नौकर की भक्ति | Ganesh Ji ki Kahani | Spiritual Story

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Ganesh Ji ki Kahani

जमुना देवी अपनी पुत्र कौशल और बहु मालती के साथ एक शहर में रहती थीं।

कौशल एक बड़ी कंपनी मैं नौकरी करता था। एक दिन शाम को कौशल घर आता है।

कौशल: मॉं मुझे नौकरी में तरक्की मिल गई है और सेलरी भी बढ़ गई है।

जमुना: बेटा यह तो बहुत अच्छी बात है।

मालती: मैं तो कब से आपकी तरक्की का इंतजार कर रही थी। सुनो जी मैंने आपसे पहले ही कहा था कि आपकी तरक्की होते ही हम नौकर रख लेंगे।

जमुना: बहु क्यों बेकार नौकर झंझट पालें छोटा सा परिवार हे खुद सब मिल जुल कर काम कर लेंगे।

कौशल: कोई बात नहीं मॉं मैंने पहले ही नौकर के लिए बात कर ली है वह घर का काम भी कर लेगा और खाली समय में तुम्हारी सेवा भी कर देगा।

अगले दिन भोला नौकर के रूप में उनके घर पहुंच जाता है।

भोला: जय राम जी की भैया आपने नौकरी के लिए बुलाया था।

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कौशल: हां मैंने ही बुलाया था लेकर यहां सबको नमस्ते कहा करो यह जयराम जी नहीं चलेगा।

भोला: लेकिन भैया ये तो भगवान का नाम है आप लोग भगवान का नाम नहीं लेते क्या।

जमुना: अरे तू यहां काम करने आया है या भजन हम पूजा पाठ नहीं करते हमें किसी चीज की कमी है क्या जो पूजा पाठ करते रहें। [Ganesh Ji ki Kahani]

मालती भोला को घर का काम समझा देती है।

भोला: मांजी हम तो भगवान को बहुत मानते हैं। और गणेश जी के तो हम भक्त हैं। उनकी हर सुबह पूजा करते हैं अगर आपको बुरा न लगे तो हम अपने कमरे में एक पूजा की चौकी लगा लें।

मालती: हॉं अपने कमरे में कुछ करो हमें कोई मतलब नहीं है।

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भोला उनके घर में काम करने लगता है।

एक दिन भोला सुबह सबको नाश्ता परोस रहा था। तभी वह जमना देवी से बोला: मांजी यहां गाय नहीं आती है क्या हमने तो गाय के लिए रोटी निकाल दी थी।

जमुना: हमने कभी गाय रोटी नहीं निकाली हमें क्या पता गाय आती है या नहीं तू क्या बेकार में रोटी बर्बाद कर रहा है

भोला: मांजी इसका बड़ा पुण्य मिलता है। आप अपने हाथ से पहली रोटी गाय को दिया करो।

मालती: भोला तू अपने काम से काम रख

भोला: दीदी मैं खुद सुबह गाय ढूंढ कर रोटी खिला दिया करूंगा आपको परेशान नहीं करूंगा।

अगले दिन से भोला गाय को रोटी देने लगा। और वह सुबह उठकर नहा धो कर गणेश जी की पूजा करता उनकी आरती करता जिसकी आवाज से बाकी सब उठ जाते थे। [Ganesh Ji ki Kahani]

कौशल: ये भोला सुबह सुबह आरती गा कर उठा देता है। चैन से सोने भी नहीं देता।

मालती: अब कर भी क्या सकते हैं आजकर अच्छे नौकर मिलते ही कहां है।

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एक दिन भोला पूजा कर रहा था

कौशल: भोला इतना टाईम तुम पूजा में लगा देते हो जब सुबह पूजा कर ली तो शाम को क्यों पूजा करते हो।

मालती: देखिये जी यह डिब्बे में से देशी घी लेकर दोनो समय उसके दिये जलाता है।

जमना: भोला यह सब यहां नहीं चलेगा कल से तू पूजा नहीं करेगा।

भोला: लेकिन मांजी इसमें तो हमारे साथ साथ आपकी भी भलाई है।

कौशल: तू हमारी भलाई छोड़ चुपचाप अपना काम कर कल से पूजा बंद।

भोला: ठीक है हम कल से चुपचाप पूजा कर लेंगे और घी भी अपने पैसों से ले आयेंगे।

एक दिन कौशल बहुत परेशान घर आया

मालती: क्याबात है आप बहुत परेशान हैं।

कौशल: मेरी नौकरी जाने वाली है अब घर का खर्च कैसे चलेगा और घर की किश्त नहीं भरी तो मकान भी हाथ से चला जायेगा।

अगले दिन वे भोला से बात करते हैं।

कौशल: भोला तुम कल से कहीं और काम ढूंढ लेना हम तुम्हें नहीं रख पायेंगे।

भोला: मालिक एक बात कहूं आपको भगवान ने सब कुछ दिया है लेकिन आप भगवान का नाम तक लेना नहीं चाहते आपने उनके दिये के लिए घी देने से मना कर दिया। आपने विघ्न हर्ता की पूजा में विघ्न डाल कर अच्छा नहीं किया मेरी बात मानीये पूरे मन से उनकी पूजा शुरू कीजिये उनसे माफी मांगिये सब ठीक हो जायेगा। [Ganesh Ji ki Kahani]

मालती और जमुना दोंनो ने उसी समय पूजा की तैयारी की और पूरे परिवार ने गणेश जी की पूजा की आरती गाई और प्रसाद चढ़ाया अब यह उनका हर दिन का नियम बन गया था।

कुछ ही दिन में कौशल को नई नौकरी मिल गई। और घर में पहले की तरह खुशहाली रहने लगी।

हर दिन भोला सुबह गण्पति जी की पूजा की तैयारी करता पूरा परिवार पूजा करता और उसके बाद गाय को रोटी खिला कर ही वे नाश्ता करते थे।