस आ जायेंगे।

अगले दिन अनिकेत मक्खन और दूध दोंनो लेकर चल देता है।

रास्ते में उसे वही बच्चा मिलता है। वह फिर से मक्खन मांगता है। और अनिकेत उसे फिर से डाट कर भगा देता है।

उस दिन भी उसका न मक्खन बिका न दूध वह शाम को घर आ जाता हैं

अगले दिन से हर दिन यही होता था। अब वह बच्चा अनिकेत को नहीं मिलता लेकिन उसका दूध कोई नहीं खरीदता था।

धीरे धीरे वे गरीब होने लगते हैं। एक दिन एक गाय को चारा खिलाने के लिये अनिकेत एक गाय को बेच देता है।

इसी तरह चिंता करते करते अनिकेत बीमार पड़ जाता है। वह इतना कमजोर हो जाता है कि उससे उठा भी नहीं जा रहा था।

सुधा उसे दवाई देकर दूध बेचने चल देती है।

अनिकेत: लगता है उस बच्चे का दिल दुखा कर मैंने ठीक नहीं किया पैसों के लालच में मैं अंधा हो गया था। तुझे कोई भी मिले उसे बिना पैसे लिये दूध दे देना शायद इस तरह मेरे पाप कम हो जायें।

सुधा उसी जगह पहुंच जाती है। जहां वह बच्चा अनिकेत को मिला था।

सुधा: मुफ्त में दूध ले लो मुफ्त में मक्खन ले लो।

पूरे दिन आवाज लगाने के बाद भी उसका दूध दही कोई नहीं लेता वह थक हार कर एक पेड़ के नीचे बैठ जाती है।

तभी उसे एक औरत जाती हुई दिखती है।

सुधा: बहन इस गॉव में कोई भी हमसे दूध मक्खन नहीं लेता क्या बात है कुछ समझ में नहीं आ रहा।

औरत: अरे तुम्हें नहीं पता इस गॉव में कुछ दिन पहले एक बालक आया था। वह सबसे दूध और मक्खन मांग रहा था। सबने उसे मक्खन खिलाया। जानती हों जिस बर्तन में उसने मक्खन खाया था। वह बर्तन हमेशा दूध से भरा रहता है। इसलिये हमें दूध की जरूरत नहीं पड़ती।

सुधा: बहन वह बच्चा कहां है।

औरत: अब तो पता नहीं कहां चला गया। लेकिन इस गॉव पर उसकी ऐसी कृपा सच कहूं तो मुझे लगे कान्हा जी खुद आये थे मक्खन खाने।

यह सुनकर सुधा रोती हुई घर आ जाती है।

सुधा अनिकेत को सारी बात बताती है।

अनिकेत यह सब सुनकर रोने लगता है।

अनिकेत: भगवान कृष्ण स्वयं दर्शन देने आये और मैं उन्हें भोग भी न लगा सका मेरा पाप अब मेरे मरने से भी नहीं कटेगा।

अनिकेत और सुधा दोंनो अन्न जल छोड़ भगवान कृष्ण नाम का जाप करने लगते हैं। इसी तरह कई दिन बीत जाते हैं। अनिकेत जो पहले से ही बीमार था। मरने की अवस्था में पहुंच जाता है। सुधा भी बहुत कमजोर हो जाती है।

तभी रात के समय वही बच्चा उनके घर आ जाता है।

बच्चा: मुझे माखन खाना है।

उसकी आवाज सुनकर दोंनो उठ जाते हैं। और रोने लगते हैं।

अनिकेत: भगवान आज सच में मेरे पास माखन नहीं है। अब तो दूध भी नहीं है। मैं आपका भोग कैसे लगाउं

सुधा रोकर उनके पैरों में गिर जाती है।

बच्चा: झूठ बोलते हो वो देखो।

दोंनो पीछे देखते हैं। तो सोने के बर्तनों में दूध दही और मक्खन के ढेर लगे हुए थे।

दोंनो बच्चे के पैरों में गिर जाते है। भगवान श्री कृष्ण अपने असली रूप में आ जाते हैं।

उनके चमत्कार से अनिकेत और सुधा बिल्कुल ठीक हो जाते हैं।

कान्हा: यदि कोई तुमसे मदद मांगे तो उसकी मदद अवश्य करना।

यह कहकर कान्हा जी अर्न्तयध्यान हो गये।

उसके बाद दोंनो प्राणी भगवान की भक्ति करने लगते हैं।