गरीबी से विकास की ओर : एक यात्रा | Motivational Story in Hindi

Hindi-Motivational-Story

Motivational Story in Hindi : मोहन और राकेश दोंनो बचपन से गहरे दोस्त थे। दोंनो एक गॉव में रहते थे।  मोहन बहुत सीधा था जबकि राकेश का दिमाग बहुत तेज था। एक दिन मोहन ने राकेश से कहा –

मोहन: राकेश हम दोंनो पढ़ लिख नहीं पाये हैं, तो क्या हम हमेशा गरीब रहेंगे।

राकेश: तू चिन्ता मत कर मैं तुझे कभी गरीब नहीं रहने दूंगा। बस तू मैं जैसा कहूं वैसा ही करता रह। इस बात को भूल जा कि हम पढ़े लिखे नहीं हैं। पैसा पढ़ाई लिखाई से नहीं कमाया जाता पैसा दिमाग से कमाया जाता है।

Motivational Story in Hindi

इस तरह बात करते करते दोंनो घर पहुंच जाते हैं। मोहन जब अपने घर में गया तो उसके पिता रामलाल ने कहा

रामलाल: मोहन तू इस राकेश के साथ घूमता फिरता रहता है। यह न तो खुद कोई काम करता है न तुझे करने देता है। बेटा ऐसे कैसे चलेगा मेरी बात मान कल से मेरे साथ खेत पर चल दोंनो मेहनत से काम करेंगे।

यह सुनकर मोहन ने कहा

मोहन: पिताजी आप मुझे १ साल का समय दे दीजिये मैं मोहन के साथ मिलकर कोई काम करना चाहता हूॅं, यदि मैं सफल नहीं हो पाया तो आज से ठीक एक साल बाद मैं आपके साथ खेत में काम करने चलूॅंगा।

रामलाल: देखा मोहन की मॉं इस लड़के का दिमाग खराब हो गया है भला खेती के अलावा और यह क्या काम कर सकता है। इसे तो किसी बात की समझ नहीं है।

मॉं: सुनो जी अगर ये कुछ करना चाहता है तो हमें इसे एक मौका देना चाहिये।

रामलाल: ठीक है मैं एक मौका दे दूंगा लेकिन इसे एक रुपया भी नहीं दूंगा जो करना है वह अपने दम पर करे।

मोहन: नहीं पिताजी मुझे आपसे पैसे नहीं चाहियें।

अगले दिन मोहन ने सारी बात राकेश को बता दी।

राकेश: दोस्त तू चिन्ता मत कर एक साल तो बहुत बड़ी बात है। अगले ६ महीने में हम दोंनो का अपना व्यापार होगा।

मोहन: पता नहीं तू क्या प्लान बना रहा है लेकिन मैंने अपने पिताजी से बहुत डर लगता है और उन्होंने पैसे देने के लिये भी मना कर दिया।

राकेश: कोई बात नहीं पैसे तो मुझे भी घर से नहीं मिलने वाले। हमें कुछ ऐसा उपाय करना होगा जिसमें पैसे न लगें।

दोंनो दोस्त शाम को नदी के किनारे बैठ जाते हैं। बहुत देर तक बैठने के बाद राकेश कहता है।

राकेश: भाई सबसे ज्यादा पैसा कुछ बेचने से आ सकता है। तू सोच हमारे पास ऐसा क्या है जिसे हम बेच कर पैसा कमा सकें

मोहन: हम तो इतने गरीब हैं। क्या बेच सकते हैं।

राकेश: लेकिन हमारा घर भी तो फसल बेच कर ही चलता है। क्यों न हम अपनी फसल के साथ पूरे गॉव की फसल बेचे।

मोहन: लेकिन हमें कोई अपनी फसल क्यों देगा बेचने के लिये।

राकेश: वह तू मुझ पर छोड़ दे।

उसके बाद राकेश शहर जाकर अनाज दालों के मूल्य पता करता है। जहां उसे अनाज का मूल्य तीन गुना मिलता है।

अगले दिन राकेश किसानों के पास पहुंच जाता है। और उनसे बात करता है। किसान राकेश को फसल बेचने को तैयार हो जाते हैं।

उसके बाद राकेश किसानों से मिले अनाज को लेकर उसे साफ करके १ किलो और आधा किलो की पैकिंग में पैक करके शहर में ले जाकर दुगने दामों पर बेच देता है। उससे उसे जो भी पैसे मिलते उसमे से डेढ़ गुना किसानों को दे देता है।

इससे किसानों को उनकी फसल का दाम डेढ़ गुना मिल जाता है। और अच्छी पैकिंग करके राकेश को उसका दाम दोगुना मिल जाता है।

धीरे धीरे वे इस बिजनेस को बढ़ाने के लिये बड़ी जगह ले लेते हैं। और आस पास के गॉव से भी फसल खरीदने लगते हैं।

कुछ ही दिनों में उनकी बहुत कमाई होने लगती है। इस तरह दोंनो दोस्त एक बड़ा व्यापार जमा लेते हैं। अब वे दोंनो केवल बैठ कर व्यापार चलाते थे। उन्होंने कई पढ़े लिखे नौजवानों को अपने यहां नौकरी पर रख लिया था। जो उनका व्यापार संभालते थे।

कुछ ही दिनों में उन्होंने शहर में एक ब्रॉण्ड नाम के साथ अपने स्टोर खोल दिये।

इस तरह बिना पढ़े लिखे केवल दिमाग लगा कर दोंनो दोस्तों एक व्यापार शुरू कर लिया था। बस हमारे अन्दर कुछ करने का जुनून होना चाहिये। रास्ता अपने आप निकल जाता है।

Read Also :

नन्द और भाभी की लड़ाई

किसान के आलसी बेटे

अनाथ बेटी

Anil Sharma is a Hindi blog writer at kathaamrit.com, a website that showcases his passion for storytelling. He also shares his views and opinions on current affairs, relations, festivals, and culture.