Karwa Chauth ki Kahani : लखनपुर गॉव में केतकी अपने दो बेटों माखन और लाखन के साथ रहती थी। माखन का विवाह हुए 2 साल हो चुके थे उसकी पत्नि मधु बहुत सुन्दर थी और वह दहेज में बहुत सामान लाई थी। केतकी का दूसरा बेटा थोड़ा सांवला था।
केतकी उसके लिये भी ऐसी ही बहु लाना चाहती थी, लेकिन उसे कोई लड़की वाला पसंद नहीं करता था। एक दिन केतकी को रास्ते में उसकी सहेली बिमला मिली।
केतकी: बिमला बहन कैसी हो
बिमला: मैं तो ठीक हूं केतकी लेकिन मैंने सुना है लाखन का विवाह नहीं हो पा रहा है। तू कहे तो मैं कोशिश करू। मैं एक लड़की को जानती हूं वह अपनी मॉं के साथ यही पास में रहती है। लेकिन वह सांवली है इस कारण उसकी भी शादी नहीं हो रही है।
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केतकी: हॉं बहन बात करके देखो।
बिमला: लेकिन वे बहुत गरीब हैं दहेज नहीं दे सकेंगे।
केतकी: चलो कोई बात नहीं मेरे नसीब में यही सही तुम बात करो। अगर सब सही रहा तो इसी महीने शादी कर देंगे।
कुछ दिनों बाद लाखन की शादी राखी से हो जाती है। एक दिन केतकी अपने घर में बैठी थी।
केतकी: काली औ काली कहां चली गई।
राखी: मांजी आप मुझे बुला रहीं है।
केतकी: महारानी यहां सब गोरे हैं बस तू ही तो काली है।
राखी: जी मांजी बताईये क्या काम है।
केतकी: सुन बहुत आराम हो गया तेरी जेठानी मधु बहुत सारा दहेज लाई है और एक तो तू काली उपर से कंगाल घर से आ गई। आज से घर का सारा काम तू करेगी।
राखी: ठीक है मांजी आप चिन्ता न करें मैं सारा काम कर लूंगी।
केतकी और मधु मिल कर राखी से सारा काम करवाते थे। एक दिन केतकी ने राखी को बुलाया।
केतकी: सुन बहु दिवाली आने वाली है तू अभी से सारे घर की सफाई शुरू कर दे।
राखी: लेकिन मांजी अभी तो बहुत दिन हैं।
केतकी: हां तो अभी से शुरू करेगी तभी हो पायेगी।
राखी घर की सफाई में लग जाती है। तभी लाखन घर आता है।
लाखन: मॉं मुझे शहर में बहुत अच्छा काम मिला है पैसा भी बहुत मिलेगा मैं शहर जा रहा हूं।
केतकी: लेकिन बेटा अभी तो त्यौहारों का समय है दिवाली बाद चले जाना।
लाखन: नहीं मॉं मुझे कल ही जाना पड़ेगा। मैं राखी को भी ले जाउं क्या।
केतकी: यह शहर में क्या करेगी अभी त्यौहार पर बहुत काम है तू एक काम कर करवाचौथ पर आयेगा तब इसे ले जाना।
लाखन शहर चला जाता है। कुछ दिन बाद करवाचौथ आने वाली थी।
राखी: मांजी करवाचौथ आने वाली है मुझे बता दीजिये कैसे व्रत रखते हैं और कैसे पूजा होती है।
केतकी: मेरी बड़ी बहुत सब जानती है और इस गवार को कोई रीति रिवाज पता नहीं है।
राखी: मेरे पिताजी नहीं थे इसलिये मॉं को कभी करवाचौथ का व्रत रखते नहीं देखा इसलिये मुझे कुछ नहीं पता इसके बारे में।
केतकी: ठीक है उसी दिन बता दूंगी लेकिन अगर लाखन नहीं आया तो व्रत कैसे पूरा करेगी।
राखी: वे आ जायेंगे मुझे पूरा विश्वास है।
केतकी: हॉं तेरे जैसी काली बीबी के लिये वह शहर की चकाचौंध छोड़ कर आयेगा वह तो अब तक तुझे भूल चुका होगा
यह सुनकर राखी रोने लगती है। वह डर जाती है। वह मॉं दुर्गा के सामने बैठ कर प्रार्थना करने लगती है।
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राखी: मॉं मेरे पति को करवाचौथ के दिन भेज देना मेरा पहला करवाचौथ है। कहीं कोई अपशकुन न हो जाये।
आज करवा चौथ का दिन था। मधु और राखी सुबह से ही तैयार होकर शाम का इंतजार करने लगती हैं। माखन तो शाम को वापस आ जाता है लेकिन लाखन की कोई खबर नहीं मिल रही थी कि वह शहर से आ रहा है कि नहीं।
शाम को दोंनो बहुओं ने पूजा की और चांद निकलने का इंतजार करने लगी।
लाखन के न आने से सभी परेशान थे।
माखन: मॉं मैं जाकर और लोगों से पता करता हूं जो शहर से आज ही आये हैं। क्या पता लाखन की किसी से बात हुई हो।
केतकी: कोई जरूरत नहीं है। मुझे पता है इस मनहूस की शक्ल देख कर वह गया है अब वापस नहीं आयेगा। मुझे लगता है वह इससे पीछा छुड़ाने के लिये ही शहर गया है।
मधु: हां माजी आप ठीक कह रही हों देवर जी ने शहर में ही कोई पसंद कर ली होगी इसे तो धक्के मार कर घर से बाहर निकाल देना चाहिये।
माखन: तुम दोंनो ये क्या कह रही हों शर्म आनी चाहिये तुम्हें।
केतकी: तू चुप रह इस कंगाल के चक्कर मेरा बेटा भी हाथ से चला गया। इससे तो कुंवारा ही ठीक था। तू मधू का व्रत पूरा करा कर खाना खा ले इसके बाद इसे इसके मायके छोड़ आयेंगे।
राखी बैठी बैठी रो रही थी।
तभी पीछे से आवाज आई
लाखन: कौंन मेरी पत्नि को घर से निकालेगा।
सभी ने देखा लाखन पीछे खड़ा था।
राखी उसे देखकर खुश हो गई। लाखन ने आगे कहना शुरू किया।
लाखन: मैं पैसा कमाने शहर गया तो तुमने मेरी पत्नि को नौकरानी बना दिया अगर ये काली है तो मैं भी तो काला हूं फिर तो मुझे भी यहां नहीं रहना चाहिये।
केतकी: नहीं बेटा यह तो तेरा घर है।
राखी: आप यह सब मत सोचिये चलिये व्रत पूरा करते हैं चौथ माता ने मेरी पुकार सुन ली।
लाखन और राखी ने चांद को देख कर व्रत पूरा किया। उसके बाद लाखन ने अपनी मॉं को बहुत सारा रुपया दिया और राखी को लेकर शहर के लिये निकल गया।
















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