Motivational True Story in Hindi : प्रिया एक गरीब विधवा औरत थी। वह अपनी सास और 5 साल के बेटे अमित के साथ रहती थी। उसकी सास रुकमणि बहुत गुस्से वाली थी। रुकमणि हमेशा अपनी बहु को डाटती मारती रहती थी।
एक दिन प्रिया घर में काम कर रही थी। तभी रुकमणि उसके पास आती है।
रुकमणि: बहु तू घर का काम ही करती रहेगी या बाहर जाकर भी कोई काम करेगी मेरे बेटे को खा गई अब क्या मेरे पोते को भूखा मारेगी। बाहर जाकर कुछ काम कर और पैसे कमा कर ला।
प्रिया: मांजी मैं कल गई थी काम ढूंढने लेकिन मुझे कोई काम नहीं मिला आज फिर जाकर काम की तलाश करती हूं।
प्रिया अपनी सास और अमित के लिये खाना बना कर बाहर चली जाती है। वह कई जगह जाती है लेकिन उसे कोई काम नहीं मिलता इसी तरह पूरा दिन बीत जाता है। इसी तरह पूरा दिन बीत जाता है। प्रिया निराश होकर घर की तरफ चल देती है।
तभी वह एक ढाबे पर किसी को बात करते सुनती है।
ढाबे वाला: देख भाई मोहन तू मुझसे दुगने पैसे लेले लेकिन काम छोड़ कर मत जा तू इतना अच्छा खाना बनाता है तभी मेरा ढाबा चल रहा है अब तू अचानक काम छोड़ कर जा रहा है।
मोहन: मैं अपने गॉव जा रहा हूं एक महीने बाद वापस आ जाउंगा।
ढाबे वाला: एक महीने में तो मेरे सारे ग्राहक टूट जायेंगे। तू 1 हफते में वापास आ जा। मैं तुझे दुगने पैसे दूंगा।
लेकिन मोहन नहीं मानता और नौकरी छोड़ कर चला जाता है।
तभी प्रिया ढाबे वाले के पास जाती है।
प्रिया: भैया मैंने अभी अभी तुम्हारी बातें सुनी हैं मुझे बहुत अच्छा खाना बनाना आता है मुझे नौकरी पर रख लो।
ढाबे वाला: यह कोई घर का खाना नहीं बनाना है हर दिन 300 लोगों का खाना बनता है। तुम कैसे बना पाओंगी।
प्रिया: भैया मुझे पैसों की बहुत जरूरत है मेरा विश्वास करो तुम्हारा एक भी ग्राहक वापस नहीं जायेगा।
ढाबे वाला: पहले कहीं काम किया है।
प्रिया: नहीं भैया अभी एक महीने पहले मेरे पति का स्वर्गवास हुआ है तभी मैं काम ढूंढने निकली हूं।
ढाबे वाले को उस पर दया आ जाती है वह कहता है
ढाबे वाला: ठीक है बहन मैं अपना बिजनिस तुम्हारे हाथों में सौंप रहा हूं अगर मेरे ग्राहकों को तुम्हारा खाना पसंद नहीं आया तो मैं तुम्हें पैसे नहीं दूंगा।
प्रिया मान जाती है। अगले दिन से प्रिया ढाबे पर खाना बनाने लगती है। प्रिया बहुत अच्छा खाना बनाती थी जिससे उसके ढाबे पर लोगों की संख्या बढ़ने लगी।
प्रिया को इसी तरह खाना बनाते एक महीना होने वाला था।
एक दिन मोहन वापस ढाबे पर आ जाता है।
मोहन: लो सेठ मैं आ गया तुम्हारे बारे में सोच कर मैं एक महीने से पहले ही आ गया बताओ आज क्या बनाना है।
ढाबे वाला: भाग यहां से मैंने किसी और को रख लिया है तू तो दुगने पैसों में भी नहीं मान रहा था। यह औरत बहुत अच्छा खाना बनाती है तू अब रस्ता नाप।
मोहन बहुत गुस्सा हो जाता है।
मोहन: मैं भी देखता हूं यह ढाबे पर कितने दिन काम करती है इसके जाने के बाद तू मेरे पास आयेगा तब तुझे दुगने दाम देने होंगे।
मोहन वहां से चला जाता है और प्रिया को ढाबे से निकलवाने की तरकीब सोचने लगता है। इसी बीच ठंड का मौसम आ जाता है। प्रिया को कभी कभी ढाबे पर रात को देर हो जाती थी। ठंड के मौसम वह ठिठुरती हुई देर रात घर पहुंचती थी।
एक दिन वह रात को वापस अपने घर जा रही थी। तभी उसे रास्ते में मोहन मिल जाता है।
मोहन: सुन वह ढाबा मेरा है कल से वहां से काम छोड़ दे नहीं तो मुझसे बुरा कोई नहीं होगा।
प्रिया: भैया मैं बहुत गरीब हूं मुझ पर रहम करो तुम तो कहीं भी काम ढूंढ लोगे मैं अकेली कहां जाउंगी काम ढूंढने
मोहन: वह सब मुझे नहीं पता कल से तू ढाबे पर नहीं जायेगी बस।
यह कहकर मोहन चला जाता है।
प्रिया घर आकर बहुत रोती है। अगले दिन वह ढाबे पर जाकर ढाबे के मालिक को सारी बात बता देती है।
उसका मालिक कहता है
ढाबे वाला: बहन तुम चिन्ता मत करो इस मोहन को तो मैं सबक सिखाउंगा। तुम आज फिर उसी रास्ते से जाना।
प्रिया: भैया इतनी सर्दी में वह सड़क सुनसान रहती है। कहीं मोहन मिल गया तो पता नहीं मेरे साथ क्या करेगा।
ढाबे वाला: बहन तुम चिन्ता मत करो मैं छिप कर वहीं रहूंगा जब वह तुम्हारे पास आयेगा तभी मैं उसे पकड़ लूंगा।
प्रिया रात को उसी रास्ते से वापस चल देती है। तभी उसे मोहन मिलता है।
मोहन: मेरे मना करने के बाद भी तू ढाबे पर गई अब मैं तुझे नहीं छोड़ूंगा।
मोहन जैसे ही उसे मारने के लिये आगे बढ़ता है। ढाबे का मालिक पुलिस के साथ आकर उसे पकड़ लेता है।
पुलिस: एक गरीब विधवा औरत को परेशान करता है अब तो तुझे ढाबा नहीं जेल मिलेगी।
यह कहकर वे मोहन को पकड़ कर ले जाते हैं।
प्रिया अगले दिन से फिर से ढाबे पर काम करने लगती है।
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