राधिका, एक छोटी बच्ची, अपने पिता श्यामलाल जी के साथ गांव में रहती थी।

एक दिन बहुत गर्मी थी, और श्यामलाल जी पानी लेने कुएं गए लेकिन चक्कर खाकर गिर पड़े।

गांववाले उन्हें घर लाए, लेकिन राधिका के पास पानी नहीं था और उसे बहुत प्यास लगी।

उसने भगवान से प्रार्थना की, "भगवान जी, पानी भिजवा दो।" 

उसी समय साधुओं की एक टोली वहां से गुजरी, और एक साधु राधिका के घर पहुंचे। 

उन्होंने राधिका को पानी और खाना दिया, जिससे उसकी जान बच गई। 

साधु बाबा ने राधिका की देखभाल की और श्यामलाल जी को एक रुद्राक्ष दिया। 

राधिका की सच्ची प्रार्थना से उनके जीवन में सुख-समृद्धि आ गई।