Chhath Puja 2023 Puja Vidhi Vrat Katha : भारत वर्ष में छठ पूजा का विशेष महत्व है। छठ पूजा बिहार, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश के कुछ भागों व नैपाल के कुछ हिस्से में मनाया जाता है। यह पर्व कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को मनाया जाता है।
छठ पूजा में भगवान सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है। इस पूजा को सबसे कठिन 36 घंटे के उपवास के साथ पूरा किया जाता है। जिसमें 24 घंटे का व्रत निर्जला रखा जाता है।
छठ पूजा व्रत करने की विधि
1# नहाय खाय (पहला दिन)
इस दिन भक्त किसी नदी या कुण्ड में स्नान करते हैं और उसका शुद्ध जल घर लाकर घर का शुद्धिकरण किया जाता है। इस दिन व्रत किया जाता है। यह व्रत शुद्ध भोजन (बिना प्याज लहसन) के साथ पूर्ण किया जाता है।
2# लोहंडा और खरना (दूसरा दिन)
इस दिन भक्त पूरे दिन उपवास रखते हैं और ठेकुआ (एक विशेष पकवान) बना कर सूर्य देव को अर्पित करते हैं। इसके साथ ही थेकुआ अपने प्रियजानों, साथ में पूजा करने आये लोगों में बांट दिया जाता है।
3# संध्या अर्घ्य (तीसरा दिन)
पूरे दिन निर्जला व्रत रखने के बाद शाम को भगवान सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। स्वादिष्ट व्यंजन बना कर भगवान सूर्य देव को अर्पित किये जाते हैं। भक्त पानी में खड़े होकर भगवान सूर्यदेव की स्तुति करते हैं। साथ ही भजन और गीत गाकर सूर्यदेव को प्रसन्न किया जाता है।
4# उष अर्ध्य (चौथा दिन)
पिछले दिन से निर्जला उपवास को सूर्य की पहली किरण को अर्ध्य देकर पूर्ण किया जाता है और संध्या की तरह ही भांति सभी व्यंजनों को सूर्य देव को अर्पित किया जाता है।
छठ पूजा एक व्यक्ति विशेष की पूजा न होकर पूरे समुदाय के साथ मिल कर मनाया जाने वाला पर्व है। इस पूजा में घर के शुद्धि करण से लेकर निर्जला व्रत कर शरीर का शुद्धिकरण भी होता है।
भगवान सूर्यदेव की स्तुति से घर में दरिद्रता समाप्त होती है। सुख और समपन्नता का आहवान होता है।
Read More : घर की दिवाली
छठ पूजा की कहानी
प्राचीन समय में सूर्यपुर नामक गॉव में। अनन्या नामक एक भक्त रहती थी। वह भगवान सूर्य की पूजा किया करती थी। उसकी अटूट भक्ति से सभी गॉव वाले बहुत प्रभावित थे।
अनन्या का पति अर्जुन एक मछुआरा था। वह बहुत दिन पहले समुद्र में मछली पकड़ने गया था वहां वह एक तूफान में फस कर डूब गया। अनन्या बहुत उदास रहने लगी थी। उसके जीवन में केवल भक्ति ही बची थी। लेकिन उसे उम्मीद थी कि एक दिन अवश्य ही अर्जुन वापस आयेगा।
इसी बीच छठ पूजा का पर्व आने वाला था। सभी गॉव के निवासी धूमधाम से छठ का पर्व मनाने की तैयारी कर रहे थे। पूरा गॉव उत्साह से भरा हुआ था, लेकिन अनन्या बहुत उदास थी। उसने पूजा की सारी तैयारी कर ली थी।
अनन्या पूरे विधि विधान के साथ अपने घर का शुद्धिकरण किया और छठ पूजा के लिये गंगा किनारे पहुंच गई। अनन्या ने पूजा शुरू की एक आत्मविश्वास के साथ कि उसका पति उसे मिल जायेगा। सन्ध्या के समय वह पानी में खड़े होकर छठ पूजा के गीत गाने लगी।
इसी तरह समय बीत रहा था। सुबह जब अनन्या अपना व्रत पूर्ण कर सूर्य को अर्घ्य देने जा रही थी। तभी उसे गंगा नदी में एक धुधंली सी नाव की छवि दिखाई दी। जैसे जैसे वह नाव उसके पास आ रही थी। उसने देखा कि उसमें अर्जुन खड़ा था।
अर्जुन को देख कर अनन्या की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। वह अर्जुन को देख कर रोने लगी। उस समय गंगा के किनारे पूरे गॉव के निवासी उत्साह से भर गये।
अनन्या ने अर्जुन के साथ पूजा कर छठ मैया का आशीर्वाद लिया। इस तरह अनन्या की अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर छठ मैया ने उसके पति के प्राणों की रक्षा की।
Image Source : Freepik


















Leave a Reply
View Comments