Hindi Moral Story : पार्वतीजी जल्दी जल्दी घर का काम निबटा कर बैंक के लिये चल दीं उन्हें उम्मीद थी कि आाज तो पेंशन जरूर मिल जायेगी। वो जैसे ही बैंक के गेट पर पहुंची।
स्क्योरटी गार्ड: मांजी आज आप फिर से आ गईं … मैंने आपको कहा था इस महीने पेंशन देर से आयेगी … अभी पेंशन नहीं आई है।
यह सुनकर पार्वती जी का कलेजा बैठ गया .
पार्वती जी: बेटा दो महीने होने को आये घर में खाने के लिये एक दाना नहीं है … अगर अब भी पेंशन न मिली तो मैं जिंदा नहीं रहूंगी … बेटा एक बार मैंनेजर से मिल लेने दे।
बूढ़ी पार्वती जी पर तरस खाकर उसने उन्हें अंदर जाने दिया। अंदर जाकर उन्होंने मैंनेजर के केबिन की तरफ झांका … मैंनेजर बैठ कर चाय पी रहा था। पार्वती जी डरते डरते उसके पास पहुंच गईं।
पार्वती जी: साहब मैं बहुत दिनों से चक्कर काट रही हूं मेरी पेंशन नहीं आई।
उनकी आवाज सुनकर मैंनेजर चौंका
मैंनेजर: अरे मांजी आप बाहर पता कीजिये।
पार्वती जी: बेटा बाहर तो कई बार पता कर चुकी हूं। मेरे घर में खाने का एक दाना नहीं है। आप मेरे को कुछ पैसे उधार दिलवा दीजिये जब पेंशन आये उसमें से काट लेना।
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मैंनेजर: नहीं मांजी ऐसा नहीं होता। ऐसे हम उधार नहीं दे सकते जब आपकी पेंशन आयेगी तभी आपको मिलेगी।
मैंनेजर का रूखा सा जबाब सुन कर पार्वती जी बाहर आ गईं और घर की ओर चल दीं। चलते चलते वे थक गईं थी तो एक बंद दुकान के बाहर बैठ गईं।
पार्वती जी ने सामने देखा तो एक रेस्टोरेंट था। जिसे देख कर उन्हें कुछ याद आया। पांच साल पहले उनका बेटा अंकित उन्हें इसी रेस्टोरेंट में पार्टी देने लाया था। जब उसकी पहली नौकरी लगी थी। इन पांच सालो में कितना कुछ बदल गया।
नौकरी लगने के दो साल बाद ही उसने अपनी पसंद की लड़की से शादी कर ली और उसके एक साल बाद दोंनो कनाडा चले गये। पहले कभी कभी उसका फोन आता था। एक दो बार उसने पैसे भी भिजवा दिये। लेकिन पिछले एक साल से उसने पार्वती जी की कोई खबर नहीं ली।
पार्वती जी की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे। उन्हें लग रहा था काश मरने से पहले एक बार अंकित को देख पाती। यही सोच कर वे बहुत देर उस रेस्टोरेंट को देखती रहीं। जैसे अभी उनका बेटा आयेगा और उन्हें वहां ले जायेगा। इसी उम्मीद से वे वहां बैठी रहीं।
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तभी उनके पास एक छोटी सी लड़की आई –
लड़की: मांजी एक गुब्बारा ले लीजिये अपने बच्चों के लिये।
मांजी को रोता देख वो उनके पास बैठ गई।
लड़की: मांजी आप क्यों रो रहीं हैं।
पार्वती जी: कुछ नहीं बेटा मुझे माफ करना मेरे घर में कोई बच्चा नहीं है जिसके लिये गुब्बारे लूं।
लड़की: नहीं मांजी पहले आप बताईये आप क्यों रो रहीं थी।
वह लड़की जिद करके बैठ गई। तब पार्वती जी ने सारी बात उसे बता दी।
यह सुनकर वह लड़की बोली।
लड़की: मांजी आप कहीं जाना मत मैं अभी आई।
वह लड़की सिग्नल पर खड़े और बच्चों के पास गई और उनसे कुछ बात करने लगी।
कुछ देर में वो लड़की वापिस आई उसके साथ कुछ और बच्चे थे और बोली –
लड़की: मांजी हाथ आगे कीजिये
पार्वती जी ने जैसे ही हाथ आगे किया उसने उनके हाथ पर कुछ रख दिया और मुट्ठी बंद कर दी।
पार्वती जी ने आश्चर्य से देखा उन्होंने मुट्ठी खोली तो उसमें कुछ नोट और सिक्के थे।
लड़की: मांजी आप चिंता न करें आज तो अभी इतनी ही कमाई हुई है। कल से हम सब अपनी आधी कमाई आपको दे दिया करेंगे जब तक आपकी पेंशन नहीं मिल जाती।
पार्वती जी: नहीं बेटा ये मैं कैसे ले सकती हूं तुम इतनी मेहनत से पैसे कमाते हो।
लड़की: क्या आपकी बेटी होती तो आपको भूखे मरने देती मांजी आप ये पैसे रखो और मैं आपके साथ आपके घर चलती हूं। कल से आपको कहीं जाने की जरूरत नहीं आपके घर पैसे पहुंच जायेंगे।
पार्वती जी की आंखों से टप टप आंसू बह रहे थे।
अपना सगा बेटा उन्हें बेसहारा छोड़ गया था और जिन बच्चों को हर सिग्नल पर हम तिरस्कार की नजरों से देखते थे वे ईश्वर की तरह मदद करने आ गये।
पार्वती जी: बेटा तुम कौन हो मैं तो तुम्हारा नाम भी नहीं जानती।
लड़की: मेरा नाम शान्ती है, ये भोला है, यह रवि है धीरे धीरे वह सबके नाम गिनाने लगी।
पार्वती जी: बेटा मैं ये पैसे नहीं ले सकती इसे तुम रखो मैं कोई न कोई इंतजाम कर लूंगी।
लड़की: मांजी हम सब अनाथ हैं यहीं सिग्नल पर कुछ सामान बेच कर गुजारा करते हैं और पास ही में हमारी झुग्गी है वहीं रहते हैं। पहले हम भीख मांगते थे फिर कुछ पैसे जोड़ कर हमने सामान बेचना शुरू कर दिया।
पार्वती जी: खबरदार जो अपने आप को अनाथ कहा अभी मुझे अपनी बेटी कह रही थी। तुम सब अनाथ नहीं हो। तुम सब मेरे घर चलो आज से वहीं रहना। वैसे भी मैं अकेली रहती हूं।
लड़की: नहीं मांजी हम इस लायक नहीं जो आपके घर में रहे हमारे जैसे लोग तो यहीं झुग्गी में रहते हैं।
पार्वती जी: बेटा तुम सब उन लोगों से बहुत ज्यादा अमीर हो जो बड़े बड़े आलीशान मकानों में रहते हैं। जो दौलत तुम्हारे पास है वो इन सबके पास कहां।
पार्वती जी उन सब बच्चों को अपने घर ले आईं।
उस लड़की ने और उसके साथ बच्चे बाहर से खाने पीने का सामान ले आये पार्वती जी ने खाना बनाया। सबने खाना खाया। उसके बाद वे सब अपने काम पर चल दिये।
पार्वती जी: मैं रात को खाना बना कर रखूंगी आज से तुम सब यहीं रहोगे शाम को टाईम से आ जाना।
यह सुनकर वह लड़की रोने लगी।
लड़की: मांजी आज मुझे मेरी मॉं की याद आ गई वह भी इसी तरह मेरे लिये खाना बना कर रखती थी। अब वो इस दुनिया में नहीं है।
पार्वती जी: बेटी आज से मुझे अपनी मॉं समझ और तेरी ही नहीं मैं इन सबकी मॉं हूं।
लड़की: मांजी आज से हम खूब मेहनत करेंगे। अब तो हमारे पास मॉं है।
पार्वती जी: हॉं ठीक है लेकिन मैं तुम्हारे पढ़ने लिखने का भी इंतजाम करूंगी।
इस तरह पार्वती जी को भी अपनों का साथ मिल गया। अब वे अकेली नहीं थीं अब से जीना चाहती थीं उन बच्चों के भविष्य के लिये।
Image Source : Pexels

















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