दिवाली के अगले दिन गोर्वधन पूजा नहीं है। इस दिन क्योंकि सोमवती अमावस्या है। जिसके कारण कोई भी शुभ कार्य नहीं हो सकता। इस बार दिवाली की अमावस्या 12 और 13 दोंनो दिन है। क्योंकि अमावस्या शुरू होते ही दिवाली मनाई जाती है।
इस कारण दिवाली 12 नवम्बर को मनाई जायेगी। वहीं 13 नवम्बर का दिन खाली रहेगा। अगले दिन 14 नवम्बर को गोर्वधन पूजा होगी। इसके साथ ही यह जानना भी आवश्यक है कि इस बार गोवर्धन पूजा उदया तिथि में मनाई जायेगी।
पंचाग के अनुसार गोर्वधन प्रतिप्रदा 13 नवम्बर दोपहर 2:36 से प्रारम्भ होकर 14 नवम्बर 2:56 तक समाप्त होगा। इस कारण गोर्वधन पूजा का शुभ मुर्हुत 14 नवम्बर सुबह 6:43 से 8:52 रहेगा।
गोर्वधन पूजा के लिये भगवान कृष्ण की गोबर से मूर्ति बनाई जाती है। इसके बाद इसे खीलों से सजाया जाता है। इस मूर्ति के चारों ओर दिये और मोमबत्ती जला कर पूजा की जाती है। इसे अन्नकूट पूजा भी कहा जाता है।
मन्दिरों में अन्नकूट का प्रसाद बनता है। जिससे भगवान का भोग लगा कर भक्तों में बांटा जाता है। इसके साथ ही मथुरा के मन्दिरों में इस दिन भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति को दूध पिलाया जाता है। भगवान का श्रृंगार किया जाता है उन्हें नई पोशाक पहनाई जाती है।
गोर्वधन पूजा के साथ ही इस दिन विश्वकर्मा जी की पूजा का भी विधान है। इस दिन सभी काम करने वाले अपने औजारों और मशीन की पूजा करते हैं।
भगवान विश्वकर्मा जी का भोग लगा कर सभी मशीनों पर टीका लगा कर उन्हें भी भोग लगाया जाता है। साथ ही मशीनों को कलावा बांध दिया जाता है।



















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