पैन बेचने वाली | Moral Story on Beggar in Hindi

Moral Story on Bagger in Hindi

Moral Story on Beggar in Hindi : सुमित हमेशा अपनी गाड़ी से ऑफिस जाता था। एक चौराहे पर जहां रेडलाईट का समय बहुत अधिक था। अक्सर उसे रुकना पड़ता था। एक दिन उसके पास एक बाहर तेरह साल की लड़की फटे मैले कुचेले कपड़े पहने आई और उसके शीशी पर हाथ मार रही थी।

सुमित मन ही मन बड़बड़ाने लगा। हर रेडलाईट का यही चक्कर है रुकते ही भीख मांगने वाले आ जाते हैं। उपर से यहां तो डेढ़ मिनट की लाईट होती है। उसने उसे मना कर दिया। लेकिन वह बार बार कोशिश करती रही।

कुछ देर बाद सुमित ने शीशा नीचे करते हुए कहा – ‘‘तुम्हें अभी मना किया न समझ नहीं आता’’

लड़की कुछ डरते हुए बोली ‘‘बाबूजी मैं तो पैन बैच रही थी बहुत अच्छे पैन हैं। दस रुपये के चार’’

यह सुनकर सुमित को लगा मैं इसे भिखारी समझ रहा था लेकिन यह तो सामान बेच रही है। सुमित ने पैन ले लिये और उसे दस का नोट पकड़ा दिया।

अगले दिन भी वही हुआ गाड़ी रुकते ही वह लड़की आई सुमित ने पैन खरीद लिये।

तीसरे दिन उसी समय रेडलाईट पर सुमित खड़ा था तभी वह लड़की फिर से आ गई।

सुमित ने कहा – ‘‘देखो मेरे पास बहुत से पैन इकट्ठे हो गये हैं। अब नहीं चाहिये किसी ओर को बेच दो।

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लड़की – ‘‘साहब पैन तो बहाना है। यहां पुलिस वाले भीख नहीं मांगने देते इसलिये पैन बेचने पड़ते हैं। आप ले लीजिये नहीं तो हमारे घर में आज खाना नहीं बनेगा।

सुमित – ‘‘मेरे दस रुपये से क्या होगा।’’

लड़की – ‘‘साहब दस रुपये इकट्ठे करते करते शाम तक 100 रुपये इकट्ठे हो जाते हैं।

सुमित ने उसे चुपचाप पैसे दे दिये और कहा – ‘‘सुनो ये पैन तुम रख लो पैन नहीं चाहिये मुझे।

पैसे लेकर वह लड़की चली गई।

यह सिलसिला हर दिन चलने लगा।

अब सुमित उससे बातें करने लगा। उसे पता लगा कि उसका नाम कुसुम है। यहीं पास में एक झोपड़ी में रहती है। घर में उसके पापा जो हमेशा पीकर पड़े रहते हैं, और एक मॉं है जो बीमार रहती है। उसकी एक छोटी बहन भी है जो उसके साथ रेडलाईट पर पैन बैचती थी।

सुमित रोज सुबह जब ऑफिस के लिये निकलता तो मॉं से छुट्टे पैसे जरूर ले जाता था।

एक दिन वह रेडलाई पर पहुंचा तो देखा कुसुम और उसकी बहन दोंनो नहीं हैं। तभी एक लड़का उसके पास आया और बोला ‘‘साहब मेरे पैन ले लीजिये’’

सुमित के पूछने पर उसने बताया – ‘‘साहब कल उसकी मम्मी चल बसीं इसी कारण दोंनो बहने नहीं आईं।’’

सुमित यह सब सुनकर बहुत दुःखी हुआ।

रात को सब काम खत्म करके जब वह बिस्तर पर पहुंचा। तो अचानक उसने ड्रॉर खोली जिसमें कुसुम के बेचे पैन पड़े थे। उन्हें देखकर वह सोचने लगी कि अब क्या होगा। उन दोंनो का ख्याल कौन रखेगा।

अगले दिन वह रेडलाई पर पहुंचा।

एक पैन बेचने वाले लड़के को लेकर कुसुम के घर पहुंच गया।

वहां उसने देखा कि दोंनो बहने बैठी रो रही हैं। उसका बाप वहां नहीं था। कुछ पड़ोस की औरते बैंठी थीं।

उसे देखते ही कुसुम उसके पास आई – ‘‘बाबूजी आप यहां हम गरीबों के घर’’

सुमित – ‘‘तुम कई दिन से दिखाई नहीं दीं इसलिये तुम्हें ढूंढता हुआ आ गया।’’

सुमित ने ऐसे दिखाया जेसे उसकी मॉं के बारे में उसे पता नहीं था।

कुसुम ने उसे सारी बात बताई।

सुमित ने उसे कुछ पैसे दिये और चला आया।

कुछ दिन बाद दोंनो बहने पहले की तरह पैन बेचने लगीं।

एक दिन सुमित जब रेडलाईट पर पहुंचा तो कुसुम भागती हुई उसके पास आई – ‘‘बाबूजी एक महरबानी कर दो मेरी बहन को कहीं ले जाओ किसी अनाथ आश्रम में रखवा दो इसको’’

सुमित – ‘‘क्यों क्या हुआ’’

कुसुम – ‘‘साहब मेरा बाप मेरी शादी कर रहा है। मेरे जाने के बाद इसे बेच देगा मैं चाहती हूं अपने सामने इसको यहां से भगा दूं।’’

सुमित – ‘‘लेकिन तुम शादी क्यों कर रही हों।

कुसुम – ‘‘साहब उसके पीने के कारण सर पर कर्ज हो गया है। मेरी शादी एक बूढ़े से करके अपना कर्जा चुकायेगा। मेरी तो जिन्दगी बर्बाद हो ही रही है मैं चाहती हूं कि यह बच जाये। मुझे पता है आपके साथ यह सुरक्षित रहेगी।

सुमित दोंनो को गाड़ी में बैठा कर एक एन.जी.ओ. में ले जाता है। वहां दोंनो को रहने का आश्रय मिल जाता है। सुमित समय समय पर उनसे मिलने जाता था। इस तरह दोंनो लड़कियों की जिन्दगी बदल जाती है।

दोस्तों हमें भी हर दिन सड़क पर ऐसे बच्चे मिलते हैं जिन्हें हम इग्नोर कर देते हैं। यदि उनमें से किसी एक बच्चे की मदद कर सकें तो पूरे समाज में कितना बदलाव हा सकता है।

Image Source : Pexels

Anil Sharma is a Hindi blog writer at kathaamrit.com, a website that showcases his passion for storytelling. He also shares his views and opinions on current affairs, relations, festivals, and culture.